{"_id":"7-11554","slug":"Hathras-11554-7","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओला पीड़ित किसानों के क्लेम में कंपनी का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओला पीड़ित किसानों के क्लेम में कंपनी का खेल
Hathras
Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाथरस। एक साल पहले ओलावृष्टि से तबाही झेलने वाले सादाबाद और सहपऊ के किसानों को आर्थिक मदद देने में बीमा कंपनी ने खेल कर दिया है। लंबी पैरवी के बाद तो बीमा कंपनी किसानों को उनकी फसलों के नुकसान का क्लेम देने को तैयार हुई, फिर भी आधे किसानों के क्लेम का पैसा बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों को भिजवाया गया है, जहां से यह किसानों के स्थानीय बैंक शाखाओं के खातों में भेजा जाएगा। आधे से ज्यादा किसानों की मदद का अभी तक कुछ अता-पता नहीं है। बीमा कंपनी की लापरवाही से उनकी मदद पचड़े में फंसती नजर आ रही है।
किसानों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन के अलावा इस मामले की पैरवी में खास भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक डॉ.अनिल चौधरी से भी की है। किसानों में मदद वितरण में हुए भेदभाव को लेकर काफी गुस्सा है। पूर्व विधायक ने अब बीमा कंपनी से बैंक वार किसानों के नाम से जारी की गई आर्थिक मदद का ब्यौरा मांगा है, ताकि किसानों में फैले भ्रम को दूर किया जा सके। दरअसल, पिछले साल ओलावृष्टि से सादाबाद और सहपऊ क्षेत्र में आलू, गेहूं व सरसों की फसल को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा था। कई गांवों में तो किसानों की 70 फीसदी तक फसल ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई थी, जिससे किसान खून के आंसू रोने को मजबूर हो गए थे।
हालांकि प्रशासन ने भी क्षतिग्रस्त फसल का सर्वे कराने के बाद किसानों को आर्थिक मदद वितरित कराई थी, लेकिन यह मदद ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर थी। चूंकि सभी किसानों की फसल का राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना से बीमा होता है और किसानों ने इस योजना के प्रीमियम भी भरे थे। लिहाजा इन किसानों को बीमा योजना से मदद दिलाने के लिए पूर्व विधायक ने बीमा कंपनी के यहां दावा किया। पहले कंपनी ने आनाकानी की, लेकिन जब मामला प्रशासन और शासन के सामने दमदारी से उठा तो बीमा कंपनी पर किसानों के क्लेम का भुगतान करने को दबाव बढ़ गया। बीमा कंपनी ने किसानों की क्षतिग्रस्त फसल का सर्वे तो पिछले साल ही पूरा करा लिया, लेकिन मदद की धनराशि अब आकर जारी की गई है।इस बारे में जो मेल पूर्व विधायक को भेजा गया है, उसमें आधे किसानों को ही बीमा क्लेम मिलने का ब्यौरा है। आधे किसानों का ब्यौरा ही उस ई-मेल से गायब है। ज्यादातर सहपऊ ब्लॉक के किसान क्लेम से वंचित रह गए हैं। जिन गांवों के सर्वाधिक किसान प्रभावित हुए हैं, वहां के किसान भी किसान का पैसा कंपनी ने नहीं दिया है। जिन न्याय पंचायतों में पैसा नहीं पहुंचा है, उनमें आरती, गुतहरा, बुढाइच, मढ़ापिथू, उघैना व सलेमपुर न्याय पंचायतें शामिल हैं। एक साल के इंतजार के बाद भी क्लेम से वंचित किए जाने से किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन के अलावा इस मामले की पैरवी में खास भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक डॉ.अनिल चौधरी से भी की है। किसानों में मदद वितरण में हुए भेदभाव को लेकर काफी गुस्सा है। पूर्व विधायक ने अब बीमा कंपनी से बैंक वार किसानों के नाम से जारी की गई आर्थिक मदद का ब्यौरा मांगा है, ताकि किसानों में फैले भ्रम को दूर किया जा सके। दरअसल, पिछले साल ओलावृष्टि से सादाबाद और सहपऊ क्षेत्र में आलू, गेहूं व सरसों की फसल को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा था। कई गांवों में तो किसानों की 70 फीसदी तक फसल ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई थी, जिससे किसान खून के आंसू रोने को मजबूर हो गए थे।
विज्ञापन
हालांकि प्रशासन ने भी क्षतिग्रस्त फसल का सर्वे कराने के बाद किसानों को आर्थिक मदद वितरित कराई थी, लेकिन यह मदद ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर थी। चूंकि सभी किसानों की फसल का राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना से बीमा होता है और किसानों ने इस योजना के प्रीमियम भी भरे थे। लिहाजा इन किसानों को बीमा योजना से मदद दिलाने के लिए पूर्व विधायक ने बीमा कंपनी के यहां दावा किया। पहले कंपनी ने आनाकानी की, लेकिन जब मामला प्रशासन और शासन के सामने दमदारी से उठा तो बीमा कंपनी पर किसानों के क्लेम का भुगतान करने को दबाव बढ़ गया। बीमा कंपनी ने किसानों की क्षतिग्रस्त फसल का सर्वे तो पिछले साल ही पूरा करा लिया, लेकिन मदद की धनराशि अब आकर जारी की गई है।इस बारे में जो मेल पूर्व विधायक को भेजा गया है, उसमें आधे किसानों को ही बीमा क्लेम मिलने का ब्यौरा है। आधे किसानों का ब्यौरा ही उस ई-मेल से गायब है। ज्यादातर सहपऊ ब्लॉक के किसान क्लेम से वंचित रह गए हैं। जिन गांवों के सर्वाधिक किसान प्रभावित हुए हैं, वहां के किसान भी किसान का पैसा कंपनी ने नहीं दिया है। जिन न्याय पंचायतों में पैसा नहीं पहुंचा है, उनमें आरती, गुतहरा, बुढाइच, मढ़ापिथू, उघैना व सलेमपुर न्याय पंचायतें शामिल हैं। एक साल के इंतजार के बाद भी क्लेम से वंचित किए जाने से किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन