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तीन चीनी मिलों पर किसानों का 259 करोड़ रुपया बकाया
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कोरोना संकटकाल में किसानों को भी मार झेलनी पड़ रही है। जैसे-तैसे किसानों ने खेत में तैयार की गई गन्ने की फसल चीनी मिलों को बेच तो दी,
लेकिन किसानों का अब भी लगभग 259 करोड़ रुपये जिले की तीन चीनी मिलों पर बाकी है।
जनपद में तीन चीनी मिलें हरियावां, लोनी और रुपापुर में है। इन तीनों ही चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का कुल 258 करोड़ 90 लाख 10 हजार रुपये बाकी हैं।
दरअसल नियम तो यह है कि गन्ने की तौल के 14 दिन के अंदर इसका भुगतान संबंधित किसान के बैंक खाते में कर दिया जाना चाहिए,
लेकिन इस नियम का पालन नहीं हो पाता। लोनी चीनी मिल ने 19 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किसानों को कर देने का दावा किया है तो रुपापुर और हरियावां चीनी मिल ने 17 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किया है।
तीनों चीनी मिलों के जिम्मेदारों का दावा है कि किसानों के बैंक खातों में एक हजार 38 करोड़ 16 लाख 49 हजार रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।
गन्ने को कैशक्रॉप कहा जाता है। जनपद में गन्ने की उत्पादकता भी बढ़ी है। वर्ष 2018-19 के पेराई सत्र में जनपद में 755.32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उत्पादकता थी जो बीते पेराई सत्र (2019-20) में बढ़कर 783.20 क्विंटल हो गई है।
कहीं न कहीं इससे किसान भी खुश हैं, लेकिन असली खुशी तभी है जब किसानों को इसका भुगतान भी समय से मिल जाए।
जनपद में 1,07,998 गन्ना किसान हैं। तकरीबन 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती जिले में होती है।
जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन का कहना है कि गन्ना किसानों का भुगतान प्राथमिकता से कराया जा रहा है।
किसानों के बैंक खातों में लगातार चीनी मिलें भुगतान भेज रहीं हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही बकाया भुगतान भी किसानों के खातों में पहुंच जाएगा।
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रामपुर अठगवां गांव निवासी विमल कुमार गन्ना किसान हैं। वह कहते हैं कि चीनी मिल को अपना गन्ना बेचा था।
अभी लगभग गन्ना मूल्य का दो लाख रुपये का भुगतान बाकी है। लॉकडाउन में समस्याएं बढ़ीं हैं, ऐसे में चीनी मिलों को गन्ना किसानों का भुगतान जल्द करना चाहिए।
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पिहानी कस्बे के मोहल्ला नागर निवासी इस्लामुद्दीन खां कहते हैं कि लगभग डेढ़ माह पहले चीनी मिल में गन्ना बेचा था।
बताया गया था कि 15 दिन में भुगतान हो जाएगा, लेकिन अभी तक भुगतान खाते में नहीं आया। भुगतान में और विलंब हुआ तो परिवार चलाने में भी दिक्कत आएगी। कम से कम किसानों का भुगतान प्राथमिकता पर करना चाहिए।
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लेकिन किसानों का अब भी लगभग 259 करोड़ रुपये जिले की तीन चीनी मिलों पर बाकी है।
जनपद में तीन चीनी मिलें हरियावां, लोनी और रुपापुर में है। इन तीनों ही चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का कुल 258 करोड़ 90 लाख 10 हजार रुपये बाकी हैं।
दरअसल नियम तो यह है कि गन्ने की तौल के 14 दिन के अंदर इसका भुगतान संबंधित किसान के बैंक खाते में कर दिया जाना चाहिए,
लेकिन इस नियम का पालन नहीं हो पाता। लोनी चीनी मिल ने 19 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किसानों को कर देने का दावा किया है तो रुपापुर और हरियावां चीनी मिल ने 17 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान किया है।
तीनों चीनी मिलों के जिम्मेदारों का दावा है कि किसानों के बैंक खातों में एक हजार 38 करोड़ 16 लाख 49 हजार रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है।
गन्ने को कैशक्रॉप कहा जाता है। जनपद में गन्ने की उत्पादकता भी बढ़ी है। वर्ष 2018-19 के पेराई सत्र में जनपद में 755.32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उत्पादकता थी जो बीते पेराई सत्र (2019-20) में बढ़कर 783.20 क्विंटल हो गई है।
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कहीं न कहीं इससे किसान भी खुश हैं, लेकिन असली खुशी तभी है जब किसानों को इसका भुगतान भी समय से मिल जाए।
जनपद में 1,07,998 गन्ना किसान हैं। तकरीबन 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती जिले में होती है।
जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन का कहना है कि गन्ना किसानों का भुगतान प्राथमिकता से कराया जा रहा है।
किसानों के बैंक खातों में लगातार चीनी मिलें भुगतान भेज रहीं हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही बकाया भुगतान भी किसानों के खातों में पहुंच जाएगा।
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रामपुर अठगवां गांव निवासी विमल कुमार गन्ना किसान हैं। वह कहते हैं कि चीनी मिल को अपना गन्ना बेचा था।
अभी लगभग गन्ना मूल्य का दो लाख रुपये का भुगतान बाकी है। लॉकडाउन में समस्याएं बढ़ीं हैं, ऐसे में चीनी मिलों को गन्ना किसानों का भुगतान जल्द करना चाहिए।
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पिहानी कस्बे के मोहल्ला नागर निवासी इस्लामुद्दीन खां कहते हैं कि लगभग डेढ़ माह पहले चीनी मिल में गन्ना बेचा था।
बताया गया था कि 15 दिन में भुगतान हो जाएगा, लेकिन अभी तक भुगतान खाते में नहीं आया। भुगतान में और विलंब हुआ तो परिवार चलाने में भी दिक्कत आएगी। कम से कम किसानों का भुगतान प्राथमिकता पर करना चाहिए।