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सब्र का दामन थामें मुसलमान : मुनव्वर

Thu, 25 Dec 2014 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Thu, 25 Dec 2014 11:29 PM IST
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Which lose patience Muslim : Munawar

शहीद-ए-करबला इमाम हुसैन के चेहल्लुम पर देहलिया गांव

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में भारी हुजूम उमड़ा। इस दौरान निकाले गए ताजिए, ताबूत और अलम के जुलूस में अंजुमनों ने नौहाख्वानी और सीनाजनी से गम-ए-शहादत हुसैन को ताजा कर अकीदमंदों का सिसकियां भरने पर मजबूर कर दिया।

इमामबाड़ा मंज़लुल गुरबा से बरामद हुए ताजिए और अलम के जुलूस में बड़ी संख्या में शामिल अजादारों ने गम-ए-हुसैन में मातम करते हुए अपने सीने लाल कर लिए। यहां से इमाम चौक पर पहुंचे जुलूस में आयोजक अंजुमन शमशीरे हैदरी ने नौहाख्वानी और सीनाजनी की। इसके बाद अंजुमन असगरिया अहमर (सुलतानपुर) ने नौहा, बीमार हैं बाबा, लाचार हैं बाबा, आदि नौहे पढ़ते हुए शोहदा-ए-करबला का मातम किया।

फिर अंजुमन मासूमिया जलालपुर, अंजुमन असगरिया ककरौली (मुजफ्फरनगर) और अंजुमन जुल्फिकारे हैदरी मंगलौर (हरिद्वार) ने बारी-बारी से मर्सिए पढ़ते हुए मातम किया। इसके बाद शिया जामा मसजिद से अली अकबर का ताबूत बरामद किया गया। इमाम चौक लाए गए ताबूत को बोसे दिए गए। यहां रखे ताजियों पर मन्नतें मानने और चढ़ावा चढ़ाने का भी लंबा सिलसिला चला, जो पूरे कार्यक्रम के दौरान जारी रहा।

शाम को जुलूस करबला को रवाना हुआ। देहलिया के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जुलूस करबला में पहुंचा। यहां अलविदाई नौहा पढ़कर हाय हुसैन की सदाएं बुलंद की गईं। फिर नम आंखों के साथ ताजिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए। कार्यक्रम में लखनऊ पिहानी, पियाबाग, महमूदपुर सरैयां, गजुआखेड़ा और बढ़ैया आदि गांवों से बड़ी संख्या में अकीदमंद यहां पहुंचे थे। उधर, मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुनव्वर हुसैन ने कहा कि करबला की जंग से हमें मुसीबत में सब्र करने की तालीम मिलती है।

इमाम हुसैन से बड़ा सब्र करने वाला इस धरती ने नहीं देखा। बच्चों की दर्दनाक शहादतें भी इमाम के फैसले और सब्र को डगमगा न सकीं। आज दुनिया को हुसैनियत की जरूरत है। जुल्म-ओ-सितम के बीच लाख मुसीबतों में घिर कर भी हमें अपने रब पर यकीन को मजबूत रखना चाहिए। इमाम हुसैन ने अपनी गरदन कटा कर सब्र और शुक्र का दामन थामे रहने का पैगाम दिया।

इमाम की शहादत हमें नमाज की पाबंदी और राहे हक पर डटे रहने का भी पैगाम देती है। कामयाबी चाहिए तो हमें इमाम के तर्जें जिंदगी को अपनाना होगा। उधर, देहलिया गांव में चेहल्लुम के दौरान मेला का नजारा दिखाई दिया। मेले के दौरान ऊंचे झूलों पर भी दिन भर बच्चों का धमाल जारी रहा। बाजार से लेकर मैदान पर हर तरह की सजी दुकानों पर गुरुवार को हजारों की खरीद फरोख्त की गई।

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