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Hardoi News: शाओमी और उसके सर्विस सेंटर पर 10 हजार का जुर्माना
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हरदोई। वारंटी अवधि के भीतर खराब हुए रेडमी मोबाइल की मरम्मत के नाम पर ग्राहक से पार्ट और लेबर चार्ज वसूलना शाओमी कंपनी और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राजकुमार और सदस्य सुरभि अग्रवाल ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए वसूली गई रकम लौटाने के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला राधानगर निवासी श्रेयांश सिंह ने 25 फरवरी 2022 को उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था। बताया कि जुलाई 2024 में रेडमी नोट प्रो मोबाइल खरीदा था। कंपनी की ओर से एक वर्ष की वारंटी दी गई थी। वारंटी अवधि के दौरान मोबाइल का फिंगरप्रिंट सेंसर खराब होने पर उसे शाओमी के अधिकृत सर्विस सेंटर लखनऊ में जमा किया था। आरोप है कि वारंटी लागू होने के बावजूद सर्विस सेंटर ने पार्ट और लेबर चार्ज के नाम पर एक हजार रुपये वसूल लिए। विरोध करने पर संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया था।
सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष से आयोग में कोई उपस्थित नहीं हुआ था। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, वारंटी शर्तों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना गया कि वारंटी अवधि में खराब हुए मोबाइल की मरम्मत बिना अतिरिक्त शुल्क के की जानी चाहिए थी। ऐसे में कंपनी और सर्विस सेंटर द्वारा शुल्क वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने वसूले गए एक हजार रुपये ब्याज सहित वापस किए किए जाने के आदेश दिए हैं। 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला राधानगर निवासी श्रेयांश सिंह ने 25 फरवरी 2022 को उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था। बताया कि जुलाई 2024 में रेडमी नोट प्रो मोबाइल खरीदा था। कंपनी की ओर से एक वर्ष की वारंटी दी गई थी। वारंटी अवधि के दौरान मोबाइल का फिंगरप्रिंट सेंसर खराब होने पर उसे शाओमी के अधिकृत सर्विस सेंटर लखनऊ में जमा किया था। आरोप है कि वारंटी लागू होने के बावजूद सर्विस सेंटर ने पार्ट और लेबर चार्ज के नाम पर एक हजार रुपये वसूल लिए। विरोध करने पर संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया था।
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सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष से आयोग में कोई उपस्थित नहीं हुआ था। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, वारंटी शर्तों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना गया कि वारंटी अवधि में खराब हुए मोबाइल की मरम्मत बिना अतिरिक्त शुल्क के की जानी चाहिए थी। ऐसे में कंपनी और सर्विस सेंटर द्वारा शुल्क वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने वसूले गए एक हजार रुपये ब्याज सहित वापस किए किए जाने के आदेश दिए हैं। 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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