हाथरस दाऊजी मेला: दंगल में हुआ जमकर हंगामा, अखाड़ा छोड़ भागे संयोजक, फेंकीं कुर्सियां, यह रही वजह
दाऊजी मेला में इस साल का दंगल में पहले दिन से ही अव्यवस्थाएं हावी रही। दंगल कमेटी की ओर से हर रोज प्रदेश के एक मंत्री, हेमा मालिनी व सनी देओल जैसे नामचीन लोगों को दंगल में लाने के की घोषणा की गई थी, लेकिन यह पूरी नहीं हुई। अंतिम दिन कमेटी ने दाऊजी मेला की बड़ी किरकिरी करा दी।
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हाथरस के मेला श्री दाऊजी महाराज के मुख्य आकर्षण अखिल भारतीय कुश्ती बुर्ज दंगल के अंतिम दिन कुश्तियां कराने के बाद इनाम का पैसा नहीं दिए जाने पर हंगामा हो गया। कुर्सियां फेंकी जाने लगी। दंगल के संयोजक अखाड़े भाग निकले। इससे स्थिति और अधिक खराब हो गई। आखरी तीन बड़ी कुश्तियां होने की बात तो दूर दंगल के समापन तक की घोषणा नहीं हो सकी। बिना संयोजक के ही हनुमान प्रतिमा को आयोजन स्थल से हटा दिया गया।
दाऊजी मेला में इस साल का दंगल में पहले दिन से ही अव्यवस्थाएं हावी रही। दंगल कमेटी की ओर से हर रोज प्रदेश के एक मंत्री, हेमा मालिनी व सनी देओल जैसे नामचीन लोगों को दंगल में लाने के की घोषणा की गई थी, लेकिन यह पूरी नहीं हुई। अंतिम दिन कमेटी ने दाऊजी मेला की बड़ी किरकिरी करा दी। सोमवार रात लगभग 12:30 बजे तक कराई गई कई छोटी कुश्तियों का पैसा पहलवानों को नहीं मिला। इस पर पहलवानों ने हंगामा कर दिया।
मौके पर दंगल संयोजक मुनीश कुमार के गायब होने से हंगामा और बढ़ गया। मेला पंडाल में कुर्सियां फेंकनी शुरू हो गया। अखाड़े पर दंगल कमेटी के कुछ एक लोगों के अलावा कोई नजर नहीं आया। आखरी दिन की कुश्तियां देखने पहुंचे तमाम दंगल प्रेमियों को भी निराशा का सामना करना पड़ा। बेहद दिलचस्प रहने वाली दंगल के अंतिम दिन की अंतिम तीन कुश्तियों का भी आयोजन भी नहीं हुआ। दंगल का समापन तक नहीं किया जा सका।
दंगल का नहीं हो पाया विधिवत समापन
दाऊजी मेला के इतिहास में पहली बार दंगल आयोजन का विधिवत सामापन नहीं हो पाया। हर बार पूजा अर्चना के उपरांत दंगल का समापन होता है। यहां स्थापित की गई हनुमान की प्रतिमा को विधिवत् तरीके से अपनी मूल जगह पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद समारोह के समापन पर विधि विधान के अनुरूप वापस ले जाया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
बोले संयोजक, प्रशासन से नहीं मिला पैसा
दंगल के संयोजक मुनेश पाल बघेल ने बताया कि चार दिन दाऊबाबा की कृपा से दंगल ऐतिहासिक रहा। सोमवार की रात को साढ़े बारह बजे तक दंगल चला। आखिरी बड़ी कुश्ती होनी थी,लेकिन एक साजिश के तहत स्थानीय तीस पहलवानों को बुलाकर हंगामा करा दिया। प्रशासन से दंगल का पैसा नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि स्थानीय पहलवान दोबारा से कुश्ती कराने की मांग कर रहे थे। कई ऐसे पहलवानों ने पैसा ले लिया, जिन्होंने कुश्ती ही नहीं लड़ी। कुछ पहलवानों को चेक के माध्यम से भुगतान किया गया है। ढोल बजाने वाले के साथ मारपीट कर उससे जबरन यह कहवालाया गया है कि उसे पैसा नहीं मिला है। इसके सारे साक्ष्य मेरे पास मौजूद है। मुझे प्रशासन की तरफ से एक भी पैसा नहीं मिला है। पूर्व में दंगल शुरु होने से पहले ही चेक मिलता था। मैंने खुद डीएम से जाकर मांग की कि दंगल का चेक दे दिया जाये। अपने पास से पूरा पैसा खर्च किया है। मेरी छवि को धूमिल करने के लिए ऐसा नाटक किया गया है।
एडीएम साहब की तबियत खराब होने के कारण चेक मिलने में देरी हो गई है। जल्द ही दंगल संयोजक को चेक दे दिया जाएगा। -रवेन्द्र कुमार, एसडीएम सदर, हाथरस।