मुआवजे के लिए और कब तक करें इंतजार
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हाथरस। बेशक जिले में बारिश और ओलावृष्टि पीड़ित किसानों को 70 करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में बंट चुका है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में जिले के किसान मुआवजे से वंचित हैं। यह किसान मुआवजे की आस में रोजाना तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वहां से सिवाय आश्वासन के कुछ हाथ नहीं लग रहा। मुआवजे की राह तकते-तकते एक साल बीत चुका है, लेकिन किसी को इन पर तरस नहीं आया है।
जिले के तकरीबन 50 फीसदी ओलावृष्टि प्रभावित गांवों के किसानों को मुआवजे की रकम का इंतजार है, लेकिन शासन से बजट नहीं मिलने से इन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसानों की मानें तो अब तक जो मुआवजा बांटा गया है, वह उन गांवों में बंटा है, जहां सत्ताधारियों का प्रभाव है या उनका वोट बैंक है। जिन गांवों के किसान हकीकत में जरूरतमंद थे, उन्हें मुआवजे के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली है।
हालांकि जिला प्रशासन को इन किसानों के मुआवजे के लिए करीब 72 करोड़ रुपये की और दरकार है। प्रशासन ने पिछले साल आपदा के बाद करीब 1.45 अरब रुपये की मांग मुआवजे के बजट के लिए भेजी थी, जिसमें से किश्तों में तकरीबन 70 करोड़ रुपया ही जिले को मिला है, जोकि पिछले महीने तक बंटवाया जा चुका है।
मुआवजे के लिए और धनराशि की मांग शासन से की जा चुकी है। इस बारे में प्रमुख सचिव राजस्व को पत्र भी लिखे गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही शासन से और धनराशि मिलेगी, जिसके बाद किसानों को मुआवजा वितरण कर दिया जाएगा।
-शमीम अहमद, डीएम हाथरस
बोले किसान
मुआवजे के इंतजार में एक साल बीता जा रहा है, लेकिन अभी तक प्रशासन को हमारा ख्याल नहीं आया है। पता नहीं कब तक इंतजार करना पड़ेगा।
-रामेश्वर दयाल, नगला बनारसी
इस बार की फसल के लिए कर्जा लेना पड़ा है। पिछले साल की दोनों फसल सूखा और ओलावृष्टि की मार से बर्बाद हो गईं। मुआवजे से कुछ सहारा मिल जाएगा।
-यशपाल सिंह, हतीसा
आसपास के सभी गांवों में मुआवजा वितरित हो चुका है, लेकिन अभी तक हमारे गांव का नंबर नहीं आया है। मुआवजे में भेदभाव हो रहा है।
-मुनेश कुमार, झींगुरा
लगातार दो साल सूखा और ओलावृष्टि से हमारी फसल काफी तबाह हो चुकी है। मुआवजे से हालांकि नुकसान की भरपाई तो नहीं होगी, लेकिन राहत जरूर मिलेगी।
-श्रीपाल सिंह, ककोड़ी