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माता कात्यायनी की पूजा-अर्चना की
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फोटो-18- संतोषी माता मंदिर में पूजन करती महिलाएं
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। चैत्र नवरात्र महापर्व के छठे दिन माता के छठे स्वरूप माता कात्यायनी की पूजा-अर्चना हुई। भक्तों ने महामाई का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। मां की आराधना में लीन लोगों ने बृहस्पतिवार को मंदिरों में मत्था टेक कर मां का आशीष लिया। मां के भक्तों ने जयकारे लगाकर, घंटा घड़ियाल बजाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया ।
शहर स्थित देवी मां के मंदिरों में मां का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ रही।
खासतौर से सांडी रोड स्थित मां श्रवण देवी मंदिर, बड़ा चौराहा के निकट स्थित संतोषी माता मंदिर में बड़ी संख्या में पहुंचे। भक्तों ने मां कात्यायनी का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
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शहर से लेकर गांवों तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। पंडित उमाकांत शास्त्री, सुनील शास्त्री, आचार्य सनत, वरिष्ठ पुरोहित बालस्टर मिश्रा, महामाया गुल्लू पंडित ने बताया कि मंदिरों एवं घरों में मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की गई।
मां के छठे रूप कात्यायनी देवी को सुख-शांति की दात्री माना जाता है। मान्यता है कि कात्यायन ऋषि ने देवी को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए भगवती की आराधना की।
ऋषि की पुत्री के रूप में अवतार लेने के कारण इनका नाम कात्यायनी देवी पड़ा। माता कात्यायनी की पूजा करने से विपत्तियों का नाश होता है और लोगों को सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
हर तरफ देवी मां के गुणगान हो रहा है। इसके साथ घरों एवं मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ हो रहा है।
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शहर स्थित देवी मां के मंदिरों में मां का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया था। मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ रही।
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खासतौर से सांडी रोड स्थित मां श्रवण देवी मंदिर, बड़ा चौराहा के निकट स्थित संतोषी माता मंदिर में बड़ी संख्या में पहुंचे। भक्तों ने मां कात्यायनी का पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
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शहर से लेकर गांवों तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। पंडित उमाकांत शास्त्री, सुनील शास्त्री, आचार्य सनत, वरिष्ठ पुरोहित बालस्टर मिश्रा, महामाया गुल्लू पंडित ने बताया कि मंदिरों एवं घरों में मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की गई।
मां के छठे रूप कात्यायनी देवी को सुख-शांति की दात्री माना जाता है। मान्यता है कि कात्यायन ऋषि ने देवी को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए भगवती की आराधना की।
ऋषि की पुत्री के रूप में अवतार लेने के कारण इनका नाम कात्यायनी देवी पड़ा। माता कात्यायनी की पूजा करने से विपत्तियों का नाश होता है और लोगों को सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
हर तरफ देवी मां के गुणगान हो रहा है। इसके साथ घरों एवं मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ हो रहा है।