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Hathras News: 30 वर्षीय कंटेनर चालक की हार्ट अटैक से मौत
Sat, 01 Aug 2026 02:36 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 01 Aug 2026 02:36 AM IST
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खेमपाल का फाइल फोटो।
- फोटो : File Photo
रुद्रपुर से दोपहिया वाहन लादकर चले कंटेनर चालक की आगरा-अलीगढ़ रोड बाईपास पर हार्ट अटैक से मौत हो गई। चालक देर रात खाना खाने के लिए ढाबे पर रुका था। अचानक तबियत बिगड़ने पर पुलिस जिला अस्पताल लेकर आई लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
गांव पदमी, सीसगढ़, बरेली निवासी खेमपाल (30) कंटेनर चालक थे। वह दोपहिया कंपनी के लिए काम करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनी में कार्यरत थे। पिता इंद्रपाल ने बताया कि खेमपाल मंगलवार दोपहर 12 बजे रुद्रपुर के लिए निकला था। बुधवार को गाड़ी लोड होने के बाद वह वाहनों को लेकर आगरा जा रहा था। बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे वह हतीसा बाईपास स्थित ढाबे पर खाना खाने के लिए रुका। कंटेनर में वह अकेला ही था। हाथ-मुंह धोकर उसने खाना ऑर्डर किया। इसी दौरान खेमपाल को अचानक घबराहट होने लगी। वह बेचैनी में खाट पर लेट गया। इस बीच खाना भी आ गया। जैसे ही वह खाना खाने के लिए उठा उसके सीने में तेज दर्द उठने लगा।
इंद्रपाल के अनुसार खेमपाल ने ढाबा संचालक को जानकारी दी तो उसने बताया कि नजदीक में अस्पताल है। खेमपाल पैदल ही अस्पताल के लिए ढाबे से निकल गया। ढाबे से थोड़ा आगे जाते ही वह सड़क पर गिर गया। ढाबे पर मौजूद लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस खेमपाल को जिला अस्पताल लेकर पहुंची लेकिन इमरजेंसी के गेट पर ही उसने दम तोड़ दिया। गाड़ी से मिले कागजों के आधार पर उसकी शिनाख्त हुई।
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युवक की तबियत खराब होने की सूचना मिली थी। पुलिस युवक को ढाबे से लेकर जिला अस्पताल लाई लेकिन उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन के सुपुर्द किया गया है।
हिमांशु माथुर, सीओ सिटी
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चिकित्सक की बात
ट्रक चालकों को 10 से 15 घंटे लगातार ड्राइविंग सीट पर बैठना पड़ता है। इससे शरीर में रक्त संचार धीमा होता है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है। धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल और वसा जमने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लंबे समय तक नींद की कमी से हॉर्मोनल असंतुलन और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। रक्त वाहिकाओं की मरम्मत रुकने से दिल पर अचानक भारी दबाव पड़ता है। हाईवे पर यात्रा के दौरान चालक तला-भुना और मसालेदार खाना खाने को मजबूर होते हैं। रिफाइंड ऑयल और फैटयुक्त भोजन भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है। इससे शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है और खून गाढ़ा होने लगता है। यह स्थिति कार्डियक अरेस्ट का एक बड़ा ट्रिगर बन जाती है।
डाॅ. अवधेश कुमार, फिजीशियन, बागला जिला संयुक्त चिकित्सालय
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गर्भवती पत्नी कर रही थी इंतजार, पहुंची मौत की खबर
- संतान का मुंह देखने से पहले ही दुनिया से चला गया खेमपाल
संवाद न्यूज एजेंसी
हाथरस। हाथरस में घटी एक घटना ने बरेली के परिवार को झकझोर कर रख दिया है। घर में नए मेहमान के आने की तैयारियां चल रही थीं। अचानक आई एक मनहूस खबर ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। आठ माह की गर्भवती पत्नी दरवाजे पर टकटकी लगाए पति खेमपाल के घर लौटने का इंतजार कर रही थी, पल भर में उसका साथ छूट गया।
खेमपाल ने बृहस्पतिवार रात पत्नी से फोन पर बात की थी। हंसी-खुशी हुई उस बातचीत में खेमपाल ने कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं और देर रात तक आगरा पहुंच जाएंगे। पत्नी ने भी राहत की सांस ली थी कि जल्द ही पति घर लौटेंगे। किसे पता था कि यह उन दोनों की आखिरी बातचीत साबित होगी। देर रात जब खेमपाल की हार्ट अटैक से मौत की खबर आई तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। पहली संतान का मुंह देखना भी खेमपाल को नसीब नहीं हुआ।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे बदहवास पिता इंद्रपाल का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने बताया कि पिछले साल 30 नवंबर को ही खेमपाल की शादी हुई थी। शादी के कुछ ही महीनों बाद घर में नन्हे चिराग के आने की आस जगी थी लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
दूसरे बेटे को खोने से इंद्रपाल बदहवास
इंद्रपाल के चार बेटों में से खेमपाल तीसरे नंबर के थे। चार साल पहले भी बीमारी के चलते उनके बड़े बेटे हरीश की मृत्यु हो चुकी है। हरीश अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए थे। अभी परिवार इस सदमे से परिवार पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि अब खेमपाल भी अपनी आठ माह की गर्भवती पत्नी और बुजुर्ग मां-बाप को बेसहारा छोड़कर दुनिया से चले गए। चार साल के भीतर दो जवान बेटों को खो चुके पिता के पास सिवाय दुखों के कुछ नहीं बचा है। दोपहर में ही पोस्टमार्टम के बाद परिजन खेमपाल के शव को लेकर बरेली रवाना हो गए।
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गांव पदमी, सीसगढ़, बरेली निवासी खेमपाल (30) कंटेनर चालक थे। वह दोपहिया कंपनी के लिए काम करने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनी में कार्यरत थे। पिता इंद्रपाल ने बताया कि खेमपाल मंगलवार दोपहर 12 बजे रुद्रपुर के लिए निकला था। बुधवार को गाड़ी लोड होने के बाद वह वाहनों को लेकर आगरा जा रहा था। बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे वह हतीसा बाईपास स्थित ढाबे पर खाना खाने के लिए रुका। कंटेनर में वह अकेला ही था। हाथ-मुंह धोकर उसने खाना ऑर्डर किया। इसी दौरान खेमपाल को अचानक घबराहट होने लगी। वह बेचैनी में खाट पर लेट गया। इस बीच खाना भी आ गया। जैसे ही वह खाना खाने के लिए उठा उसके सीने में तेज दर्द उठने लगा।
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इंद्रपाल के अनुसार खेमपाल ने ढाबा संचालक को जानकारी दी तो उसने बताया कि नजदीक में अस्पताल है। खेमपाल पैदल ही अस्पताल के लिए ढाबे से निकल गया। ढाबे से थोड़ा आगे जाते ही वह सड़क पर गिर गया। ढाबे पर मौजूद लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस खेमपाल को जिला अस्पताल लेकर पहुंची लेकिन इमरजेंसी के गेट पर ही उसने दम तोड़ दिया। गाड़ी से मिले कागजों के आधार पर उसकी शिनाख्त हुई।
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युवक की तबियत खराब होने की सूचना मिली थी। पुलिस युवक को ढाबे से लेकर जिला अस्पताल लाई लेकिन उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन के सुपुर्द किया गया है।
हिमांशु माथुर, सीओ सिटी
चिकित्सक की बात
ट्रक चालकों को 10 से 15 घंटे लगातार ड्राइविंग सीट पर बैठना पड़ता है। इससे शरीर में रक्त संचार धीमा होता है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है। धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल और वसा जमने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लंबे समय तक नींद की कमी से हॉर्मोनल असंतुलन और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। रक्त वाहिकाओं की मरम्मत रुकने से दिल पर अचानक भारी दबाव पड़ता है। हाईवे पर यात्रा के दौरान चालक तला-भुना और मसालेदार खाना खाने को मजबूर होते हैं। रिफाइंड ऑयल और फैटयुक्त भोजन भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है। इससे शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है और खून गाढ़ा होने लगता है। यह स्थिति कार्डियक अरेस्ट का एक बड़ा ट्रिगर बन जाती है।
डाॅ. अवधेश कुमार, फिजीशियन, बागला जिला संयुक्त चिकित्सालय
गर्भवती पत्नी कर रही थी इंतजार, पहुंची मौत की खबर
- संतान का मुंह देखने से पहले ही दुनिया से चला गया खेमपाल
संवाद न्यूज एजेंसी
हाथरस। हाथरस में घटी एक घटना ने बरेली के परिवार को झकझोर कर रख दिया है। घर में नए मेहमान के आने की तैयारियां चल रही थीं। अचानक आई एक मनहूस खबर ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। आठ माह की गर्भवती पत्नी दरवाजे पर टकटकी लगाए पति खेमपाल के घर लौटने का इंतजार कर रही थी, पल भर में उसका साथ छूट गया।
खेमपाल ने बृहस्पतिवार रात पत्नी से फोन पर बात की थी। हंसी-खुशी हुई उस बातचीत में खेमपाल ने कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं और देर रात तक आगरा पहुंच जाएंगे। पत्नी ने भी राहत की सांस ली थी कि जल्द ही पति घर लौटेंगे। किसे पता था कि यह उन दोनों की आखिरी बातचीत साबित होगी। देर रात जब खेमपाल की हार्ट अटैक से मौत की खबर आई तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। पहली संतान का मुंह देखना भी खेमपाल को नसीब नहीं हुआ।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे बदहवास पिता इंद्रपाल का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्होंने बताया कि पिछले साल 30 नवंबर को ही खेमपाल की शादी हुई थी। शादी के कुछ ही महीनों बाद घर में नन्हे चिराग के आने की आस जगी थी लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
दूसरे बेटे को खोने से इंद्रपाल बदहवास
इंद्रपाल के चार बेटों में से खेमपाल तीसरे नंबर के थे। चार साल पहले भी बीमारी के चलते उनके बड़े बेटे हरीश की मृत्यु हो चुकी है। हरीश अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए थे। अभी परिवार इस सदमे से परिवार पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि अब खेमपाल भी अपनी आठ माह की गर्भवती पत्नी और बुजुर्ग मां-बाप को बेसहारा छोड़कर दुनिया से चले गए। चार साल के भीतर दो जवान बेटों को खो चुके पिता के पास सिवाय दुखों के कुछ नहीं बचा है। दोपहर में ही पोस्टमार्टम के बाद परिजन खेमपाल के शव को लेकर बरेली रवाना हो गए।