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फाइलों की कैद से कब आजाद होगा औद्योगिक क्षेत्र

Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
Hathras
Hathras Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। जिले में उद्योगों के विकास पर जमीन की कमी हावी हो गई है। शहर के उद्यमी सालों से अपने उद्योगों के विस्तार और नई औद्योगिक यूनिटें लगाने के लिए जमीन की कमी से जूझ रहे हैं। चार साल पहले उद्यमियों की इसी जरूरत को देखते हुए सासनी के गांव सठिया के निकट नए औद्योगिक क्षेत्र का प्रस्ताव तैयार हुआ, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता से यह प्रस्ताव आज तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। अगर उसी समय यह औद्योगिक क्षेत्र बस गया होता तो निश्चित रूप से इलाके में उद्योगों की तादाद बढ़ गई होती। उद्योग बढ़े तो जाहिर है कि यहां बेरोजगारों के लिए रोजगार के रास्ते भी खुले होते, लेकिन इसे जिला प्रशासन की नाकामी कहें या फिर सियासी पैरवी की कमी। शासन ने इस अहम प्रोजेक्ट को किसानों के विरोध का हवाला देते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया और उद्यमियों को यह दिलासा दिया कि यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से उन्हें उद्योग लगाने का मौका मिलेगा। यह वह समय था, जिस यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण के लिए भू अधिग्रहण के खिलाफ हर तरफ आंदोलन चल रहा था और इसी वजह से शासन ने उस समय इस इलाके में छोटे-मोटे भू अधिग्रहण के प्रोजेक्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिया था, लेकिन यह प्राधिकरण का प्रस्ताव दो साल पहले ही ठंडे बस्ते में जा चुका है। बावजूद इसके न तो प्रशासन और न ही राजनेताओं के स्तर से नए औद्योगिक क्षेत्र के प्रस्ताव को आगे बढ़वाने के प्रयास किए गए हैं। उद्यमियों की पहल पर प्रशासन ने जो प्रस्ताव बनाया था, उसमें हाथरस से लेकर सठिया तक नया औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित किया गया था। तत्कालीन डीएम की दिलचस्पी से इस औद्योगिक क्षेत्र को उद्योग विभाग के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बिजली महकमे ने भी क्लीन चिट दे दी यानि इन विभागों को भी यहां लगने वाले उद्योगों को एनओसी देेने में कोई ऐतराज नहीं था। इसी आधार पर जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगा दी थी। जानकारों की मानें तो प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए ऐसी जमीन चुनी गई थी, जोकि ऊसर-बंजर है। इसे लेकर किसानों का ज्यादा विरोध भी नहीं था, लेकिन यमुना एक्सप्रेस वे के विरोध की आंधी में यह प्रस्ताव भी दब गया।
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