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बीज उत्पादन पर भी मौसम की मार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 08 Apr 2015 01:00 AM IST
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मौसम की मार से बीज उत्पादक किसान भी तबाह हो गए हैं।
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मौसम के तूफानी बदलाव से क्षेत्रीय बीज उत्पादकों को 40 से 45 फीसदी
नुकसान पहुंचाया है। एक अनुमान के अनुसार यहां के बीज विधायन संयंत्र में
पंजीकृत कृषकोें को अबकी तकरीबन 70 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।
इस आर्थिक क्षति के साथ ही अबकी पिहानी के बीज संयंत्र पर बीज उत्पादन भी प्रभावित होगा, जिसके सबब में मांग के सापेक्ष पूर्ति नहीं हो पाने के हालात बन रहे हैं। पिहानी क्षेत्र के इटारा इलाके में स्थित उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के बीज विधायन संयंत्र में इस बार कृषक बीज का जो नमूना लेकर आ रहे हैं, उसमें दोष नजर आ रहा है।
हालांकि, उसे स्थानीय स्तर पर तो स्वीकार किया जा रहा, पर इस बात की कोई गारंटी नहीं कि यह बीज उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण संस्थान द्वारा पास ही कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में बीज उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। संयंत्र पर बीज उत्पादकों के रूप में 139 किसान पंजीकृत हैं।
बीज को पास होने में तीन चरणों से गुजरना होता है। पहले खेत का नमूना, फिर प्लांट और इसके बाद तैयार बीज का प्रमाणीकरण संस्थान द्वारा पास किया जाना, पर इस बार खेत से आने वाले नमूने को ही मुश्किल से ही पास किया जा पा रहा है।
बीज उत्पादकों पाल सिंह, नायब सिंह, भोज राज, सुरेश, राज भूपेंद्र सिंह, सतनाम सिंह, नजमुद्दीन, सुनील वाजपेई और संजय आदि ने बताया कि खेत में बीज को भी मौसम के बदलाव से चालीस से पचास फीसदी तक नुकसान हुआ है। यदि चालीस से पैंतालीस फीसदी नुकसान भी मान लिया जाए तो लगभग पांच से छह हजार क्विंटल बीज प्रभावित हो सकता है जिससे बीज उत्पादक किसानों को बीज बर्बादी से तकरीबन अस्सी लाख रुपये की क्षति होने की संभावना है।
इस बाबत सहायक बीज उत्पादक अधिकारी ऋषि कपूर ने बताया कि फिलहाल जो नमूना खेत से आ रहा है, उसमें ऐसे नुकसान नहीं है कि उसे स्थानीय स्तर पर अयोग्य ठहराया जाए। इस नमूने को ऊपर भेजा जाएगा और वहां इसका क्या हश्र होता है, यह पहले नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि मौसम की वजह से उत्पादकों को हानि हुई है और इससे संयंत्र पर बीज का उत्पादन भी प्रभावित होने के आसार हैं। कपूर के अनुसार संयंत्र इस बार मई-जून से शुरू हो जाएगा और इसके लिए मशीनों आदि का निरीक्षण कर लिया गया है।
इस आर्थिक क्षति के साथ ही अबकी पिहानी के बीज संयंत्र पर बीज उत्पादन भी प्रभावित होगा, जिसके सबब में मांग के सापेक्ष पूर्ति नहीं हो पाने के हालात बन रहे हैं। पिहानी क्षेत्र के इटारा इलाके में स्थित उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के बीज विधायन संयंत्र में इस बार कृषक बीज का जो नमूना लेकर आ रहे हैं, उसमें दोष नजर आ रहा है।
हालांकि, उसे स्थानीय स्तर पर तो स्वीकार किया जा रहा, पर इस बात की कोई गारंटी नहीं कि यह बीज उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण संस्थान द्वारा पास ही कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में बीज उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। संयंत्र पर बीज उत्पादकों के रूप में 139 किसान पंजीकृत हैं।
बीज को पास होने में तीन चरणों से गुजरना होता है। पहले खेत का नमूना, फिर प्लांट और इसके बाद तैयार बीज का प्रमाणीकरण संस्थान द्वारा पास किया जाना, पर इस बार खेत से आने वाले नमूने को ही मुश्किल से ही पास किया जा पा रहा है।
बीज उत्पादकों पाल सिंह, नायब सिंह, भोज राज, सुरेश, राज भूपेंद्र सिंह, सतनाम सिंह, नजमुद्दीन, सुनील वाजपेई और संजय आदि ने बताया कि खेत में बीज को भी मौसम के बदलाव से चालीस से पचास फीसदी तक नुकसान हुआ है। यदि चालीस से पैंतालीस फीसदी नुकसान भी मान लिया जाए तो लगभग पांच से छह हजार क्विंटल बीज प्रभावित हो सकता है जिससे बीज उत्पादक किसानों को बीज बर्बादी से तकरीबन अस्सी लाख रुपये की क्षति होने की संभावना है।
इस बाबत सहायक बीज उत्पादक अधिकारी ऋषि कपूर ने बताया कि फिलहाल जो नमूना खेत से आ रहा है, उसमें ऐसे नुकसान नहीं है कि उसे स्थानीय स्तर पर अयोग्य ठहराया जाए। इस नमूने को ऊपर भेजा जाएगा और वहां इसका क्या हश्र होता है, यह पहले नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि मौसम की वजह से उत्पादकों को हानि हुई है और इससे संयंत्र पर बीज का उत्पादन भी प्रभावित होने के आसार हैं। कपूर के अनुसार संयंत्र इस बार मई-जून से शुरू हो जाएगा और इसके लिए मशीनों आदि का निरीक्षण कर लिया गया है।