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Hathras News: बाढ़ के बाद खेतों में तीन फीट तक जमी यमुना की रेत
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यमुना का जलस्तर घटने के बाद खेत में भरा पानी। संवाद
- फोटो : samvad
यमुना नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद टप्पल के बाढ़ प्रभावित गांवों में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य की ओर बढ़ रहा है। महाराजगढ़ गांव में बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है। ग्रामीण घरों और खेतों में भरी यमुना की रेत को साफ करने की चुनौती से जूझ रहे हैं। प्रशासन के चलाए जा रहे राहत कार्यों से भी लोगों को मदद मिली है।
बाढ़ के कारण टप्पल के गांव महाराजगढ़ में बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को भी फिर से शुरू कर दिया गया है। बिजली आने से लोगों के घरों में रोशनी लौटी है और जनजीवन सामान्य होने लगा है। प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई का काम भी तेजी से चल रहा है।
किसानों पर दोहरी मार
बाढ़ का पानी उतरने के बाद टप्पल के किसान नई चुनौती का सामना कर रहे हैं। यमुना की रेत की खेतों में दो से तीन फीट मोटी परत जम गई है। इसे हटाने और खेत को फिर से खेती लायक बनाने में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ट्रैक्टरों की मदद से रेत हटाने का काम शुरू होगा, लेकिन इसमें काफी समय और पैसा लगेगा।
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आर्थिक संकट में किसान, सरकार से मदद की उम्मीद
बाढ़ की वजह से किसानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। खेती का काम फिर से शुरू करने में उन्हें खर्च का सामना करना पड़ेगा, जो उनकी वर्तमान स्थिति में एक बड़ी चुनौती है। किसान सरकार से आर्थिक मदद और सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें। जलस्तर पूरी तरह खत्म होने के बाद ही करीब खेती का काम शुरू हो पाएगा।
बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग सतर्क
बाढ़ का पानी घटने के साथ ही बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है। धान और अन्य फसलों के सड़ने से दुर्गंध उठ रही है।दूषित पानी और गंदगी बीमारियों के फैलने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को साफ पानी पीने और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है। गांव-गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और दवा वितरित की जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील की है।
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बाढ़ के कारण टप्पल के गांव महाराजगढ़ में बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को भी फिर से शुरू कर दिया गया है। बिजली आने से लोगों के घरों में रोशनी लौटी है और जनजीवन सामान्य होने लगा है। प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई का काम भी तेजी से चल रहा है।
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किसानों पर दोहरी मार
बाढ़ का पानी उतरने के बाद टप्पल के किसान नई चुनौती का सामना कर रहे हैं। यमुना की रेत की खेतों में दो से तीन फीट मोटी परत जम गई है। इसे हटाने और खेत को फिर से खेती लायक बनाने में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ट्रैक्टरों की मदद से रेत हटाने का काम शुरू होगा, लेकिन इसमें काफी समय और पैसा लगेगा।
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आर्थिक संकट में किसान, सरकार से मदद की उम्मीद
बाढ़ की वजह से किसानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। खेती का काम फिर से शुरू करने में उन्हें खर्च का सामना करना पड़ेगा, जो उनकी वर्तमान स्थिति में एक बड़ी चुनौती है। किसान सरकार से आर्थिक मदद और सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें। जलस्तर पूरी तरह खत्म होने के बाद ही करीब खेती का काम शुरू हो पाएगा।
बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग सतर्क
बाढ़ का पानी घटने के साथ ही बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है। धान और अन्य फसलों के सड़ने से दुर्गंध उठ रही है।दूषित पानी और गंदगी बीमारियों के फैलने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को साफ पानी पीने और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है। गांव-गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और दवा वितरित की जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील की है।