{"_id":"5989fe724f1c1bbd5d8b48f1","slug":"another-woman-s-cut-pecker","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक और महिला की कटी चोटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक और महिला की कटी चोटी
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Tue, 08 Aug 2017 11:53 PM IST
विज्ञापन
चोटी
- फोटो : Amar Ujala
जिले में महिलाओं की चोटी रहस्यमय ढंग से कटने की दहशत खत्म नहीं हुई है। अब हसायन क्षेत्र के गांव श्यामपुर की एक महिला ऐसे ही दहशत का शिकार हो गई। महिला की मानें तो वह रात को अच्छी भली सोई थी, लेकिन सुबह उठी तो उसके बाल कटे हुए थे। यह देखकर वह बेहोश हो गई। उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया गया है।
खबर लिखने तक महिला का उपचार जारी था।
गौरतलब है कि देश भर में फैली महिलाओं की चोटी कटने की दहशत रक्षाबंधन के दिन तो देखने को नहीं मिली, लेकिन रक्षाबंधन के अगले दिन से ही यह सिलसिला फिर शुरू हो गया। हसायन क्षेत्र के गांव श्यामपुर निवासी विमला देवी (42 वर्ष) पत्नी हाकिम सिंह रात को ठीक-ठाक सोईं थीं।
सुबह चार बजे ही उनकी आंख खुली तो देखा उनके बाल कटे हुए पड़े हैं। यह देखकर वह बुरी तरह घबरा गईं। उन्होंने अपनी बेटी प्रवीना को जगाया और तस्दीक कि क्या पीछे से उनके बाल कट गए हैं। बेटी ने जब तस्दीक कर दी तो विमला देवी गश खाकर गिर पड़ीं। उनकी तबियत बिगड़ गई। उन्हें आनन-फानन सीएचसी हसायन ले जाया गया। वहां उनका उपचार शुरू कर दिया। खबर लिखने तक वह स्वस्थ नहीं हो सकी थीं। परिवार वाले भी उनकी चोटी कटने के बाद दहशत में नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
खबर लिखने तक महिला का उपचार जारी था।
गौरतलब है कि देश भर में फैली महिलाओं की चोटी कटने की दहशत रक्षाबंधन के दिन तो देखने को नहीं मिली, लेकिन रक्षाबंधन के अगले दिन से ही यह सिलसिला फिर शुरू हो गया। हसायन क्षेत्र के गांव श्यामपुर निवासी विमला देवी (42 वर्ष) पत्नी हाकिम सिंह रात को ठीक-ठाक सोईं थीं।
विज्ञापन
सुबह चार बजे ही उनकी आंख खुली तो देखा उनके बाल कटे हुए पड़े हैं। यह देखकर वह बुरी तरह घबरा गईं। उन्होंने अपनी बेटी प्रवीना को जगाया और तस्दीक कि क्या पीछे से उनके बाल कट गए हैं। बेटी ने जब तस्दीक कर दी तो विमला देवी गश खाकर गिर पड़ीं। उनकी तबियत बिगड़ गई। उन्हें आनन-फानन सीएचसी हसायन ले जाया गया। वहां उनका उपचार शुरू कर दिया। खबर लिखने तक वह स्वस्थ नहीं हो सकी थीं। परिवार वाले भी उनकी चोटी कटने के बाद दहशत में नजर आए।
विज्ञापन