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बाणेश्वर में प्रकटे थे तीन बार भोले

Fri, 14 Aug 2015 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई Updated Fri, 14 Aug 2015 12:04 AM IST
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They were three times naive in Baneshwar Prkte

बाणासुर की राजधानी शोणितपुर में भगवान शिव साक्षात

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तीन बार प्रकट हुए थे। यहां बाणासुर के आराध्य भोलेनाथ त्रिदेव के रूप में स्थापित हैं। असुर बाणासुर की इस नगरी का पुराणों में कई जगह उल्लेख है। बताते है कि इस मिट्टी पर कभी एक ओर राजधर्म के लिए भगवान श्रीकृष्ण तो दूसरी ओर ध्वज की रक्षा के लिए वचनबद्ध भगवान शिव रणक्षेत्र में स्वयं सामने थे।

बाणासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे तीन बार प्रकट होकर वरदान दिए थे। पौराणिक महत्व के शोणितपुर नामक स्थान का नाम वर्तमान में सोनिकपुर है। यहां अति प्राचीन तीन दिव्य शिवलिंग स्थित हैं। इसकी पौराणिकता शिव पुराण, हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

यहां नैमिषारण्य की चौरासी कोसीय परिक्रमा का पड़ाव स्थल था, पर वर्तमान में परिक्रमार्थी नैमिषारण्य से चलकर हर्रैया गांव में पड़ाव करके आगे बढ़ जाते हैं, जिससे यह अति प्राचीन स्थल परिक्रमा पड़ाव से वंचित रह जाता है। बुजुर्गों के अनुसार भक्त प्रहलाद के पुत्र विरोचन के पुत्र राजा बलि के पुत्र बाणासुर हुए।

परम शिवभक्त बाणासुर के राज्य की राजधानी शोणितपुर जो अब सोनिकपुर के रूप में जानी जाती है। यह वहीं स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को बाणासुर की पुत्री ऊषा द्वारा बंधक बनाने पर भगवान कृष्ण ने भ्राता बलराम सहित भारी सेना के साथ भीषण संग्राम बाणासुर के साथ किया था।

बाणासुर की ओर से भगवान शिव ने श्रीकृष्ण से युद्ध किया था। युद्ध में परास्त होने और सहस्त्राबाहु को गंवाने के बाद अहम शांत होने पर बाणासुर ने भगवान शिव से वरदान मांगा कि वह त्रिदेव के रूप में यहां विराजमान हों। वरदान के बाद से भगवान शिव त्रिदेव के रूप में आज भी तीन शिवलिंगों के रूप में विराजमान हैं।

मंदिर समिति के प्रबंधक रामप्रकाश अस्थाना बताते हैं कि यहां पुरातत्व विभाग द्वारा तीनों शिवलिंगों की महीनों खुदाई करवाई गई, पर ओर-छोर न मिलने पर पुरातत्व विभाग को वापस लौटना पड़ा था।

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