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Hathras News: यमुना में उफान, 45 साल बाद गांव मिढ़ावली के खेतों में घुसा पानी

Sat, 15 Jul 2023 01:20 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Updated Sat, 15 Jul 2023 01:20 AM IST
सार

यमुना का जल प्रवाह इतना तेज है कि उसे रोका नहीं जा सकता, इसलिए किसानों को फसल की बर्बादी का डर सता रहा है। यमुना के तटीय इलाकों में गेहूं, बाजरा, मूंग और धान आदि की फसल खड़ी है। शुक्रवार को क्षेत्रीय लेखपाल पंकेश कौशिक ने मौके पर पहुंचकर जल प्रभावित क्षेत्र का मुआयना किया। उनका कहना है कि यमुना के पानी से अभी किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है।

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After 45 years Yamuna water entered the fields of Midhavali village
सादाबाद के गांव मिढ़ावली में खेतों में भरा यमुना का पानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते दिनों दिल्ली में हुई भारी बारिश के बाद यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया है। यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसका असर मथुरा जिले की सीमा से सटे जिले की सादाबाद तहसील के गांव मिढ़ावली में भी देखने को मिल रहा है। यमुना का पानी इस गांव में दस्तक दे चुका है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

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बारिश ने देश के कई राज्यों में तबाही मचा रखी है। यमुना के पानी ने राजधानी दिल्ली ही नहीं, बल्कि तटीय क्षेत्रों में भी कहर बरपाना शुरू कर दिया है। यमुना का पानी धीरे-धीरे दिल्ली से बाहर की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। दो दिनों में सादाबाद तहसील के गांव मिढ़ावली में भी यमुना का जल स्तर बढ़ने से किसानों के पसीने छूट गए हैं।
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इस गांव में अब तक करीब ढाई सौ बीघा फसल पानी की चपेट में आ चुकी है। हालांकि अभी फसलों को भी ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है। एक किसान की 15 बीघा बाजरा की फसल यमुना का पानी भरने से चौपट हो गई है। अगर आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ा तो यमुना का पानी गांव में भी दस्तक दे सकता है। इसे लेकर किसान और ग्रामीण चिंताग्रस्त हैं। ग्रामीण और किसान टकटकी लगाकर यमुना की ओर देख रहे हैं।
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यमुना का जल प्रवाह इतना तेज है कि उसे रोका नहीं जा सकता, इसलिए किसानों को फसल की बर्बादी का डर सता रहा है। यमुना के तटीय इलाकों में गेहूं, बाजरा, मूंग और धान आदि की फसल खड़ी है। शुक्रवार को क्षेत्रीय लेखपाल पंकेश कौशिक ने मौके पर पहुंचकर जल प्रभावित क्षेत्र का मुआयना किया। उनका कहना है कि यमुना के पानी से अभी किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है। प्रशासन यमुना के बढ़ते जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन का दावा है कि किसानों की हरसंभव मदद की जाएगी।

गांव के बुजुर्ग पंडित विद्याराम ने बताया कि वर्ष 1978 में बारिश के दौरान यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया था। उस समय गांव में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। फसलों को भारी नुकसान हुआ था। करीब 45 साल बाद एक बार फिर यमुना ने इस गांव के लिए खतरे की घंटी बजाई है। यमुना का जल तेजी से गांव की ओर बढ़ रहा है। कई एकड़ फसल में यमुना का पानी पहुंच चुका है। अगर आने वाले दिनों में दिल्ली में और बारिश हुई तो गांव के किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

मौसम की मार अक्सर किसानों पर पड़ती है। अब यमुना का जलस्तर बढ़ने से फसलों के लिए खतरा पैदा हो गया है। धीरे-धीरे पानी बढ़ रहा है। -हरी सिंह, किसान
यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। लगातार फसल पानी की चपेट में आ रही है। किसान खेतों का हाल देख परेशान हैं। अगर पानी का प्रवाह नहीं रुका तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। -विद्याराम, किसान
कई बार भारी बारिश हुई है, लेकिन इस तरह यमुना का पानी फसलों के लिए खतरा नहीं बना था। इस बार तो किसानों की यमुना का पानी देख किसानों की हालत खराब है। -लालाराम, किसान


कई एकड़ फसल यमुना के पानी की चपेट में आ गई है। बारिश का मौसम है। आने वाले दिनों में पानी का प्रवाह तेज हुआ तो किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। -हरीश कुमार, किसान
क्षेत्रीय लेखपाल और नायब तहसीलदार को भेजा गया है। वह अपनी रिपोर्ट देंगे। जिन किसानों का नुकसान होगा, उन्हें दैवी आपदा मद से राहत मिलेगी। तहसील की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। -संजय कुमार, एसडीएम सादाबाद

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