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Hathras News: मनुष्य ही नहीं पशुओं पर भी पड़ रहा शीतलहर का असर, ऐसे करें उनकी देखभाल
Fri, 13 Jan 2023 04:07 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 13 Jan 2023 04:07 PM IST
सार
शीतलहर का असर केवल मनुष्य के स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के जीवन पर भी पड़ रहा है। इस मौसम में पशुपालक शीत ऋतु में पशुओं की देखभाल वैज्ञानिक तरीके से करें, तो अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते है।
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बीमार गाय को उपचार के लिए ले जाते हुए
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वर्तमान में चल रही शीतलहर का असर केवल मानव स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के जीवन पर भी पड़ रहा है। इस मौसम में कृषि वैज्ञानिक पशुपालकों को पशुओं की बेहतर देखभाल करने की सलाह दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि पशुपालक शीत ऋतु में पशुओं की देखभाल वैज्ञानिक तरीके से करें, तो अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते है।
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अगर आहार प्रबंधन व स्वास्थ्य पर लापरवाही की गई तो दुग्ध उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे लाभ की बजाय अर्थिक नुकसान हो सकता है। इन सबके प्रभाव से पशुओं को बचाया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र पशु पालन वैज्ञानिक डॉ. सुधीर कुमार रावत पशुओं की देखभाल की सलाह किसानों को दे रहे हैं।
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आवास प्रबंधन
जाड़े में सीधी ठंडी हवा से बचाव के लिए पशुशाला की खिड़कियों, दरवाजों तथा अन्य जगहों पर टाट, बोरी या तिरपाल के पर्दे लगा दे या फिर ज्वार, बाजरा, मक्का के सूखे डंठलों का टाट बनाकर टांगना चाहिए। यदि आवास की छत सीमेंट या लोहे की चादर की बनी हो, तो छत के ऊपर पुआल या अन्य स्थानीय उपलब्ध सामग्री से ढक दें। अधिक ठंड होने पर हीटर, आग या बिजली के बड़े-बड़े बल्ब लगा देना चाहिए, जिससे तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है।
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पशु के बैठने वाली जगह साफ सुथरी, सूखी, नमी रहित, नरम, मोटा बिछौना होना चाहिए। पशुशाला की फर्श पर भूसा, बुरादा या पुआल का बिछावन प्रयोग करना चाहिए। अधिक ठंड होने पर रात्रि में बीमार, कमजोर पशु व बछड़ों को बोरी या टाट से ढंक देना चाहिए।
पशु प्रबंधन
शीत ऋतु में नमी के कारण थनैला रोग हो जाता है, इसके लिए पशुशाला में कभी भी नमी नहीं होनी चाहिए। शीत ऋतु में अक्सर पशुओं के थन फट जाते हैं, फटे हुए तथा जख्मी थनों को ग्लिसरीन और पावोडीन में डुबोना चाहिए। इस मौसम में पशुओं के जूं और किलनी अधिक हो जाते हैं, इसलिए ब्यूटाक्स दवा का घोलकर पशुओं के शरीर पर लगाना चाहिए।
आहार प्रबंधन
ठंड से बचाव के लिए पशुओं को संतुलित आहार बहुत ही आवश्यक है। शीत ऋतु में हरा चारा अधिक न खिलाएं। इससे अफरा रोग हो जाता है। हमेशा फलीदार हरा चारा बरसीम के साथ गैर फलीदार हरा चारा जई और राई घास को मिलाकर देना चाहिए, क्योंकि इससे प्रोटीन व कार्बोहाईड्रेट की पूर्ति हो जाएगी। हरे चारे को सुबह शाम देने से पहले थोड़ी देर तक सुखा देना चाहिए, जिससे ठंड भी कम हो जाएगी और अफरा रोग भी नही होगा।
ठंड का उचित ध्यान न रखने पर निमोनिया रोग हो जाता है। ठंड से बचाने के लिए पशु को अजवाइन का सत 5-10 ग्राम देना चाहिए। इसके अतिरिक्त सरसों के तेल में अजवाइन या कपूर को उबालकर थोड़ा गुनगुना रहने पर पूरे शरीर पर मालिश करनी चाहिए। शीत ऋतु में पशुओ के आहार में खली की मात्रा कम कर देनी चाहिए और अनाज की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए, क्योंकि इस समय बरसीम बहुत होती है, जिससे प्रोटीन की पूर्ति हो जाती है।
प्रसव के बाद पशु को 600 ग्राम गुड़, 2.5 किग्रा चोकर, 50 ग्राम नमक और 50 ग्राम खनिज मिश्रण देना चाहिए। इसके अतिरिक्त पशुओं को दो से तीन किग्रा अरहर की दाल देनी चाहिए। इससे शरीर को गर्मी प्राप्त होगी तथा ठंड से बचाव होगा। इस समय पशुओं को कभी अधिक ठंडा व गर्म पानी नहीं पिलाना चाहिए।