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118 साल जिए किन्नर पन्ना गुरु, तेरहवीं पर जश्न
राकेश वार्ष्णेय, सिकंदराराऊ (हाथरस)।
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:10 AM IST
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विभिन्न शहरों से आए किन्नर।
- फोटो : Amar Ujala
नगरवासियों के गुरुवार का दिन विशेष कौतूहल भरा होगा। बीती 13 जून को 118 वर्ष की आयु में किन्नर पन्ना गुरु की मृत्यु के पश्चात कल तेरहवीं पर यहां विशाल आयोजन होगा। इसके तहत विभिन्न प्रांतों से आये किन्नर नाचते गाते हुए नगर कलश यात्रा निकालेंगे। वे दो मंदिरों में घंटा एवं एक मजार पर चादरपोशी करेंगे। नगर के मुरली कृष्ण मंगलधाम में विभिन्न शहरों से आए सैकड़ों की तादाद में किन्नर कई दिनों से विभिन्न आयोजनों में भाग ले रहे हैं। पूरे शहर में मेले जैसा माहौल है।
पन्ना गुरु ने जिन लड़कों की पैदाइश पर नाच गा कर नेग लिया था उनमें अनेक वृद्ध होकर इस दुनिया से जा चुके हैं। आजकल जहां किन्नर नेग को लेकर हंगामा करते देखे जाते हैं वहीं पन्ना के नाम आज तक कोई विवाद नहीं रहा। किन्नरों के मुताबिक उनकी मृत्यु 118 वर्ष की आयु में बीमारी के चलते बीती 13 जून को हुई थी। गुरुवार को किन्नर मंदिर बगिया बारहसैनी तथा ओमबाबा मंदिर पर घंटा चढ़ाएंगी तथा मस्जिद मार्केट स्थित मजार पर चादरपोशी करेंगी। सायंकाल भोज का आयोजन है। स्थानीय किन्नर राखी नायक, गायत्री, गीता आदि ने बताया कि बच्चों की सलामती, व्यापार की उन्नति तथा देश में शांति की दुआ करेंगे।
हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का मेल
किसी किन्नर की मौत के बाद होने वाले आयोजन में हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का संगम रहता है। इसे तेरहवीं कहा जाता है पर मनाया जाता है चालीसवें दिन। इस दिन मंदिर और मजार में जाकर किन्नर अपनी श्रद्धा को प्रकट करते हैं।
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पन्ना गुरु ने जिन लड़कों की पैदाइश पर नाच गा कर नेग लिया था उनमें अनेक वृद्ध होकर इस दुनिया से जा चुके हैं। आजकल जहां किन्नर नेग को लेकर हंगामा करते देखे जाते हैं वहीं पन्ना के नाम आज तक कोई विवाद नहीं रहा। किन्नरों के मुताबिक उनकी मृत्यु 118 वर्ष की आयु में बीमारी के चलते बीती 13 जून को हुई थी। गुरुवार को किन्नर मंदिर बगिया बारहसैनी तथा ओमबाबा मंदिर पर घंटा चढ़ाएंगी तथा मस्जिद मार्केट स्थित मजार पर चादरपोशी करेंगी। सायंकाल भोज का आयोजन है। स्थानीय किन्नर राखी नायक, गायत्री, गीता आदि ने बताया कि बच्चों की सलामती, व्यापार की उन्नति तथा देश में शांति की दुआ करेंगे।
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हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का मेल
किसी किन्नर की मौत के बाद होने वाले आयोजन में हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का संगम रहता है। इसे तेरहवीं कहा जाता है पर मनाया जाता है चालीसवें दिन। इस दिन मंदिर और मजार में जाकर किन्नर अपनी श्रद्धा को प्रकट करते हैं।
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