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बेटियों को बनाएं शिक्षित और संस्कारवान
hathras
Updated Sun, 07 Feb 2016 11:40 PM IST
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हाथरस (ब्यूरो)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में कलेक्ट्रेट में सामाजिक संस्था-महिला कामाख्या एवं वात्सल्य लखनऊ द्वारा पीसीएनडीटी एक्ट के अंर्तगत ’’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ पर आधारित विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शुभारंभ प्राधिकरण के नोडल अधिकारी एवं प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कुंवर अल्ला रक्खे खां ने किया। उन्हाेंने कहा कि समाज में बालिकाओं को शिक्षित और संस्कारवान बनाने पर जोर दिया जाए। जिस घर में बेटियां होती है, वहां खुदा की रहमत होती है। प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) ओमवीर ने लोगों की विकृत मानसिकता और विषम परिस्थितियों में महिलाओं को स्वयं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के बारे में चर्चा की और कहा कि लड़कियों को कमतर नहीं आंका जाए, बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनाया जाए। सीडीओ जावेद अख्तर जैदी ने कहा कि अब माहौल तेजी से बदल रहा है। हम सब को बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए उनकी हौसला अफजाई करें।
सीएमओ डॉ.रामवीर सिंह ने कहा कि वर्ष 2001 में प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले 886 लड़कियां, वर्ष 2011 में 865 लडकियां थीं और वर्ष 2015 में यह अंतर कम होकर 892 लड़कियोें का ही रह गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा ने शिविर का संचालन किया। डीआईओ यतीश चंद्र गुप्ता, अधिवक्ता बीना गुप्ता, अनिल बौहरे, डॉ. डीके अग्रवाल, डीजीसी रामदास, भवतोष मिश्र, डॉ. एससी शर्मा, डॉ. अनु विमल, मनु दीक्षित आदि ने प्रसव पूर्व भ्रूण लिंग परीक्षण को दंडनीय अपराध बताया। इस मौके पर वात्सल्य संस्था के प्रतिनिधि अर्जुन सिंह तथा ममता मिश्रा सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।
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सीएमओ डॉ.रामवीर सिंह ने कहा कि वर्ष 2001 में प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले 886 लड़कियां, वर्ष 2011 में 865 लडकियां थीं और वर्ष 2015 में यह अंतर कम होकर 892 लड़कियोें का ही रह गया।
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वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा ने शिविर का संचालन किया। डीआईओ यतीश चंद्र गुप्ता, अधिवक्ता बीना गुप्ता, अनिल बौहरे, डॉ. डीके अग्रवाल, डीजीसी रामदास, भवतोष मिश्र, डॉ. एससी शर्मा, डॉ. अनु विमल, मनु दीक्षित आदि ने प्रसव पूर्व भ्रूण लिंग परीक्षण को दंडनीय अपराध बताया। इस मौके पर वात्सल्य संस्था के प्रतिनिधि अर्जुन सिंह तथा ममता मिश्रा सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।
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