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गेहूं उगलेगा सोना, होगी बंपर पैदावार
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हरदोई। इस साल अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो गेहूं की फसल अन्नदाताओं को काफी मालामाल कर सकती है। अबकी मौसम के तेवर गेहूं की फसल के लिए काफी अनुकूल रहे हैं।
अन्नदाताओं को भी इसके चलते गेहूं की बंपर पैदावार होने के आसार दिखाई पड़ने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गेहूं का औसत उत्पादन एक हेक्टेयर में 45 क्विंटल तक हो सकता है।
अन्नदाताओं ने जिले के तीन लाख आठ हजार 168 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल बोई है।
सब कुछ ठीक रहा तो अबकी गेहूं सोना उगाएगा। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में परंपरागत रूप से होने वाली गेहूं की फसल का औसत रकबा हर वर्ष तीन लाख हेक्टेयर के आसपास रहता था।
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इस साल रकबा तीन लाख आठ हजार 168 हेक्टेयर है। खेतों में गेहूं की बालियों को देखकर अनुमान लगाया जा रहा कि पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। गेहूं की फसल इसी माह के अंत तक पककर तैयार हो जाने की उम्मीद है।
अप्रैल माह में गेहूं की कटाई के साथ ही गहाई के बाद बाजार में आमद शुरू हो जाएगी। किसान अबकी 42 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक गेहूं के पैदा होने का अनुमान लगा रहे हैं।
इसके अलावा गेहूं की फसल सामान्य रूप से ठीक भी लग रही है। खेतों में लहलहाती गेहूं की बालियां अच्छा उत्पादन होने के संकेत दे रहीं हैं।
जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल को खाद और बीज से लेकर गुणवत्ता युक्त प्रबंधन नहीं मिल पाया, वहां उत्पादन कमजोर रहने के साथ अनुमान गड़बड़ा सकते हैं।
पिछले वर्ष कम हुआ था उत्पादन
गत वर्ष गेहूं का उत्पादन पिछले वर्षों की अपेक्षा कम रहा था। औसतन उत्पादन 32 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास था। मौसम एवं कोरोना के असर के चलते किसानों की अपेक्षा के अनुसार गेहूं की पैदावार कम हुई थी।
जिसके चलते इस बार सैकड़ों किसानों ने गेहूं का रकबा कम कर सरसों आदि की खेती की ओर किया, जिससे इस बार जिले में गेहूं बुवाई के लक्ष्य तीन लाख 22 हजार 116 हेक्टेयर के सापेक्ष करीब 14 हजार हेक्टेयर रकबा कम रहा।
थ्रेसरों एवं कंपाइन मशीनों की बुकिंग
मौसम में हो रहे तेजी से बदलाव के साथ मिजाज गर्म होने लगे है। ऐसे में खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल पककर कटाई एवं गहाई के लिए तैयार हो रही है।
जानकारों का कहना है कि अगले कुछ दिनों बाद बाजार में नया गेहूं बिकने के लिए आने लगेगा। जिसको लेकर जिला प्रशासन ने भी एक अप्रैल से गेहूं की खरीद कराने के लिए आवश्यक तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
एक चिंगारी कहीं पड़ न जाए भारी
अग्निशमन विभाग की ओर से हर वर्ष गर्मी के मौसम में सभी लोगों को अलर्ट किया जाता है। खासतौर से इस मौसम में फसलों की कटाई को लेकर सभी से जागरूक रहने की अपील की जाती है।
एक छोटी सी चिंगारी भारी पड़ जाती है। ऐसे में किसानों को इस ओर पूरी सतर्कता बरतनी है, ताकि कोई दुर्घटना न होने पाए। पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने कहा कि विभाग हमेशा हर संभव सहायता के लिए तैयार रहता है, लेकिन किसानों की भी जिम्मेदारी है कि वह जागरूक और जिम्मेदार हों।
अधिकारी बोले
लक्ष्य के सापेक्ष इस बार जिले में करीब 14 हजार हेक्टेयर गेहूं की बुवाई कम हुई है, मगर इस बार गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा ज्यादा रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष उत्पादन अन्य वर्षों की अपेक्षा कम रहा था।
- नंदकिशोर, डीडी कृषि
बोले कृषि वैज्ञानिक
इस बार गेहूं की फसल सामान्य रूप से ठीकठाक है। अनुमान है कि इस साल प्रति हेक्टेयर से 40 से 45 क्विंटल तक गेहूं का उत्पादन हो सकता है।
जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल को खाद और बीज से लेकर गुणवत्ता युक्त प्रबंधन नहीं मिल पाया, वहां उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अभी तक मौसम गेहूं के अनुकूल रहा है। फसल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। फसल की कटाई और मड़ाई के साथ ही जल्द नया गेहूं बाजार में दस्तक देगा।
- डॉ. पीपी पाल, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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अन्नदाताओं को भी इसके चलते गेहूं की बंपर पैदावार होने के आसार दिखाई पड़ने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गेहूं का औसत उत्पादन एक हेक्टेयर में 45 क्विंटल तक हो सकता है।
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अन्नदाताओं ने जिले के तीन लाख आठ हजार 168 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल बोई है।
सब कुछ ठीक रहा तो अबकी गेहूं सोना उगाएगा। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में परंपरागत रूप से होने वाली गेहूं की फसल का औसत रकबा हर वर्ष तीन लाख हेक्टेयर के आसपास रहता था।
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इस साल रकबा तीन लाख आठ हजार 168 हेक्टेयर है। खेतों में गेहूं की बालियों को देखकर अनुमान लगाया जा रहा कि पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। गेहूं की फसल इसी माह के अंत तक पककर तैयार हो जाने की उम्मीद है।
अप्रैल माह में गेहूं की कटाई के साथ ही गहाई के बाद बाजार में आमद शुरू हो जाएगी। किसान अबकी 42 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक गेहूं के पैदा होने का अनुमान लगा रहे हैं।
इसके अलावा गेहूं की फसल सामान्य रूप से ठीक भी लग रही है। खेतों में लहलहाती गेहूं की बालियां अच्छा उत्पादन होने के संकेत दे रहीं हैं।
जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल को खाद और बीज से लेकर गुणवत्ता युक्त प्रबंधन नहीं मिल पाया, वहां उत्पादन कमजोर रहने के साथ अनुमान गड़बड़ा सकते हैं।
पिछले वर्ष कम हुआ था उत्पादन
गत वर्ष गेहूं का उत्पादन पिछले वर्षों की अपेक्षा कम रहा था। औसतन उत्पादन 32 से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास था। मौसम एवं कोरोना के असर के चलते किसानों की अपेक्षा के अनुसार गेहूं की पैदावार कम हुई थी।
जिसके चलते इस बार सैकड़ों किसानों ने गेहूं का रकबा कम कर सरसों आदि की खेती की ओर किया, जिससे इस बार जिले में गेहूं बुवाई के लक्ष्य तीन लाख 22 हजार 116 हेक्टेयर के सापेक्ष करीब 14 हजार हेक्टेयर रकबा कम रहा।
थ्रेसरों एवं कंपाइन मशीनों की बुकिंग
मौसम में हो रहे तेजी से बदलाव के साथ मिजाज गर्म होने लगे है। ऐसे में खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल पककर कटाई एवं गहाई के लिए तैयार हो रही है।
जानकारों का कहना है कि अगले कुछ दिनों बाद बाजार में नया गेहूं बिकने के लिए आने लगेगा। जिसको लेकर जिला प्रशासन ने भी एक अप्रैल से गेहूं की खरीद कराने के लिए आवश्यक तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।
एक चिंगारी कहीं पड़ न जाए भारी
अग्निशमन विभाग की ओर से हर वर्ष गर्मी के मौसम में सभी लोगों को अलर्ट किया जाता है। खासतौर से इस मौसम में फसलों की कटाई को लेकर सभी से जागरूक रहने की अपील की जाती है।
एक छोटी सी चिंगारी भारी पड़ जाती है। ऐसे में किसानों को इस ओर पूरी सतर्कता बरतनी है, ताकि कोई दुर्घटना न होने पाए। पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने कहा कि विभाग हमेशा हर संभव सहायता के लिए तैयार रहता है, लेकिन किसानों की भी जिम्मेदारी है कि वह जागरूक और जिम्मेदार हों।
अधिकारी बोले
लक्ष्य के सापेक्ष इस बार जिले में करीब 14 हजार हेक्टेयर गेहूं की बुवाई कम हुई है, मगर इस बार गेहूं का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा ज्यादा रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष उत्पादन अन्य वर्षों की अपेक्षा कम रहा था।
- नंदकिशोर, डीडी कृषि
बोले कृषि वैज्ञानिक
इस बार गेहूं की फसल सामान्य रूप से ठीकठाक है। अनुमान है कि इस साल प्रति हेक्टेयर से 40 से 45 क्विंटल तक गेहूं का उत्पादन हो सकता है।
जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल को खाद और बीज से लेकर गुणवत्ता युक्त प्रबंधन नहीं मिल पाया, वहां उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अभी तक मौसम गेहूं के अनुकूल रहा है। फसल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। फसल की कटाई और मड़ाई के साथ ही जल्द नया गेहूं बाजार में दस्तक देगा।
- डॉ. पीपी पाल, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र