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Hardoi News: बैराजों के पानी से नदियों का जलस्तर बढ़ा, शाहाबाद में फसलें डूबीं
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शाहाबाद/पाली/बिलग्राम। बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी से यहां पर नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है।
शाहाबाद में सुखेता नदी में पानी कम नहीं हुआ है। जनजीवन प्रभावित होने के साथ ही फसलें भी डूबीं हैं। करीब 50,000 से अधिक आबादी का शर्मा और मिठनापुर गांव के पास पुल डूबने से आवागमन ठप हो गया है। शाहाबाद के प्रभावित गांवों में अभी तक कोई राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाई है।
शाहाबाद में सुखेता नदी में आई बाढ़ से प्रभावित सात गांव में करीब 100 बीघा से अधिक गन्ना और धान आदि की फसल को नुकसान हुआ है। तहसील की तरफ से प्रभावित लोगों को अभी तक राहत कार्य शुरू नहीं किया गया है। हालत यह है मिठनापुर से शर्मा गांव तक चारों तरफ पानी नजर आ रहा है। बाढ़ प्रभावित आधा दर्जन लोग अपने घरों में फंसे हुए है। इन लोगों के सामने खाने-पीने का संकट हो गया है। शर्मा गांव में पुल डूब गया है। वहीं मिठनापुर में पुल के ऊपर पानी की तेज धार चल रही है।
बुधवार को क्षेत्रीय लेखपाल अंकित कुमार मिठनापुर में बाढ़ का आंकलन करने गए, लेकिन भारी जलभराव के चलते वह गांव तक नही पहुंच सके और लोगों का हालचाल भी न जान सके। बताया कि जलभराव वाला क्षेत्र तराई का है, फिर भी फसल के नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। तहसील स्तर से अभी तक बाढ़ से प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है। आवागमन पूरी तरह से ठप है। एसडीएम अंकित त्रिपाठी ने बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव उमरिया धनी, उमरिया कैथानी, हसुआ आदि गांवों में तैयारी का जायजा लिया। तहसीलदार संध्या यादव, नायब तहसीलदार संतोष कुशवाहा आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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बिलग्राम क्षेत्र के गंगा कटरी के इलाके में गंगा नदी का पानी बढ़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल गांव बस्तियों और फसलों की ओर पानी नहीं बढ़ा है। बुधवार को बारिश होने के चलते जगह-जगह पानी भर गया है। बाढ़ जैसे हालात अभी नहीं है। जिससे जनजीवन प्रभावित हो। कटरी इलाके के लोगों का कहना है कि अगर तेजी से पानी बढ़ेगा तो दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है।
पाली क्षेत्र में गर्रा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गावों कहरकोला, बाबरपुर, बैजूपुर, केवलपुर, धर्मपुर, उमरिया आदि गावों के ग्रामीणों में खौफ पैदा हो गया है। हालांकि अभी बाढ़ जैसी कोई स्थित नहीं है। अभी कोई कटान नहीं हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि इसी तरह से गर्रा के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई तो आने वाले समय में समस्या होगी।
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शाहाबाद में सुखेता नदी में पानी कम नहीं हुआ है। जनजीवन प्रभावित होने के साथ ही फसलें भी डूबीं हैं। करीब 50,000 से अधिक आबादी का शर्मा और मिठनापुर गांव के पास पुल डूबने से आवागमन ठप हो गया है। शाहाबाद के प्रभावित गांवों में अभी तक कोई राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाई है।
शाहाबाद में सुखेता नदी में आई बाढ़ से प्रभावित सात गांव में करीब 100 बीघा से अधिक गन्ना और धान आदि की फसल को नुकसान हुआ है। तहसील की तरफ से प्रभावित लोगों को अभी तक राहत कार्य शुरू नहीं किया गया है। हालत यह है मिठनापुर से शर्मा गांव तक चारों तरफ पानी नजर आ रहा है। बाढ़ प्रभावित आधा दर्जन लोग अपने घरों में फंसे हुए है। इन लोगों के सामने खाने-पीने का संकट हो गया है। शर्मा गांव में पुल डूब गया है। वहीं मिठनापुर में पुल के ऊपर पानी की तेज धार चल रही है।
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बुधवार को क्षेत्रीय लेखपाल अंकित कुमार मिठनापुर में बाढ़ का आंकलन करने गए, लेकिन भारी जलभराव के चलते वह गांव तक नही पहुंच सके और लोगों का हालचाल भी न जान सके। बताया कि जलभराव वाला क्षेत्र तराई का है, फिर भी फसल के नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। तहसील स्तर से अभी तक बाढ़ से प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई है। आवागमन पूरी तरह से ठप है। एसडीएम अंकित त्रिपाठी ने बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव उमरिया धनी, उमरिया कैथानी, हसुआ आदि गांवों में तैयारी का जायजा लिया। तहसीलदार संध्या यादव, नायब तहसीलदार संतोष कुशवाहा आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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बिलग्राम क्षेत्र के गंगा कटरी के इलाके में गंगा नदी का पानी बढ़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल गांव बस्तियों और फसलों की ओर पानी नहीं बढ़ा है। बुधवार को बारिश होने के चलते जगह-जगह पानी भर गया है। बाढ़ जैसे हालात अभी नहीं है। जिससे जनजीवन प्रभावित हो। कटरी इलाके के लोगों का कहना है कि अगर तेजी से पानी बढ़ेगा तो दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है।
पाली क्षेत्र में गर्रा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गावों कहरकोला, बाबरपुर, बैजूपुर, केवलपुर, धर्मपुर, उमरिया आदि गावों के ग्रामीणों में खौफ पैदा हो गया है। हालांकि अभी बाढ़ जैसी कोई स्थित नहीं है। अभी कोई कटान नहीं हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि इसी तरह से गर्रा के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई तो आने वाले समय में समस्या होगी।