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जिपं अध्यक्ष के खिलाफ 15 सदस्यों ने सौंपे शपथपत्र
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Fri, 19 May 2017 11:42 PM IST
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Members who submitted affidavit
- फोटो : amar ujala
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जिले की सियासत में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को शिकस्त देने के लिए पूरा विपक्ष एक बार फिर एकजुट हो गया है। पिछले कई दिनों से जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति में जुटे विपक्ष ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में डीएम के सामने 25 में से 15 सदस्यों को पेश करके सबको चौंका दिया।
इन सदस्यों ने डीएम के सामने बाकायदा इस आशय के शपथ पत्र भी पेश किए हैं कि वह मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष के क्रियाकलाप से संतुष्ट नहीं हैं। लिहाजा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए अधिवेशन बुलाया जाए। डीएम ने सभी सदस्यों की न केवल हाजिरी दर्ज की, बल्कि अपने सामने उनकी वीडियोग्राफी भी करवाई।
सदस्यों के शपथपत्रों पर लगे फोटो का उनके चेहरों से मिलान कर डीएम ने आश्वस्त किया कि जल्द ही पंचायतराज एक्ट का अवलोकन करने के बाद वह अगला कदम उठाएंगे। इन 15 सदस्यों के उनके खिलाफ शपथपत्र देने से जिला पंचायत अध्यक्ष फिलहाल अल्पमत में दिखाई दे रहे हैं।
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प्रभारी मंत्री के आने के बाद बनी रणनीति
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अंदरखाने सपा, रालोद और भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति में जुटे थे। इसका खुलासा पिछले दिनों तब हुआ, जब जिले के प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी के जाने के बाद इन सदस्यों ने सदर विधायक हरीशंकर माहौर से मुलाकात की और उनसे अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल करने की मांग की।
विधायक ने उनसे साफ कह दिया था कि वह पहले पर्याप्त संख्या बल जुटा लें, उसके बाद आगे की बात होगी। तब से विपक्ष संख्या बल जुटाने की कोशिश में दिन-रात एक किए हुए था। सपा, भाजपा और रालोद के अलावा निर्दलीय सदस्यों से भी संपर्क साधा गया। उन्हें हर तरह से अपने खेमे में लाने की कोशिश की गई। इस बीच भनक लगने पर अध्यक्ष गुट भी अपना बहुमत सलामत रखने की कोशिश में जुटा रहा, लेकिन अब बसपा खेमे में खलबली मच गई है।
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इन सदस्यों ने सौंपे शपथ पत्र
जिन सदस्यों की तरफ से शपथ सौंपे गए, उनमें प्रदीप चौधरी गुड्डू, सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष मनोज यादव की पत्नी मीनू यादव, श्याम सिंह, सत्ता फौजी, राजाराम फौजी, सत्यपाल सेंगर, बिजेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, इंद्रजीत कुशवाहा, ललिता देवी, सीमा देवी, आशा देवी और निर्मला देवी शामिल हैं। इनके साथ पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान, पूर्व विधायक गेंदालाल चौधरी, पूर्व रालोद जिलाध्यक्ष रवेंद्र सिंह ठेनुआं और अन्य नेता भी थे। इन नेताओं ने दावा किया कि उनके पास समर्थन तो 20 से 21 सदस्यों का है, लेकिन फिलहाल 15 सदस्य ही आए हैं, जोकि बहुमत से भी ज्यादा हैं।
रुठे सदस्यों को मनाने में जुटे बसपाई
बसपा नेताओं ने भी उन सदस्यों से संपर्क साधा है, जिन्होंने डीएम के सामने पेश होकर शपथ पत्र पेश किए हैं। इन्हें दोबारा से अपने खेमे में लाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं। यही नहीं इस मुद्दे पर कानूनी पेशबंदी की तैयारी में भी बसपा नेता जुट गए हैं। बसपा की पूरी कोशिश अविश्वास प्रस्ताव आने तक विपक्ष का खेल बिगाड़ने की रहेगी।
बसपा और संयुक्त विपक्ष के बीच चल रही इस सियासी शह और मात ने जिले में सियासी माहौल गर्मा दिया है। अब सभी राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि जिले भर के आम-ओ-खास की नजरें इस मुद्दे पर डीएम के अगले कदम और संभावित अविश्वास प्रस्ताव के नतीजे पर रहेंगी।
विपक्ष का प्रत्याशी अभी तय नहीं
खास बात यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, लेकिन अभी तक संयुक्त विपक्ष का अध्यक्ष पद का प्रत्याशी तय नहीं है। हालांकि रालोद के सदस्य प्रदीप चौधरी गुड्डू का कहना है कि हम सब मिल बैठकर तय कर लेंगे कि किसे अध्यक्ष बनाना है। चूंकि फिलहाल पूर्व सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए वही हमारा नेतृत्व कर रही हैं।
मेरे सामने पेश होकर 15 जिला पंचायत सदस्यों ने अपने शपथ पत्र पेश किए हैं। अब सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। पंचायतराज अधिनियम का भी अवलोकन किया जाएगा। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
-अमित कुमार सिंह, डीएम हाथरस
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कई सदस्यों को जबरिया दवाब में लेकर शपथ दिलवाए गए हैं। विरोधी ओछी हरकतों पर उतर आए हैं, लेकिन इस तरह के हथकंडों से वह जीत नहीं पाएंगे। शपथ पत्र देने वाले कई सदस्यों ने हमारे पास खुद आकर कहा है कि उन्हें बहकाकर और बरगलाकर शपथ पत्र दिलवाए गए हैं।
-विनोद उपाध्याय, अध्यक्ष जिला पंचायत हाथरस
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ये सब राजकाज है। विरोधी शुरू से मेरे खिलाफ मोर्चा बनाते रहे हैं। विरोधी ने जिला पंचायत सदस्यों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं, लेकिन इस सबका का कोई नतीजा नहीं निकलने वाला। देखते हैं आगे क्या होता है।
-रामवीर उपाध्याय, पूर्व मंत्री व विधायक सादाबाद
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा होता है। यह सदस्यों का विशेषाधिकार है कि वह किसे अध्यक्ष बनाएंगे और किसे हटाएंगे। इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है और न हीं कोई हस्तक्षेप है। निर्णय जिला पंचायत के सदस्यों को करना है।
-रामवीर सिंह परमार, जिलाध्यक्ष भाजपा
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हमने डीएम से मिलकर 15 सदस्यों के शपथ पत्र सौंप दिए हैं। हमारे पास इससे भी ज्यादा बहुमत है। पहले अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने दीजिए, उसके बाद अध्यक्ष भी तय कर लेंगे।
-ओमवती यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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इन सदस्यों ने डीएम के सामने बाकायदा इस आशय के शपथ पत्र भी पेश किए हैं कि वह मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष के क्रियाकलाप से संतुष्ट नहीं हैं। लिहाजा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए अधिवेशन बुलाया जाए। डीएम ने सभी सदस्यों की न केवल हाजिरी दर्ज की, बल्कि अपने सामने उनकी वीडियोग्राफी भी करवाई।
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सदस्यों के शपथपत्रों पर लगे फोटो का उनके चेहरों से मिलान कर डीएम ने आश्वस्त किया कि जल्द ही पंचायतराज एक्ट का अवलोकन करने के बाद वह अगला कदम उठाएंगे। इन 15 सदस्यों के उनके खिलाफ शपथपत्र देने से जिला पंचायत अध्यक्ष फिलहाल अल्पमत में दिखाई दे रहे हैं।
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प्रभारी मंत्री के आने के बाद बनी रणनीति
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अंदरखाने सपा, रालोद और भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति में जुटे थे। इसका खुलासा पिछले दिनों तब हुआ, जब जिले के प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी के जाने के बाद इन सदस्यों ने सदर विधायक हरीशंकर माहौर से मुलाकात की और उनसे अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल करने की मांग की।
विधायक ने उनसे साफ कह दिया था कि वह पहले पर्याप्त संख्या बल जुटा लें, उसके बाद आगे की बात होगी। तब से विपक्ष संख्या बल जुटाने की कोशिश में दिन-रात एक किए हुए था। सपा, भाजपा और रालोद के अलावा निर्दलीय सदस्यों से भी संपर्क साधा गया। उन्हें हर तरह से अपने खेमे में लाने की कोशिश की गई। इस बीच भनक लगने पर अध्यक्ष गुट भी अपना बहुमत सलामत रखने की कोशिश में जुटा रहा, लेकिन अब बसपा खेमे में खलबली मच गई है।
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इन सदस्यों ने सौंपे शपथ पत्र
जिन सदस्यों की तरफ से शपथ सौंपे गए, उनमें प्रदीप चौधरी गुड्डू, सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव, पूर्व सपा जिलाध्यक्ष मनोज यादव की पत्नी मीनू यादव, श्याम सिंह, सत्ता फौजी, राजाराम फौजी, सत्यपाल सेंगर, बिजेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, इंद्रजीत कुशवाहा, ललिता देवी, सीमा देवी, आशा देवी और निर्मला देवी शामिल हैं। इनके साथ पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान, पूर्व विधायक गेंदालाल चौधरी, पूर्व रालोद जिलाध्यक्ष रवेंद्र सिंह ठेनुआं और अन्य नेता भी थे। इन नेताओं ने दावा किया कि उनके पास समर्थन तो 20 से 21 सदस्यों का है, लेकिन फिलहाल 15 सदस्य ही आए हैं, जोकि बहुमत से भी ज्यादा हैं।
रुठे सदस्यों को मनाने में जुटे बसपाई
बसपा नेताओं ने भी उन सदस्यों से संपर्क साधा है, जिन्होंने डीएम के सामने पेश होकर शपथ पत्र पेश किए हैं। इन्हें दोबारा से अपने खेमे में लाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं। यही नहीं इस मुद्दे पर कानूनी पेशबंदी की तैयारी में भी बसपा नेता जुट गए हैं। बसपा की पूरी कोशिश अविश्वास प्रस्ताव आने तक विपक्ष का खेल बिगाड़ने की रहेगी।
बसपा और संयुक्त विपक्ष के बीच चल रही इस सियासी शह और मात ने जिले में सियासी माहौल गर्मा दिया है। अब सभी राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि जिले भर के आम-ओ-खास की नजरें इस मुद्दे पर डीएम के अगले कदम और संभावित अविश्वास प्रस्ताव के नतीजे पर रहेंगी।
विपक्ष का प्रत्याशी अभी तय नहीं
खास बात यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, लेकिन अभी तक संयुक्त विपक्ष का अध्यक्ष पद का प्रत्याशी तय नहीं है। हालांकि रालोद के सदस्य प्रदीप चौधरी गुड्डू का कहना है कि हम सब मिल बैठकर तय कर लेंगे कि किसे अध्यक्ष बनाना है। चूंकि फिलहाल पूर्व सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव सबसे वरिष्ठ हैं, इसलिए वही हमारा नेतृत्व कर रही हैं।
मेरे सामने पेश होकर 15 जिला पंचायत सदस्यों ने अपने शपथ पत्र पेश किए हैं। अब सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। पंचायतराज अधिनियम का भी अवलोकन किया जाएगा। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
-अमित कुमार सिंह, डीएम हाथरस
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कई सदस्यों को जबरिया दवाब में लेकर शपथ दिलवाए गए हैं। विरोधी ओछी हरकतों पर उतर आए हैं, लेकिन इस तरह के हथकंडों से वह जीत नहीं पाएंगे। शपथ पत्र देने वाले कई सदस्यों ने हमारे पास खुद आकर कहा है कि उन्हें बहकाकर और बरगलाकर शपथ पत्र दिलवाए गए हैं।
-विनोद उपाध्याय, अध्यक्ष जिला पंचायत हाथरस
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ये सब राजकाज है। विरोधी शुरू से मेरे खिलाफ मोर्चा बनाते रहे हैं। विरोधी ने जिला पंचायत सदस्यों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं, लेकिन इस सबका का कोई नतीजा नहीं निकलने वाला। देखते हैं आगे क्या होता है।
-रामवीर उपाध्याय, पूर्व मंत्री व विधायक सादाबाद
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा होता है। यह सदस्यों का विशेषाधिकार है कि वह किसे अध्यक्ष बनाएंगे और किसे हटाएंगे। इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है और न हीं कोई हस्तक्षेप है। निर्णय जिला पंचायत के सदस्यों को करना है।
-रामवीर सिंह परमार, जिलाध्यक्ष भाजपा
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हमने डीएम से मिलकर 15 सदस्यों के शपथ पत्र सौंप दिए हैं। हमारे पास इससे भी ज्यादा बहुमत है। पहले अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने दीजिए, उसके बाद अध्यक्ष भी तय कर लेंगे।
-ओमवती यादव, सपा जिलाध्यक्ष