{"_id":"621fad00eb8fdb4d7141b7fa","slug":"ukraine-hardoi-news-knp6834701112","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्लाह का शुक्र है... बेटा महफूज है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्लाह का शुक्र है... बेटा महफूज है
विज्ञापन
फोटो-38 यूक्रेन से घर वापस आने पर जय को दुलार करती दादी
- फोटो : HARDOI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई। रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच से महफूज घर लौटे फरहान के वालिद की आंखें खुशी के आंसुओं से छलछला गईं। घर के हर सदस्य ने ऊपर वाले का शुक्र अदा किया और फरहान को सीने से लगाकर लंबी उम्र की दुआ दी। परिजनों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर फरहान की वापसी की खुशी साझा की।
कासिमपुर थाने के ग्राम हरदलमऊ निवासी एमबीबीएस के छात्र फरहान बुधवार सुबह पांच बजे अपने घर वापस आ गया। वह यूक्रेन के रुस्का स्टेट में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। बेटे के महफूज घर पहुुंचने पर फरहान के वालिदैन ने शुक्राने की दो रकात नमाज अदा कर अपने रब का शुक्रिया अदा किया। आपरेशन गंगा के तहत चलाई जा रही फ्लाइट की प्रशंसा की। घर लौटे फरहान ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रवेश लिया था। वर्ष 2020 में कोरोना के समय पांच महीने घर पर रुक कर पढ़ाई की। रूस व यूक्रेन युद्ध के चलते घर आना पड़ा है। यूक्रेन में माहौल लगातार खराब होता जा रहा है। बताया कि शनिवार को यूक्रेन से बस द्वारा रोमानिया स्वयं के खर्च से आया। फिर रोमानिया से फ्लाइट से मंगलवार को दोपहर दिल्ली पहुंचा। कार से बुधवार सुबह अपने गांव हरदलमऊ आ गया। फरहान के घर में दाखिल होते ही रिश्तेदार और पड़ोसी भी मिलने के लिए घर पहुंच गए। फरहान के मुताबिक उसकी यूनिवर्सिटी फिलहाल सुरक्षित जोन में थी। यूनिवर्सिटी से 500 किलोमीटर दूर हमले हो रहे थे।
संडीला। जहाज कोठी निवासी मेडिकल छात्र जय सक्सेना भी सुबह पांच बजे संडीला अपने घर पहुंच गया। जय ने बताया कि 24 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी पर हमला हुआ तो उन लोगों को टरनोपिल में बने अंडरग्राउंड क्षेत्र में कर दिया गया। वहां से 300 किमी की दूरी पर थे। 25 फरवरी को हमारे साथ 11 भारतीय छात्रों के साथ वहीं पर एक गाड़ी बुक की गई। रोमानिया के बॉर्डर से 10 किलोमीटर पहले ही उनको छोड़ दिया। बॉर्डर तक पैदल जाना पड़ा। बॉर्डर पर आठ घंटे बाद रोमानिया जाने को मिला। इसके बाद दूतावास के अधिकारियों ने हम लोगों को एक होटल में रखा। 27 फरवरी की बस से बुचारेस्ट एयरपोर्ट लेकर गए। एक मार्च की रात दिल्ली के लिए फ्लाइट से निकले। फ्लाइट में 240 लोग सवार थे। एक मार्च दोपहर दो बजे हम लोग दिल्ली आ गये। पिता राजेश ने बताया कि जब से युद्ध शुरू हुआ था तब से हम लोगों की नीद उड़ी थी। (संवाद)
विज्ञापन
पिहानी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव के पुत्र प्रत्यक्ष श्रीवास्तव समेत 200 छात्र यूक्रेन- रोमानिया बॉर्डर पर शरणार्थी शिविर से दिल्ली सुरक्षित वापस लौट आए हैं। प्रत्यक्ष ने परिजनों को बताया कि डेढ़ हजार छात्रों ने दो दिन यूक्रेन में ही रोमानिया बॉर्डर पर स्थित एक फ्यूल स्टेशन पर गुजारे। इसके बाद उन्हें एक बस से सीमा पार रोमानिया में बनाए गए शरणार्थी शिविर में पनाह दी गई। यहां एक रात के बाद अगले दिन दो सौ छात्र-छात्राओं को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। वह लोग सकुशल दिल्ली पहुंच गए हैं। जल्द ही वह घर पहुंचेंगे। (संवाद)
विज्ञापन
कासिमपुर थाने के ग्राम हरदलमऊ निवासी एमबीबीएस के छात्र फरहान बुधवार सुबह पांच बजे अपने घर वापस आ गया। वह यूक्रेन के रुस्का स्टेट में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। बेटे के महफूज घर पहुुंचने पर फरहान के वालिदैन ने शुक्राने की दो रकात नमाज अदा कर अपने रब का शुक्रिया अदा किया। आपरेशन गंगा के तहत चलाई जा रही फ्लाइट की प्रशंसा की। घर लौटे फरहान ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रवेश लिया था। वर्ष 2020 में कोरोना के समय पांच महीने घर पर रुक कर पढ़ाई की। रूस व यूक्रेन युद्ध के चलते घर आना पड़ा है। यूक्रेन में माहौल लगातार खराब होता जा रहा है। बताया कि शनिवार को यूक्रेन से बस द्वारा रोमानिया स्वयं के खर्च से आया। फिर रोमानिया से फ्लाइट से मंगलवार को दोपहर दिल्ली पहुंचा। कार से बुधवार सुबह अपने गांव हरदलमऊ आ गया। फरहान के घर में दाखिल होते ही रिश्तेदार और पड़ोसी भी मिलने के लिए घर पहुंच गए। फरहान के मुताबिक उसकी यूनिवर्सिटी फिलहाल सुरक्षित जोन में थी। यूनिवर्सिटी से 500 किलोमीटर दूर हमले हो रहे थे।
विज्ञापन
संडीला। जहाज कोठी निवासी मेडिकल छात्र जय सक्सेना भी सुबह पांच बजे संडीला अपने घर पहुंच गया। जय ने बताया कि 24 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी पर हमला हुआ तो उन लोगों को टरनोपिल में बने अंडरग्राउंड क्षेत्र में कर दिया गया। वहां से 300 किमी की दूरी पर थे। 25 फरवरी को हमारे साथ 11 भारतीय छात्रों के साथ वहीं पर एक गाड़ी बुक की गई। रोमानिया के बॉर्डर से 10 किलोमीटर पहले ही उनको छोड़ दिया। बॉर्डर तक पैदल जाना पड़ा। बॉर्डर पर आठ घंटे बाद रोमानिया जाने को मिला। इसके बाद दूतावास के अधिकारियों ने हम लोगों को एक होटल में रखा। 27 फरवरी की बस से बुचारेस्ट एयरपोर्ट लेकर गए। एक मार्च की रात दिल्ली के लिए फ्लाइट से निकले। फ्लाइट में 240 लोग सवार थे। एक मार्च दोपहर दो बजे हम लोग दिल्ली आ गये। पिता राजेश ने बताया कि जब से युद्ध शुरू हुआ था तब से हम लोगों की नीद उड़ी थी। (संवाद)
विज्ञापन
पिहानी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेंद्र श्रीवास्तव के पुत्र प्रत्यक्ष श्रीवास्तव समेत 200 छात्र यूक्रेन- रोमानिया बॉर्डर पर शरणार्थी शिविर से दिल्ली सुरक्षित वापस लौट आए हैं। प्रत्यक्ष ने परिजनों को बताया कि डेढ़ हजार छात्रों ने दो दिन यूक्रेन में ही रोमानिया बॉर्डर पर स्थित एक फ्यूल स्टेशन पर गुजारे। इसके बाद उन्हें एक बस से सीमा पार रोमानिया में बनाए गए शरणार्थी शिविर में पनाह दी गई। यहां एक रात के बाद अगले दिन दो सौ छात्र-छात्राओं को दिल्ली के लिए रवाना किया गया। वह लोग सकुशल दिल्ली पहुंच गए हैं। जल्द ही वह घर पहुंचेंगे। (संवाद)

फोटो-26- युक्रेन से घर वापस आने पर फरहान के परिजन लड्डू खिलाते- फोटो : HARDOI