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32 साल बाद मिलेगा 9 करोड़ मुआवजा
Hathras
Updated Fri, 25 Jan 2013 05:30 AM IST
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हाथरस। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को अब रतन सिंह के वारिसों को 9 करोड़ की धनराशि जमीन के मुआवजे के रूप में देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब स्थानीय न्यायालय ने भी परिषद को यही आदेश दिया है। न्यायालय ने परिषद को आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए धनराशि का तत्काल भुगतान करे। इस मामले में अगली सुनवाई 30 जनवरी को होगी।
शहर में जब आवास विकास कॉलोनी बनी तो इसके लिए 1980 में अय्यापुर, गिजरौली के किसानों व भू स्वामियों की करीब 146 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई। अधिग्रहित अधिकारी ने सितंबर 1986 में इस जमीन का मूल्य तय किया। इसके हिसाब से 9.68 रुपए प्रति स्कवायर यार्ड देना मंजूर किया गया। साथ की 30 फीसदी हर्जाना और 12 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देना भी निश्चित हुआ। यह वहां के कुछ भू स्वामियों को मंजूर नहीं था। इन लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इनमें अय्यापुर के रतन सिंह भी शामिल थे। उनकी भी करीब 22 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई। कोर्ट जाने वालों में रतन सिंह भी शामिल थे। कई साल तक कोर्ट में पैरवी हुई। अपर जिला न्यायालय अलीगढ़ ने 1991 में किसानोें के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि किसानों को 100 रुपये प्रति स्कवायर यार्ड के हिसाब से जमीन का भुगतान करे। मामला यहीं नहीं रुका। आवास विकास परिषद ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वहां कई साल तक मामले में सुनवाई हुई।
वहां वर्ष 2010 में हाईकोर्ट ने परिषद की अपील को खारिज कर दिया और सभी बकाया देयों का भुगतान करने के आदेश दिए। इसके बाद आवास एवं विकास परिषद सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां सितंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में परिषद की अपील को खारिज कर दिया और फटकार लगाई। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तीन माह के अंदर मुआवजा व अन्य देय दिए जाएं। हालांकि अभी किसानों व अन्य लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला। इतना ही नहीं एक किसान रतन सिंह की तो एक सप्ताह पहले मौत भी हो गई। इस मामले को लेकर रतन सिंह के परिजनों ने यहां अपर जिला जज तृतीय के न्यायालय में याचिका दायर की। इसकी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अमर सिंह चंदेल ने की। न्यायालय ने परिषद को यह आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर तत्काल भुगतान करें। रतन सिंह के परिजनों को 9 करोड़ 34 लाख रुपये परिषद को देनी होगी। यह धनराशि 18,714 वर्ग गज के हिसाब से मिलेगी।
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शहर में जब आवास विकास कॉलोनी बनी तो इसके लिए 1980 में अय्यापुर, गिजरौली के किसानों व भू स्वामियों की करीब 146 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई। अधिग्रहित अधिकारी ने सितंबर 1986 में इस जमीन का मूल्य तय किया। इसके हिसाब से 9.68 रुपए प्रति स्कवायर यार्ड देना मंजूर किया गया। साथ की 30 फीसदी हर्जाना और 12 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देना भी निश्चित हुआ। यह वहां के कुछ भू स्वामियों को मंजूर नहीं था। इन लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इनमें अय्यापुर के रतन सिंह भी शामिल थे। उनकी भी करीब 22 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई। कोर्ट जाने वालों में रतन सिंह भी शामिल थे। कई साल तक कोर्ट में पैरवी हुई। अपर जिला न्यायालय अलीगढ़ ने 1991 में किसानोें के पक्ष में फैसला सुनाया और आदेश दिया कि किसानों को 100 रुपये प्रति स्कवायर यार्ड के हिसाब से जमीन का भुगतान करे। मामला यहीं नहीं रुका। आवास विकास परिषद ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वहां कई साल तक मामले में सुनवाई हुई।
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वहां वर्ष 2010 में हाईकोर्ट ने परिषद की अपील को खारिज कर दिया और सभी बकाया देयों का भुगतान करने के आदेश दिए। इसके बाद आवास एवं विकास परिषद सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां सितंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में परिषद की अपील को खारिज कर दिया और फटकार लगाई। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तीन माह के अंदर मुआवजा व अन्य देय दिए जाएं। हालांकि अभी किसानों व अन्य लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला। इतना ही नहीं एक किसान रतन सिंह की तो एक सप्ताह पहले मौत भी हो गई। इस मामले को लेकर रतन सिंह के परिजनों ने यहां अपर जिला जज तृतीय के न्यायालय में याचिका दायर की। इसकी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता अमर सिंह चंदेल ने की। न्यायालय ने परिषद को यह आदेश दिया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर तत्काल भुगतान करें। रतन सिंह के परिजनों को 9 करोड़ 34 लाख रुपये परिषद को देनी होगी। यह धनराशि 18,714 वर्ग गज के हिसाब से मिलेगी।
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