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10 दिन बचे हैं शेष लेकिन नहीं टूट रही वोटर की खामोशी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
हाथरस संसदीय सीट पर मतदान में अब सिर्फ 10 दिन ही बचा है लेकिन, मतदाता अपनी खामोशी नहीं तोड़ रहे हैं। प्रत्याशी हर फंडा अपना कर अपना माहौल बनाने मेें लगे हैं लेकिन मतदाता कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। वोटर हर प्रत्याशी को वोट देने का वायदा कर रहा है लेकिन अंदरखाने उसके मन में क्या है, यह वह उजागर नहीं कर रहा।
ऐसे में सभी प्रत्याशी इस गफलत में है कि उक्त जाति और क्षेत्र का वोट उन्हें मिल रहा है। चुनाव आयोग की सख्ती के चलते ज्यादा प्रचार-प्रसार हो नहीं पा रहा, मतदाता भी खामोश है। वह खुलकर किसी के समर्थन में नहीं आ रहे हैं इससे प्रत्याशियों में संशय की स्थिति बनी हुई है। सभी अपने अपने स्तर से मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं।
प्रत्याशी भी तरह-तरह के वादे कर रहे हैं। अब आम मतदाता ने प्रत्याशियों के समक्ष समस्याएं बताना भी बंद कर दिया है। उसे मालूम है कि वह पहले कई बार सांसदों को अपनी समस्याएं बता चुका है लेकिन हुआ कुछ नहीं है। मतदाता की खामोशी से लगभग हर प्रत्याशी को यह गफलत भी हो गई है कि उसकी जीत पक्की है और हर बिरादरी व क्षेत्र उसे ही सपोर्ट कर रहा है।
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हाथरस संसदीय सीट पर मतदान में अब सिर्फ 10 दिन ही बचा है लेकिन, मतदाता अपनी खामोशी नहीं तोड़ रहे हैं। प्रत्याशी हर फंडा अपना कर अपना माहौल बनाने मेें लगे हैं लेकिन मतदाता कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। वोटर हर प्रत्याशी को वोट देने का वायदा कर रहा है लेकिन अंदरखाने उसके मन में क्या है, यह वह उजागर नहीं कर रहा।
ऐसे में सभी प्रत्याशी इस गफलत में है कि उक्त जाति और क्षेत्र का वोट उन्हें मिल रहा है। चुनाव आयोग की सख्ती के चलते ज्यादा प्रचार-प्रसार हो नहीं पा रहा, मतदाता भी खामोश है। वह खुलकर किसी के समर्थन में नहीं आ रहे हैं इससे प्रत्याशियों में संशय की स्थिति बनी हुई है। सभी अपने अपने स्तर से मतदाताओं को रिझाने में लगे हैं।
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प्रत्याशी भी तरह-तरह के वादे कर रहे हैं। अब आम मतदाता ने प्रत्याशियों के समक्ष समस्याएं बताना भी बंद कर दिया है। उसे मालूम है कि वह पहले कई बार सांसदों को अपनी समस्याएं बता चुका है लेकिन हुआ कुछ नहीं है। मतदाता की खामोशी से लगभग हर प्रत्याशी को यह गफलत भी हो गई है कि उसकी जीत पक्की है और हर बिरादरी व क्षेत्र उसे ही सपोर्ट कर रहा है।
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