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बारिश ने बिगाड़ा फसलों का मिजाज
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बिलग्राम। किसानों के पास तमाम मुद्दे और परेशानियां हैं। चुनाव के सीजन में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने और भी इजाफा कर दिया है।
एक तरफ जहां लगभग तैयार खड़ी सरसों और आलू की फसल को बारिश व ओलावृष्टि ने नुकसान पहुंचाया है, तो दूसरी ओर छुट्टा अन्ना मवेशी भी खड़ी फसलों को चट करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
आबादी के पास तीन दिन पहले हुए बारिश के चलते सरसों की फसल पलट गई। क्षेत्र के किसान महिपाल बताते हैं कि बड़ी दिक्कतों के बीच सरसों की फसल तैयार की। हजारों रुपये लग गया।
वहीं, अचानक तेज बारिश से हवाओं से फसल जमींदोज हो गई है। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। दूसरी तस्वीर गांव हैबतपुर की है, जहां रबी फसल के खेत में मचान पड़ा है।
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गांव के शंभू बताते हैं कि उनका ही नहीं सैकड़ों किसान मचान के नीचे ठिठुरते हुए रतजगा कर फसल बचा रहे हैं। बताया कि झुंड में घूम रहे छुट्टा मवेशी मौका मिलते ही फसलों को चट कर देते हैं। सुशील कुमार का कहना है कि पशुओं से फसल को काफी नुकसान पहुंचता है।
इसके अलावा खाद और बीज की महंगाई और प्राकृतिक आपदा से जूझते किसान आर्थिक स्थित से उबर नहीं पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय चुनाव का सीजन चल रहा है।
तमाम बड़े दल हर बार की तरह समर्थन लेने के लिए किसानों का नुमाइंदा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद समस्याओं की तरफ मुड़कर कोई नहीं देखता। हम लोगों की हालत साल दर साल बदतर होते जा रही है।
हम लोग हर बार की तरह अबकी भी इस उम्मीद से वोटिंग करेंगे कि जिस किसी दल की सरकार बने, हमारे हितों के लिए प्रयास करें, जिससे खेती किसानी में हो रहे घाटे से हम लोग उबर सकें।
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एक तरफ जहां लगभग तैयार खड़ी सरसों और आलू की फसल को बारिश व ओलावृष्टि ने नुकसान पहुंचाया है, तो दूसरी ओर छुट्टा अन्ना मवेशी भी खड़ी फसलों को चट करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
आबादी के पास तीन दिन पहले हुए बारिश के चलते सरसों की फसल पलट गई। क्षेत्र के किसान महिपाल बताते हैं कि बड़ी दिक्कतों के बीच सरसों की फसल तैयार की। हजारों रुपये लग गया।
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वहीं, अचानक तेज बारिश से हवाओं से फसल जमींदोज हो गई है। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। दूसरी तस्वीर गांव हैबतपुर की है, जहां रबी फसल के खेत में मचान पड़ा है।
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गांव के शंभू बताते हैं कि उनका ही नहीं सैकड़ों किसान मचान के नीचे ठिठुरते हुए रतजगा कर फसल बचा रहे हैं। बताया कि झुंड में घूम रहे छुट्टा मवेशी मौका मिलते ही फसलों को चट कर देते हैं। सुशील कुमार का कहना है कि पशुओं से फसल को काफी नुकसान पहुंचता है।
इसके अलावा खाद और बीज की महंगाई और प्राकृतिक आपदा से जूझते किसान आर्थिक स्थित से उबर नहीं पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय चुनाव का सीजन चल रहा है।
तमाम बड़े दल हर बार की तरह समर्थन लेने के लिए किसानों का नुमाइंदा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद समस्याओं की तरफ मुड़कर कोई नहीं देखता। हम लोगों की हालत साल दर साल बदतर होते जा रही है।
हम लोग हर बार की तरह अबकी भी इस उम्मीद से वोटिंग करेंगे कि जिस किसी दल की सरकार बने, हमारे हितों के लिए प्रयास करें, जिससे खेती किसानी में हो रहे घाटे से हम लोग उबर सकें।