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हरदोई : रोडवेज के सफर के लिए घंटों खड़े रहते यात्री
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फोटो-05- बस के इंतजार में बैठे यात्री
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। सांडी, मल्लावां, कछौना व संडीला सहित कई जगह बस स्टैंड व प्रतीक्षालय न होने से यात्री परेशान हैं। बसों के इंतजार में उन्हें घंटों धूप में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। ये हाल तब है जब इन प्रमुख स्थानों से हरदोई, फर्रुखाबाद, कानपुर, लखनऊ और दिल्ली जाने के लिए हजारों यात्री रोजाना आवागमन करते हैं। यात्रियों का कहना है कि चालक भी मनमानी करते हैं। कहीं भी बस रोकते हैं और सवारियों को बैठाने से भी मना कर देते हैं। रोडवेज यात्री सुविधाओं देने का दावा करता है लेकिन इस समस्या पर ध्यान नहीं है।
फर्रुखाबाद-हरपालपुर के यात्रियों को नहीं बैठाते चालक
सांडी। मुख्य बाजार होने के बाद भी यहां से पर्याप्त बसें नहीं चलती हैं। पहले सांडी होकर दिल्ली के लिए आठ बसें चलतीं थी। पिछले कुछ समय से सिर्फ तीन बसें चल रही हैं। इसके अलावा बुद्ध विहार की चार और अलीगढ़ डिपो की दो बसें चलती हैं। रोडवेज बसों में चालक सिर्फ दिल्ली की सवारियां बैठाते हैं। ऐसे में फर्रुखाबाद, हरपालपुर और अन्य जगह आने-जाने वाले यात्रियों को डग्गामार वाहनों से सफर करना पड़ता है। दिल्ली के लिए रोजाना कस्बा और आसपास के गांवों से सैकड़ों यात्री आवाजाही करते हैं। दिल्ली की बसें काफी देरी से आती हैं। यात्रियों के लिए यहां पर प्रतीक्षालय नहीं है।
न प्रतीक्षालय न स्टॉपेज तय
मल्लावां। नगर पालिका क्षेत्र की करीब 55 हजार आबादी है। मल्लावां से हरदोई, उन्नाव, कानपुर, कन्नौज, दिल्ली, संडीला, लखनऊ, बांगरमऊ, बिल्हौर समेत कई स्थानों के लिए रोडवेज बसों का संचालन होता है। प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। इसके बाद भी यहां प्रतीक्षालय नहीं है। इसके कारण यात्रियों को बसों के इंतजार में घंटों परेशान होना पड़ता है। बसों के रुकने का कोई निश्चित स्टापेज न होने से चालक मनमानी करते हैं। यात्रियों को बस पकड़ने के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है।
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कानपुर के लिए सिर्फ एक रोडवेज बस
संडीला। कस्बे में औद्योगिक क्षेत्र होने से बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं। यहां अन्य जिलों के लोगों का भी आवागमन होता है। सबसे अधिक कानपुर के लिए आवाजाही होती है। इसके बाद भी यहां से कानपुर के लिए महज एक रोडवेज बस संचालित है। बस सुबह आठ बजे निकलती है, जो खचाखच भरी रहती है। इसके बाद लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय बना था लेकिन वहां चालक बसों को नहीं रोकते हैं।
यहां बस अड्डा दूर की बात
कछौना। हरदोई लखनऊ मार्ग पर कछौना कस्बे से होकर 24 घंटे लखनऊ, रायबरेली, इलाहाबाद, शाहजहांपुर, बरेली से लेकर दिल्ली तक के लिए रोडवेज बसें गुजरती हैं। इन बसों से आसपास के करीब 100 गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। इनमें दैनिक यात्रियों के अलावा छात्र, व्यापारी व कारोबारी शामिल हैं। लोगों का कहना है कि बस अड्डा तो दूर की बात, प्रतीक्षालय तक नहीं बना है।
यात्रियों ने बताई परेशानी
कछौना कस्बे के स्टेशन रोड निवासी प्रतीक गुप्ता का मशीनरी स्टोर है। उन्होंने बताया कि वह हफ्ते में तीन से चार दिन लखनऊ जाते हैं। यात्री प्रतीक्षालय न होने से धूप में परेशान होना पड़ता है। कस्बे के अनूप सिंह का भी अक्सर लखनऊ व हरदोई आना-जाना होता है। उन्होंने बताया कि गर्मी, बरसात, सर्दी हर मौसम में परेशानी होती है। ज्योति अग्रवाल का कहना है कि खड़े होकर ही बसों का इंतजार करना पड़ता है।
सभी प्रमुख स्थानों पर यात्री प्रतीक्षालय बनवाने के लिए प्रयास जारी हैं। प्राइवेट संस्थाओं के सहयोग से ये कार्य कराने के लिए वार्ता की जा रही है।
- आरएस पांडेय, एआरएम, हरदोई रीजन
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फर्रुखाबाद-हरपालपुर के यात्रियों को नहीं बैठाते चालक
सांडी। मुख्य बाजार होने के बाद भी यहां से पर्याप्त बसें नहीं चलती हैं। पहले सांडी होकर दिल्ली के लिए आठ बसें चलतीं थी। पिछले कुछ समय से सिर्फ तीन बसें चल रही हैं। इसके अलावा बुद्ध विहार की चार और अलीगढ़ डिपो की दो बसें चलती हैं। रोडवेज बसों में चालक सिर्फ दिल्ली की सवारियां बैठाते हैं। ऐसे में फर्रुखाबाद, हरपालपुर और अन्य जगह आने-जाने वाले यात्रियों को डग्गामार वाहनों से सफर करना पड़ता है। दिल्ली के लिए रोजाना कस्बा और आसपास के गांवों से सैकड़ों यात्री आवाजाही करते हैं। दिल्ली की बसें काफी देरी से आती हैं। यात्रियों के लिए यहां पर प्रतीक्षालय नहीं है।
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न प्रतीक्षालय न स्टॉपेज तय
मल्लावां। नगर पालिका क्षेत्र की करीब 55 हजार आबादी है। मल्लावां से हरदोई, उन्नाव, कानपुर, कन्नौज, दिल्ली, संडीला, लखनऊ, बांगरमऊ, बिल्हौर समेत कई स्थानों के लिए रोडवेज बसों का संचालन होता है। प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। इसके बाद भी यहां प्रतीक्षालय नहीं है। इसके कारण यात्रियों को बसों के इंतजार में घंटों परेशान होना पड़ता है। बसों के रुकने का कोई निश्चित स्टापेज न होने से चालक मनमानी करते हैं। यात्रियों को बस पकड़ने के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है।
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कानपुर के लिए सिर्फ एक रोडवेज बस
संडीला। कस्बे में औद्योगिक क्षेत्र होने से बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं। यहां अन्य जिलों के लोगों का भी आवागमन होता है। सबसे अधिक कानपुर के लिए आवाजाही होती है। इसके बाद भी यहां से कानपुर के लिए महज एक रोडवेज बस संचालित है। बस सुबह आठ बजे निकलती है, जो खचाखच भरी रहती है। इसके बाद लोगों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय बना था लेकिन वहां चालक बसों को नहीं रोकते हैं।
यहां बस अड्डा दूर की बात
कछौना। हरदोई लखनऊ मार्ग पर कछौना कस्बे से होकर 24 घंटे लखनऊ, रायबरेली, इलाहाबाद, शाहजहांपुर, बरेली से लेकर दिल्ली तक के लिए रोडवेज बसें गुजरती हैं। इन बसों से आसपास के करीब 100 गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। इनमें दैनिक यात्रियों के अलावा छात्र, व्यापारी व कारोबारी शामिल हैं। लोगों का कहना है कि बस अड्डा तो दूर की बात, प्रतीक्षालय तक नहीं बना है।
यात्रियों ने बताई परेशानी
कछौना कस्बे के स्टेशन रोड निवासी प्रतीक गुप्ता का मशीनरी स्टोर है। उन्होंने बताया कि वह हफ्ते में तीन से चार दिन लखनऊ जाते हैं। यात्री प्रतीक्षालय न होने से धूप में परेशान होना पड़ता है। कस्बे के अनूप सिंह का भी अक्सर लखनऊ व हरदोई आना-जाना होता है। उन्होंने बताया कि गर्मी, बरसात, सर्दी हर मौसम में परेशानी होती है। ज्योति अग्रवाल का कहना है कि खड़े होकर ही बसों का इंतजार करना पड़ता है।
सभी प्रमुख स्थानों पर यात्री प्रतीक्षालय बनवाने के लिए प्रयास जारी हैं। प्राइवेट संस्थाओं के सहयोग से ये कार्य कराने के लिए वार्ता की जा रही है।
- आरएस पांडेय, एआरएम, हरदोई रीजन

फोटो-12- संडीला बस प्रतीक्षालय- फोटो : HARDOI