{"_id":"64c80c2cb76d54ba06068444","slug":"arrangements-made-to-save-rain-water-in-162-buildings-hathras-news-c-56-1-sali1016-2859-2023-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: 162 भवनों में किया वर्षा जल को सहेजने का इंतजाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: 162 भवनों में किया वर्षा जल को सहेजने का इंतजाम
Tue, 01 Aug 2023 01:01 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 01 Aug 2023 01:01 AM IST
विज्ञापन
प्राथमिक विद्यालय कुरावली में बना रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा हुआ है। संवाद
- फोटो : samvad
जल शक्ति अभियान के तहत वर्षा के जल संचयन से गिरते भूगर्भ जल स्तर को बचाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अब अफसर वर्षा जल संचयन के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) प्रणाली लागू कराने में जुट गए हैं। जिले में 162 भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली बनकर तैयार हो चुकी है। 22 ग्राम पंचायत भवनों व 15 परिषदीय विद्यालयों में इस पर काम चल रहा है। इस प्रणाली के जरिये प्रति वर्ष 315.9 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन करने का लक्ष्य रखा गया है।
जिले में लगातार भूजल स्तर में गिरावट की समस्या से निपटने के लिए इस प्रणाली को लागू करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। शासन स्तर से जल शक्ति अभियान के तहत सरकारी और सार्वजनिक भवनों में इस प्रणाली को तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। लिहाजा जिले के 162 भवनों में यह प्रणाली तैयार कर ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि इन भवनाें में सिस्टम शुरू होने से प्रतिवर्ष लगभग 315.9 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन हो सकेगा। साथ ही 22 ग्राम पंचायतों व 15 परिषदीय विद्यालयों में वर्षा जल संचयन प्रणाली निर्माणाधीन है।
इन भवनों में सिस्टम के लागू होने से 72.15 लाख लीटर वर्षा जल संचयन का अनुमान है। इससे नालियों में बेकार बह जाने वाले बारिश के जल को सोख पिट द्वारा भूमि में संग्रहीत कर दिया जाता है, जिससे भूगर्भ जल स्तर में गिरावट में कमी आएगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 के सापेक्ष वर्ष 2023 में मानसून पूर्व भूगर्भ जलस्तर की स्थिति में सुधार आया है। ब्लॉक हसायन, सिकंदराराऊ, मुरसान, सादाबाद, सहपऊ और सासनी में भूगर्भ जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है। हाथरस व हाथरस शहर के जल स्तर में कमी दर्ज की गई है।
विज्ञापन
162 भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली शुरू हो गई है। इसके जरिए प्रतिवर्ष करीब 315.9 लाख लीटर वर्षा के जल को भूगर्भ में भेजा जा सकेगा। परिषदीय विद्यालयों, निजी भवनों, ग्राम पंचायत भवनों में यह प्रणाली जल्द लागू कराई जा रही है।
-अजीत कुमार, सहायक अभियंता लघु सिंचाई।
विज्ञापन
जिले में लगातार भूजल स्तर में गिरावट की समस्या से निपटने के लिए इस प्रणाली को लागू करने की जरूरत महसूस की जा रही थी। शासन स्तर से जल शक्ति अभियान के तहत सरकारी और सार्वजनिक भवनों में इस प्रणाली को तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। लिहाजा जिले के 162 भवनों में यह प्रणाली तैयार कर ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि इन भवनाें में सिस्टम शुरू होने से प्रतिवर्ष लगभग 315.9 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन हो सकेगा। साथ ही 22 ग्राम पंचायतों व 15 परिषदीय विद्यालयों में वर्षा जल संचयन प्रणाली निर्माणाधीन है।
विज्ञापन
इन भवनों में सिस्टम के लागू होने से 72.15 लाख लीटर वर्षा जल संचयन का अनुमान है। इससे नालियों में बेकार बह जाने वाले बारिश के जल को सोख पिट द्वारा भूमि में संग्रहीत कर दिया जाता है, जिससे भूगर्भ जल स्तर में गिरावट में कमी आएगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 के सापेक्ष वर्ष 2023 में मानसून पूर्व भूगर्भ जलस्तर की स्थिति में सुधार आया है। ब्लॉक हसायन, सिकंदराराऊ, मुरसान, सादाबाद, सहपऊ और सासनी में भूगर्भ जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है। हाथरस व हाथरस शहर के जल स्तर में कमी दर्ज की गई है।
विज्ञापन
162 भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली शुरू हो गई है। इसके जरिए प्रतिवर्ष करीब 315.9 लाख लीटर वर्षा के जल को भूगर्भ में भेजा जा सकेगा। परिषदीय विद्यालयों, निजी भवनों, ग्राम पंचायत भवनों में यह प्रणाली जल्द लागू कराई जा रही है।
-अजीत कुमार, सहायक अभियंता लघु सिंचाई।