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सेहतमंद संतान की चाहत, लेकिन मां की सेहत की नहीं है कोई फिक्र
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
बहू से सेहतमंद संतान की चाहत सभी को होती है, लेकिन उसकी सेहत की चिंता परिवारवालों को थोड़ी भी नहीं है। सादाबाद सीएचसी के एफआरयू सेंटर पर आने वाली 18-20 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिनमें कुपोषण के कारण गर्भधारण की क्षमता प्रभावित होती है।
गौरतलब हो कि सरकार जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए तमाम अभियान चला रही है। इसके बावजूद लोग इससे जागरूक नहीं हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने नौ तारीख को एफआरयू सेंटर पर 100-110 गर्भवती महिलाओं की जांच हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा 30-40 गर्भवती महिलाओं में हाईरिस्क प्रेगनेंसी, चार से पांच महिलाओं में उक्त रक्तचाप, और एक से दो महिलाएं मधुमेह रोग की मरीज रहती हैं।
10-15 फीसदी तक गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार होती हैं। इनकी चिकित्सीय पड़ताल में बार-बार गर्भपात होना, बीमार पड़ जाना जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे इनमें गर्भधारण और प्रसव में समस्या आती है। बार-बार गर्भपात हो जानेे, समय पूर्व प्रसव होनेे, शिशु में रक्त की कमी होने, शिशु का वजन कम होने, प्रसव के वक्त संक्रमण होने आदि तरह की समस्याएं आती हैं।
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- परिजनों को चाहिए जैसे कि वह अपनी बहू के होने वाले बच्चे की सेहत को लेकर जागरूक रहते हैं, उसी तरह अपनी गर्भवती बहू के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर आकर समय-समय पर चेकअप करवाते रहे। गर्भाधारण के दौरान जो समस्याएं गर्भवती महिलाओं में सामने आ रही हैं, उन समस्याओं और बीमारियों को खत्म करने पर सरकार और स्वास्थ्य महकमे का पूरा जोर है। लोगों को भी जच्चा-बच्चा के स्वास्थ के प्रति जागरूक होना चाहिए। - डॉ. दानवीर सिंह, सीएचसी प्रभारी, सादाबाद।
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बहू से सेहतमंद संतान की चाहत सभी को होती है, लेकिन उसकी सेहत की चिंता परिवारवालों को थोड़ी भी नहीं है। सादाबाद सीएचसी के एफआरयू सेंटर पर आने वाली 18-20 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जिनमें कुपोषण के कारण गर्भधारण की क्षमता प्रभावित होती है।
गौरतलब हो कि सरकार जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए तमाम अभियान चला रही है। इसके बावजूद लोग इससे जागरूक नहीं हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने नौ तारीख को एफआरयू सेंटर पर 100-110 गर्भवती महिलाओं की जांच हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा 30-40 गर्भवती महिलाओं में हाईरिस्क प्रेगनेंसी, चार से पांच महिलाओं में उक्त रक्तचाप, और एक से दो महिलाएं मधुमेह रोग की मरीज रहती हैं।
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10-15 फीसदी तक गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार होती हैं। इनकी चिकित्सीय पड़ताल में बार-बार गर्भपात होना, बीमार पड़ जाना जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे इनमें गर्भधारण और प्रसव में समस्या आती है। बार-बार गर्भपात हो जानेे, समय पूर्व प्रसव होनेे, शिशु में रक्त की कमी होने, शिशु का वजन कम होने, प्रसव के वक्त संक्रमण होने आदि तरह की समस्याएं आती हैं।
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- परिजनों को चाहिए जैसे कि वह अपनी बहू के होने वाले बच्चे की सेहत को लेकर जागरूक रहते हैं, उसी तरह अपनी गर्भवती बहू के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर आकर समय-समय पर चेकअप करवाते रहे। गर्भाधारण के दौरान जो समस्याएं गर्भवती महिलाओं में सामने आ रही हैं, उन समस्याओं और बीमारियों को खत्म करने पर सरकार और स्वास्थ्य महकमे का पूरा जोर है। लोगों को भी जच्चा-बच्चा के स्वास्थ के प्रति जागरूक होना चाहिए। - डॉ. दानवीर सिंह, सीएचसी प्रभारी, सादाबाद।