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टीबी की जांच के लिए जिले में 16 जांच केंद्र
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Sat, 18 Nov 2017 11:54 PM IST
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टीबी
- फोटो : Amar Ujala
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल सागर के निर्देशन में आरएनटीसीपी के तहत डीएमसी लाढ़पुर के गांव विधीपुर में टीबी के लक्षण, जांच व उपचार आदि से संबंधित संपूर्ण जानकारी के लिए जन जागरूकता बैठक हुई। जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स कोआर्डिनेटर मनोज कुमार उपाध्याय द्वारा ग्रामीणों को टीबी बीमारी के विषय में बताते हुए कहा कि टीबी के 80 से 85 प्रतिशत रोगी फेफड़े की टीबी के होते हैं जोकि बीमारी फैलाने के मुख्य कारक हैं, लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लीवर, किडनी, गला, हड्डी, नाखून व सिर के बालों में भी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह खांसने और छींकने के दौरान मुंह से निकलने वाली बारीक बूंदों से इंफेक्शन फैलता है। टीबी का वैैक्टीरिया शरीर के जिस भाग में होता है, उसके टिशू को पूरी तरह नष्ट कर देता है। यूटरस में है तो बांझपन की वजह बनती है। हड्डी में है तो हड्डी को गला देती है। ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं। आंतों में है तो पेट में पानी भर सकता है।
यदि दो सप्ताह से खांसी और खांसी के साथ बलगम या खून आना, भूख नहीं लगना, शरीर का वजन घटना, शाम या रात के समय बुखार आ जाना, सीने में दर्द का होना किसी व्यक्ति में यह लक्षण हो तो उसे टीबी हो सकती है। आंत की टीबी के लक्षण में पेट में दर्द का होना, पेट में सूजन आना एवं आंत का फट जाना है। लाड़पुर क्षेत्र के सुपरवाइजर मोहम्मद अशफाक ने कहा कि मरीज टीबी की औषधियां छोड़-छोड़कर या कम मात्रा में खाएं तो दवा प्रतिरोधी टीबी हो सकती है। सीबी नॉट मशीन से जांच निशुल्क होती है।
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जिला पीपीएम को-ऑर्डिनेटर ने कहा कि जनपद में एमडी टीबी चिकित्सालय है लेकिन दूर दराज से आने वाले रोगियों के लिए 16 बलगम के जांच केंद्र बने हैं, जो सासनी, लाड़पुर, हाथरस जंक्शन, सादाबाद, मुरसान, सहपऊ, बिसावर, आरती, महौ, हसायन, सिकंदराराऊ, नगला वीरसहाय, पोरा, मऊ चिरायल महमूदपुर जिन पर बलगम की जांच की जाती है। इस अवसर पर ग्राम विधिपुर के सभी गणमान्य व्यक्ति जसवीर, ललित, देवेंद्र, रामवती सहित काफी ग्रामीण मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि यह खांसने और छींकने के दौरान मुंह से निकलने वाली बारीक बूंदों से इंफेक्शन फैलता है। टीबी का वैैक्टीरिया शरीर के जिस भाग में होता है, उसके टिशू को पूरी तरह नष्ट कर देता है। यूटरस में है तो बांझपन की वजह बनती है। हड्डी में है तो हड्डी को गला देती है। ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं। आंतों में है तो पेट में पानी भर सकता है।
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यदि दो सप्ताह से खांसी और खांसी के साथ बलगम या खून आना, भूख नहीं लगना, शरीर का वजन घटना, शाम या रात के समय बुखार आ जाना, सीने में दर्द का होना किसी व्यक्ति में यह लक्षण हो तो उसे टीबी हो सकती है। आंत की टीबी के लक्षण में पेट में दर्द का होना, पेट में सूजन आना एवं आंत का फट जाना है। लाड़पुर क्षेत्र के सुपरवाइजर मोहम्मद अशफाक ने कहा कि मरीज टीबी की औषधियां छोड़-छोड़कर या कम मात्रा में खाएं तो दवा प्रतिरोधी टीबी हो सकती है। सीबी नॉट मशीन से जांच निशुल्क होती है।
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जिला पीपीएम को-ऑर्डिनेटर ने कहा कि जनपद में एमडी टीबी चिकित्सालय है लेकिन दूर दराज से आने वाले रोगियों के लिए 16 बलगम के जांच केंद्र बने हैं, जो सासनी, लाड़पुर, हाथरस जंक्शन, सादाबाद, मुरसान, सहपऊ, बिसावर, आरती, महौ, हसायन, सिकंदराराऊ, नगला वीरसहाय, पोरा, मऊ चिरायल महमूदपुर जिन पर बलगम की जांच की जाती है। इस अवसर पर ग्राम विधिपुर के सभी गणमान्य व्यक्ति जसवीर, ललित, देवेंद्र, रामवती सहित काफी ग्रामीण मौजूद थे।