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पीएस गृह समेत चार पुलिस अफसर तलब

Tue, 01 Apr 2014 05:30 AM IST
Hathras
Hathras Updated Tue, 01 Apr 2014 05:30 AM IST
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हाथरस। 31 साल पुराने एक पुराने एक बहुचर्चित एनकाउंटर में अब हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, हाथरस जिले के पुलिस अधीक्षक और चंदपा थानाध्यक्ष को तलब कर उनसे इस मामले में व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए हैं। 31 साल पुराने इस मामले में दर्जन भर पुलिसकर्मी फरार चल रहे हैं और उनके वारंट होने के साथ-साथ कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक वह हाजिर नहीं हुए हैं। अब यह बहुचर्चित मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। 31 साल पुराने एनकाउंटर की कहानी एटा से शुरू हुई थी। 15 जनवरी 1983 को एटा कचहरी से कुछ पुलिस कर्मियों ने एक वकील मनवीर सिंह के बिस्तर से दिन दहाड़े एक ग्रामीण हीरालाल पुत्र बलवंत निवासी महमूदपुर सिकंदराराऊ को पकड़ लिया था। वहां कचहरी परिसर में वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया था। पुलिस ने इसे कई दिन तक सिकंदराराऊ थाने में हिरासत में रखा और फिर चंदपा थाने में। उसके बाद 5 फरवरी 1983 को उसे चंदपा के गांव नगला ओझा के निकट मुठभेड़ में मार गिराना दर्शाया। पुलिस की इस कथित मुठभेड़ पर सवाल उठे। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता रायवीर सिंह एडवोकेट ने इस मामले की शिकायत उच्च स्तर तक की। उनकी तहरीर पर 10 जनवरी 1987 को चंदपा के तत्कालीन एसओ आरके त्यागी सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा कायम हुआ। उसके बाद जांच सीबीसीआईडी ने शुरू की। सीबीसीआईडी ने यह पाया कि हीरालाल को एटा कोर्ट परिसर से उठाया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। यही नहीं जांच में कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए। इस पूरे मामले में सीबीसीआईडी ने 1996 में 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट स्थानीय कोर्ट में दाखिल की। इनमें सात दरोगा अनिल कुमार शर्मा, केएम उपाध्याय, केवल सिंह, धर्म सिंह यादव, आरके त्यागी, हरिश्चंद्र विद्यार्थी, बीडी दुबे के अलावा बहादुर खां, रुपराम, हरीशचंद्र, राजवीर सिंह, रामवीर सिंह, श्याम सिंह, धनपाल सिंह और एसपी शर्मा पुलिसकर्मी शामिल थे। इस मामले में 18 साल से दर्जन भर पुलिसकर्मी फरार चल रहे हैं। उनके गैरजमानती वारंट भी जारी हो चुके हैं, लेकिन पुलिस ‘अपनों’ को ही नहीं पकड़ रही। वरिष्ठ अधिवक्ता रायवीर सिंह ने कई बार पुलिस उच्चाधिकारियों को भी पत्र लिखा। यहां से भी कोर्ट ने पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद उन्होंने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा है कि सभी कर्मचारी और अधिकारी प्रदेश सरकार के अधीन हैं, लेकिन अभी तक उनकी न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई। सालों से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता रायवीर सिंह के मुताबिक कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एसपी हाथरस और चंदपा थानाध्यक्ष को उपस्थित होकर व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट में इसकी पैरवी अधिवक्ता अनिल कुमार शुक्ला ने की। अब सुनवाई के लिए अगली तिथि 21 अप्रैल नियत की है।
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