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इंतजार बरकरार, रिंग रोड कब बनेगा सरकार
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हरदोई। एक लाख से अधिक आबादी के नगरों में रिंग रोड बनाने की योजना सिर्फ योजना बनने तक ही रह गई है। शहर की सबसे बड़ी दरकार रिंग रोड के बनने का आज भी इंतजार है।
रिंग रोड न बनने के कारण राजमार्गों पर दौड़ने वाले वाहनों की कतार, यातायात व्यवस्था को तार तार कर रही है। ट्रैफिक भार लगातार बढ़ रहा है। आलम यह है कि पूरा शहर जाम की समस्या से दो-चार हो रहा है।
इन 10 वर्षों में शहर और आसपास की आबादी बढ़कर तीन लाख से अधिक हो गई है, लेकिन चार मार्गों को शहर के बाहर से रिंग रोड से जोड़ने का सपना सिर्फ सुनहरा ख्वाब बना हुआ है।
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वर्ष 2012 में शासन की ओर से एक लाख से अधिक आबादी वाले नगरों में बाईपास बनाकर प्रमुख मार्गों के बीच रिंग रोड के जरिए जोड़ने की कार्ययोजना मांगी गई थी।
जिसको लेकर छह जुलाई 2012 को पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने बैठक कर रिंग रोड बनाने का खाका तैयार किया था। इसके लिए सर्वे किया गया था।
सर्वे के दौरान लखनऊ रोड से शाहजहांपुर रोड, सीतापुर रोड, पिहानी लखीमपुर रोड को जोड़ने के लिए एवं लखनऊ रोड से सांडी, बावन-फर्रुखाबाद रोड को जोड़ने को बाईपास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
इसके साथ ही सभी सड़काें के चौड़ीकरण का प्रस्ताव भी भेजा गया था। तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री ने एक अक्तूबर 2013 को रिंग रोड जैसे बाईपास के लिए घोषणा कर उम्मीदों को बढ़ा दिया था, लेकिन सड़कों का चौड़ीकरण होता रहा, मगर रिंग रोड नहीं बन सका।
इस बीच रिंग रोड के रूट को लेकर खींचतान शुरू हो गई, तो वहीं प्रमुख राजमार्ग लखनऊ-हरदोई को नेशनल हाईवे घोषित करने से रिंग रोड का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
रिंग रोड के लिए ये थे सुझाव
सीतापुर-बिलराया, पनवारी-कन्नौज मार्ग शहर के नुमाइश चौराहा, कचहरी रोड एवं सदर बाजार से होकर गया है। इसी तरह से लखनऊ-शाहजहांपुर मार्ग भी सिनेमा चौराहा, सोल्जर बोर्ड चौराहा, नुमाइश चौराहा, डीएम चौराहा, पिहानी चुंगी होकर निकलता है।
फर्रुखाबाद-दिल्ली, कानपुर-कन्नौज, नुमाइश चौराहा, सांडी रोड होकर एवं लखीमपुर खीरी, सीतापुर मार्ग जिंदपीर चौराहा रेलवेगंज होकर निकलते हैं। इन सभी प्रमुख मार्गों को बाईपास के जरिए शहर के बाहर रिंग रोड की तरह जोड़ने के सुझाव दिए गए थे,
ताकि शहर के भीतर उन्हीं वाहनों की आवाजाही रहे जिनका शहर में कोई कार्य हो। शेष वाहन एक रूट से दूसरे रूट पर रिंग रोड के जरिए निकल जाएं।
तत्कालीन भाजपा सांसद ने दिया था प्रस्ताव
तत्कालीन भाजपा सांसद अंशुल वर्मा ने लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर रोड को शहर के बाहर खेतुई बालाजी के पास से शहर के बाहर बिलग्राम रोड-सांडी रोड-बावन रोड को जोड़ते हुए कुर्रिया के आगे शाहजहांपुर रोड तक के लगभग
16 किमी के बाईपास का प्रस्ताव एनएचआई के अफसरों को दिया था। इसके साथ ही शाहजहांपुर रोड से सीतापुर रोड को कनेक्ट करते हुए वापस नयागांव के आसपास तक बाईपास बनाने का प्रस्ताव दिया था।
बोले जिम्मेदार
लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर रोड के लिए एनएचआई कार्य शुरू करने जा रहा है। जिले की सीमा में करीब 62 गांवों की भूमि रोड के लिए ली जा रही है। 32 गांवों का भूमि का कार्य पूरा हो चुका है।
शेष गांवों का कार्य भी पूरा किया जा रहा, जिसमें लखनऊ रोड से शाहजहांपुर रोड तक शहर के बाईपास के लिए करीब 13 गांवों की भूमि अवार्ड का कार्य चल रहा।
इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इस रूट के अलावा अन्य किसी राजमार्ग के लिए बाईपास आदि के निर्माण को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है।
डॉ. सदानंद गुप्ता, सिटी मजिस्ट्रेट
लखनऊ-शाहजहांपुर रोड पर शहर का बाईपास जल्द बनना शुरू हो जाएगा, जबकि अन्य राज मार्गों के लिए बाईपास या रिंग रोड को लेकर अफसरों से बात करके आवश्यकतानुसार कार्ययोजना तैयार कराई जाएगी।
- नितिन अग्रवाल, सदर विधायक, मंत्री प्रदेश सरकार
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रिंग रोड न बनने के कारण राजमार्गों पर दौड़ने वाले वाहनों की कतार, यातायात व्यवस्था को तार तार कर रही है। ट्रैफिक भार लगातार बढ़ रहा है। आलम यह है कि पूरा शहर जाम की समस्या से दो-चार हो रहा है।
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इन 10 वर्षों में शहर और आसपास की आबादी बढ़कर तीन लाख से अधिक हो गई है, लेकिन चार मार्गों को शहर के बाहर से रिंग रोड से जोड़ने का सपना सिर्फ सुनहरा ख्वाब बना हुआ है।
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वर्ष 2012 में शासन की ओर से एक लाख से अधिक आबादी वाले नगरों में बाईपास बनाकर प्रमुख मार्गों के बीच रिंग रोड के जरिए जोड़ने की कार्ययोजना मांगी गई थी।
जिसको लेकर छह जुलाई 2012 को पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने बैठक कर रिंग रोड बनाने का खाका तैयार किया था। इसके लिए सर्वे किया गया था।
सर्वे के दौरान लखनऊ रोड से शाहजहांपुर रोड, सीतापुर रोड, पिहानी लखीमपुर रोड को जोड़ने के लिए एवं लखनऊ रोड से सांडी, बावन-फर्रुखाबाद रोड को जोड़ने को बाईपास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।
इसके साथ ही सभी सड़काें के चौड़ीकरण का प्रस्ताव भी भेजा गया था। तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री ने एक अक्तूबर 2013 को रिंग रोड जैसे बाईपास के लिए घोषणा कर उम्मीदों को बढ़ा दिया था, लेकिन सड़कों का चौड़ीकरण होता रहा, मगर रिंग रोड नहीं बन सका।
इस बीच रिंग रोड के रूट को लेकर खींचतान शुरू हो गई, तो वहीं प्रमुख राजमार्ग लखनऊ-हरदोई को नेशनल हाईवे घोषित करने से रिंग रोड का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
रिंग रोड के लिए ये थे सुझाव
सीतापुर-बिलराया, पनवारी-कन्नौज मार्ग शहर के नुमाइश चौराहा, कचहरी रोड एवं सदर बाजार से होकर गया है। इसी तरह से लखनऊ-शाहजहांपुर मार्ग भी सिनेमा चौराहा, सोल्जर बोर्ड चौराहा, नुमाइश चौराहा, डीएम चौराहा, पिहानी चुंगी होकर निकलता है।
फर्रुखाबाद-दिल्ली, कानपुर-कन्नौज, नुमाइश चौराहा, सांडी रोड होकर एवं लखीमपुर खीरी, सीतापुर मार्ग जिंदपीर चौराहा रेलवेगंज होकर निकलते हैं। इन सभी प्रमुख मार्गों को बाईपास के जरिए शहर के बाहर रिंग रोड की तरह जोड़ने के सुझाव दिए गए थे,
ताकि शहर के भीतर उन्हीं वाहनों की आवाजाही रहे जिनका शहर में कोई कार्य हो। शेष वाहन एक रूट से दूसरे रूट पर रिंग रोड के जरिए निकल जाएं।
तत्कालीन भाजपा सांसद ने दिया था प्रस्ताव
तत्कालीन भाजपा सांसद अंशुल वर्मा ने लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर रोड को शहर के बाहर खेतुई बालाजी के पास से शहर के बाहर बिलग्राम रोड-सांडी रोड-बावन रोड को जोड़ते हुए कुर्रिया के आगे शाहजहांपुर रोड तक के लगभग
16 किमी के बाईपास का प्रस्ताव एनएचआई के अफसरों को दिया था। इसके साथ ही शाहजहांपुर रोड से सीतापुर रोड को कनेक्ट करते हुए वापस नयागांव के आसपास तक बाईपास बनाने का प्रस्ताव दिया था।
बोले जिम्मेदार
लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर रोड के लिए एनएचआई कार्य शुरू करने जा रहा है। जिले की सीमा में करीब 62 गांवों की भूमि रोड के लिए ली जा रही है। 32 गांवों का भूमि का कार्य पूरा हो चुका है।
शेष गांवों का कार्य भी पूरा किया जा रहा, जिसमें लखनऊ रोड से शाहजहांपुर रोड तक शहर के बाईपास के लिए करीब 13 गांवों की भूमि अवार्ड का कार्य चल रहा।
इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इस रूट के अलावा अन्य किसी राजमार्ग के लिए बाईपास आदि के निर्माण को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है।
डॉ. सदानंद गुप्ता, सिटी मजिस्ट्रेट
लखनऊ-शाहजहांपुर रोड पर शहर का बाईपास जल्द बनना शुरू हो जाएगा, जबकि अन्य राज मार्गों के लिए बाईपास या रिंग रोड को लेकर अफसरों से बात करके आवश्यकतानुसार कार्ययोजना तैयार कराई जाएगी।
- नितिन अग्रवाल, सदर विधायक, मंत्री प्रदेश सरकार