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Hardoi News: जिले में कैंसर के 1,002 मरीज, डे केयर सेंटर में दो माह से एक भी नहीं पहुंचा

Thu, 20 Aug 2026 10:59 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 10:59 PM IST
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There are 1,002 cancer patients in the district, yet not a single one has visited the day-care center in the last two months.
फोटो- 19- कैंसर डे-केयर सेंटर में खाली पड़े मरीजों के बेड। संवाद  
हरदोई। कैंसर रोगियों को राहत देने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेज में शुरू किया गया कैंसर डे केयर सेंटर दो माह बाद भी सन्नाटे में है। दो माह में एक भी मरीज यहां न तो परामर्श के लिए आया और न ही उपचार के लिए। दरअसल हकीकत यह भी है कि ज्यादातर लोगों को कैंसर डे केयर सेंटर के बारे में जानकारी ही नहीं है। इससे इतर कुछ लोग यहां मिलने वाली सुविधा पर अब भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। कुल मिलाकर बड़ी उम्मीदों से शुरू हुआ सेंटर अब ताले में ही बंद रहता है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ो के मुताबिक जनपद में कैंसर के 1,002 मरीज हैं। इनमें से ओरल कैंसर के 604, सर्वाइकल कैंसर 187 और ब्रेस्ट कैंसर के 211 मरीज हैं। जिले में कैंसर के मरीजों के उपचार के लिए कोई व्यवस्था न होने पर ज्यादातर मरीज लखनऊ या उससे भी बड़े शहरों का रुख करते हैं। कई बार उच्च संस्थानों में उपचार के बाद कीमो थैरेपी समेत अन्य उपचार करा लेने की सलाह दी जाती है।
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साथ ही प्राथमिक स्तर पर पता चल जाने पर उपचार बेहतर मिल जाए तो स्वस्थ होने की संभावनाएं भी ज्यादा होती हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज के ओपीडी भवन की तीसरी मंजिल पर कैंसर डे केयर सेंटर बनाया गया है। दो माह पहले बनाए गए इस सेंटर में दो बेड पड़े हैं। संचालन के लिए बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मेधा गुप्ता को नोडल अधिकारी भी बनाया गया है।
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विशेष प्रशिक्षण लेकर आए चिकित्सक पर अब भी भरोसे का अभाव
कैंसर डे-केयर सेंटर का संचालन सुचारू रूप से करने के लिए जिले के विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को राज्य स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें दो विशेषज्ञ चिकित्सकों में महिला रोग विभागाध्यक्ष सहायक आचार्य डॉ. मधुलिका शुक्ला व सर्जरी विशेषज्ञ सहायक आचार्य डॉ. अरविंद कुमार शर्मा शामिल हैं। नर्सिंग स्टाफ में ललिकेश सिंह, रामदेव पारिक व रामदेव प्रजापति को लखनऊ में कैंसर के इलाज और उसकी बारीकियों से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बावजूद इसके मरीजों का यहां न पहुंचना कहीं न कहीं भरोसे का अभाव दर्शाता है। दरअसल मेडिकल कॉलेज को लेकर अभी भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं जिनमें चिकित्सकों की लापरवाही की चर्चा आए दिन सामने आती है।


सेंटर के संचालन काे दी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी, नतीजा सिफर
कैंसर डे-केयर सेंटर के लिए स्टाफ की तैनाती की जा चुकी है। एनएचएम के अंतर्गत पहले से ही कार्यरत कर्मियों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। इसमें जिला सलाहकार क्वालिटी एश्योरेंस डॉ. दिलीप जायसवाल को समन्वयक, अर्श काउंसलर मो. शफी खान को सेंटर में काउंसलर और एनसीडी क्लीनिक के डीआईओ प्रशांति मोहन को डाटा मैनेजर बनाया गया है। इसके अतिरिक्त फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नियुक्त कर दिया गया है। बावजूद इसके मरीजाें के न आने से नतीजा सिफर है।



कैंसर डे-केयर सेंटर के डॉक्टर और स्टाफ को कहा जा चुका है कि वह सभी विभागाध्यक्षों से बात कर सेंटर की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं और मरीजों को सुविधा का लाभ दें। मरीज यहां आएं तो उन्हें भरोसा भी हो जाएगा। यहां के चिकित्सक भी विशेष प्रशिक्षण लेकर आए हैं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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