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Hathras News: एडीएम ने पूरी की ईसीसीई एजुकेटर भर्ती की जांच
Sat, 26 Sep 2026 02:15 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 26 Sep 2026 02:15 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
बेसिक शिक्षा विभाग में ईसीसीई एजुकेटर की भर्ती में अनियमितताओं के मामले में जांच पूरी न होने के कारण भर्ती प्रकिया अटकी हुई है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने अपनी जांच पूरी करते हुए पत्रावली को प्रभारी परियोजना निदेशक के पास भेज दिया।
एडीएम की जांच में समन्वयकों व सेवा प्रदाता एजेंसी को प्रथमदृष्टया दोषी माना गया है। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे पूर्व में हुई भर्ती प्रकिया की फाइलें भी खंगाली जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन एजुकेटर (ईसीसीई) के 80 पदों पर भर्ती के लिए करीब एक हजार बेरोजगार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
विभाग ने रेंडमाइजेशन के जरिये 240 आवेदकों को साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन के लिए शॉर्टलिस्ट किया था। रेंडमाइजेशन सूची से छह पात्र अभ्यर्थियों के नाम हटाकर उनकी जगह बाहरी लोगों के नाम शामिल कर दिए गए थे। विभागीय जांच में सेवा प्रदाता फर्म के साथ-साथ जिला समन्वयक ट्रेनिंग वरुण प्रताप और जिला समन्वयक एमआईएस बलवंत मौर्य की भूमिका भी संदिग्ध मिली थी।
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इस मामले की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रशांत तिवारी कर रहे हैं। जांच में बयानों और साक्ष्यों के आधार पर सामने आया है कि दोनों समन्वयक और सेवा प्रदाता एजेंसी भी इस मामले में दोषी है। अब यह पत्रावली सीडीओ कार्यालय पहुंच गई है। इसमें मिले साक्ष्य के साथ पूर्व में हुई भर्ती की जानकारी जुटाई जा सकती है। सीडीओ पीएन दीक्षित ने बताया कि पत्रावली आई है। इस पत्रावली का अवलोकन कर रिपोर्ट लगाकर जल्द अग्रेसित की जाएगी।
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एडीएम की जांच में समन्वयकों व सेवा प्रदाता एजेंसी को प्रथमदृष्टया दोषी माना गया है। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे पूर्व में हुई भर्ती प्रकिया की फाइलें भी खंगाली जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन एजुकेटर (ईसीसीई) के 80 पदों पर भर्ती के लिए करीब एक हजार बेरोजगार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
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विभाग ने रेंडमाइजेशन के जरिये 240 आवेदकों को साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन के लिए शॉर्टलिस्ट किया था। रेंडमाइजेशन सूची से छह पात्र अभ्यर्थियों के नाम हटाकर उनकी जगह बाहरी लोगों के नाम शामिल कर दिए गए थे। विभागीय जांच में सेवा प्रदाता फर्म के साथ-साथ जिला समन्वयक ट्रेनिंग वरुण प्रताप और जिला समन्वयक एमआईएस बलवंत मौर्य की भूमिका भी संदिग्ध मिली थी।
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इस मामले की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रशांत तिवारी कर रहे हैं। जांच में बयानों और साक्ष्यों के आधार पर सामने आया है कि दोनों समन्वयक और सेवा प्रदाता एजेंसी भी इस मामले में दोषी है। अब यह पत्रावली सीडीओ कार्यालय पहुंच गई है। इसमें मिले साक्ष्य के साथ पूर्व में हुई भर्ती की जानकारी जुटाई जा सकती है। सीडीओ पीएन दीक्षित ने बताया कि पत्रावली आई है। इस पत्रावली का अवलोकन कर रिपोर्ट लगाकर जल्द अग्रेसित की जाएगी।