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ग्राम जारऊ में बंबे के किनारे मृत मिले 28 गिनीपिग
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Fri, 14 Apr 2017 11:22 PM IST
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28 guinea pigs have died on the banks of Bambay in village Jarau
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र के ग्राम जारऊ में खरगोश जैसे दिखने वाले 28 प्राणी मृत मिले। वहां काफी भीड़ लग गई। मौके पर इन मासूम जानवरों की संख्या करीब 40 थी, लेकिन इनमें से अधिकांश दम तोड़ चुके थे। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह जानवर खरगोश नहीं, बल्कि दक्षिणी अमेरिका में पाया जाने वाला विदेशी प्राणी गिनीपिग है।
दक्षिणी अमेरिका में इसे पाला जाता है। अब यह प्राणी यहां कहां से आया और किसने इसे गांव तक पहुंचाया है, इसका जवाब विभागीय अधिकारियों के पास भी नहीं है।
गांव जारऊ में बंबे की पटरी के निकट शुक्रवार की सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी वहां पर उन्हें यह गिनीपिग नाम के प्राणी दिखाई दिए। लोगों ने तो वेषभूषा से इन्हें खरगोश ही समझ लिया। वहां काफी संख्या में मृत गिनीपिग को देखकर भीड़ लग गई। इसकी जानकारी प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को भी दे दी गई। इसके बाद वनाधिकारी गौतम सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और देखा कि वहां पर करीब 28 गिनीपिग मृत अवस्था में पड़े हुए हैं, जबकि कुछ जीवित भी थे।
वनाधिकारी गौतम ने बताया कि यह प्राणी खरगोश नहीं, बल्कि गिनीपिग है और इन्हें खरगोश के नाम से ही लोग जानते हैं, क्योंकि यह प्राणी विदेशी है। इसे घरों में पाला जाता है। यह प्राणी वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत नहीं आता। लिहाजा इसकी सूचना पशु चिकित्सा विभाग को दे दी गई।
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पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दो गिनीपिग के शवों को पोस्टमार्टम के लिए कब्जे में ले लिया। शेष मृत गिनीपिग को जमीन में दफन करा दिया गया। 10-12 की संख्या में जीवित बचे गिनीपिग को लोग पालने के लिए ले गए। वनाधिकारी ने बताया कि मौके पर एक खाली बोरा भी पड़ा हुआ था। संभवत: कोई बाहर का व्यक्ति इन्हें यहां फेंक गया है।
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दक्षिणी अमेरिका में इसे पाला जाता है। अब यह प्राणी यहां कहां से आया और किसने इसे गांव तक पहुंचाया है, इसका जवाब विभागीय अधिकारियों के पास भी नहीं है।
गांव जारऊ में बंबे की पटरी के निकट शुक्रवार की सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की तरफ जा रहे थे, तभी वहां पर उन्हें यह गिनीपिग नाम के प्राणी दिखाई दिए। लोगों ने तो वेषभूषा से इन्हें खरगोश ही समझ लिया। वहां काफी संख्या में मृत गिनीपिग को देखकर भीड़ लग गई। इसकी जानकारी प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को भी दे दी गई। इसके बाद वनाधिकारी गौतम सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और देखा कि वहां पर करीब 28 गिनीपिग मृत अवस्था में पड़े हुए हैं, जबकि कुछ जीवित भी थे।
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वनाधिकारी गौतम ने बताया कि यह प्राणी खरगोश नहीं, बल्कि गिनीपिग है और इन्हें खरगोश के नाम से ही लोग जानते हैं, क्योंकि यह प्राणी विदेशी है। इसे घरों में पाला जाता है। यह प्राणी वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत नहीं आता। लिहाजा इसकी सूचना पशु चिकित्सा विभाग को दे दी गई।
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पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दो गिनीपिग के शवों को पोस्टमार्टम के लिए कब्जे में ले लिया। शेष मृत गिनीपिग को जमीन में दफन करा दिया गया। 10-12 की संख्या में जीवित बचे गिनीपिग को लोग पालने के लिए ले गए। वनाधिकारी ने बताया कि मौके पर एक खाली बोरा भी पड़ा हुआ था। संभवत: कोई बाहर का व्यक्ति इन्हें यहां फेंक गया है।