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रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान 24 घंटे लगा था हाथरस में कर्फ्यू

Tue, 04 Aug 2020 11:12 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 11:12 PM IST
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24 curfew in hathras during ram janm bhumi movement
राम मंदिर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए रमेश चन्द्र आर्य। (फाइल फोटो) - फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। आंदोलन के दौरान कई बार वे, उनकी पत्नी और बच्चे भी जेल भी गए। अब मंदिर निर्माण के लिए बुधवार को पूजन होगा। इसे लेकर वे काफी खुश हैं।
उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर पूरे उत्तर प्रदेश बंद करने साथ हाथरस भी बंद रहा था। उस दिन राम भक्तों ने नगर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। राम भक्तों की टोली डिब्बा गली में जब घूम रही थी। तब किसी कार्यकर्ता ने वहां बनी मस्जिद की गैलरी पर पड़ी बांस की टटिया में से एक दो बांस खपच्च खींच दी, जिससे उसमें से कुछ घास-फूस वहीं गिर गई। आर्य ने बताया कि वह उस समय बड़े जुलूस में थे। इस घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं था। उसी दिन लगभग चार बजे दो व्यक्तियों ने गली डिब्बा से एक जुलूस मधुगढ़ी के एक मौलाना के नेतृत्व में शहर के मुख्य मुख्य बाजारों से होता हुआ कोतवाली पहुंचा। इसका सारा आरोप उन पर मढ़ दिया। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए नारे लगाए, जबकि मस्जिद से कोई छेड़खानी नहीं हुई थी।
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जुलूस निकलते ही सारा शहर धड़ाधड़ बंद हो गया। पुलिस की गाड़ियां घूमने लगीं। दूसरे दिन शाम को वरिष्ठ नागरिकों की बैठक कोतवाली में हुई। माहौल को ठीक करने का प्रयास किया गया। डिब्बा गली मस्जिद प्रकरण में पुलिस ने दूसरे दिन सुबह मेंडू गेट चौराहा पर रात की ड्यूटी कर रंग फैक्टरी से वापस जा रहे मजदूरों को पकड़कर जेल भेज दिया। उन पर मस्जिद को क्षति पहुंचाने का आरोप लगा दिया गया। आर्य ने बताया कि उन्होंने दो दिन बाद सीजीएम कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी जमानत कराई। उनके समर्थन में नगर के 15 वरिष्ठ वकीलों ने कोर्ट में उपस्थित होकर उनका पक्ष रखा।
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आर्य के अनुसार हाथरस नगर और देहात से कार सेवा के लिए लगभग पांच हजार भक्तों ने अयोध्या जाकर स्वयं को गिरफ्तार कराया। 1990 में सारा हिंदू राममय हो गया था। आगरा सेंट्रल जेल में 25 महिलाओं का जत्था आंदोलन कर गिरफ्तारी देकर गया। जहां से 15 दिन बाद रिहा किया गया। इसके बाद हजारों राम भक्त अलीगढ़ जेल में तथा अस्थायी बनाई गई जेल में गिरफ्तार कर कर भेजे गए। आर्य ने बताया कि सभी रेलगाड़ी जो पूर्व की ओर जाती थी, उनमें से जो महात्मा मिला, चाहे वह उसे अयोध्या जाना था या नहीं, उसको रेल से उतार दिया जाता था।
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