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Hardoi News: झुलसे मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में एक ही मरहम, नाम है ‘रेफर’
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हरदोई। दिवाली के आसपास आए झुलसे हुए मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज महज ‘रेफर’ सेंटर साबित हुआ। प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। तर्क यह कि यहां मरीजों के साथ भर्ती रहने से संक्रमण बढ़ सकता है। बर्न वार्ड न होने का हवाला भी दिया गया।
मेडिकल कॉलेज का संचालन पिछले कई वर्ष से हो रहा है। इसके बावजूद अब तक यहां झुलसे मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज बनने से पहले ब्लड बैंक के पास बन वार्ड था। निर्माण कार्य हुए तो बर्न वार्ड का अस्तित्व ही खत्म हो गया। हालांकि, उम्मीद यह थी कि मेडिकल कॉलेज बनेगा तो उपचार अच्छा होगा लेकिन यह झुलसे मरीजों के लिए सिर्फ रेफर सेंटर ही साबित हुआ।
संक्रमण का हवाला देकर रेफर कर दिए जाते मरीज
हरदोई। हरपालपुर निवासी मोहन की उम्र साढ़े पांच साल है। दिवाली के अगले दिन उस पर कढ़ाई से खौलता हुआ तेल गिर गया था। चेहरा और पीठ लगभग 20 प्रतिशत तक झुलस गई थी। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में उसे प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजनों के मुताबिक, कहा गया कि यहां भर्ती रहने से संक्रमण बढ़ सकता है।
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सीसीयू बनने तक करना होगा इंतजार
हरदोई। झुलसे मरीजों को बेहतर उपचार के लिए व्यवस्था बनाई जा रही है। यह बात और है कि इस व्यवस्था को बनने में अभी काफी वक्त लगेगा। एक क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनने तक झुलसे मरीजों का बेहतर उपचार नहीं हो पाएगा। 160 बेड का आईपीडी भवन बनने से बर्न वार्ड भले ही चल जाए लेकिन व्यवस्थागत परिवर्तन सीसीयू बनने के बाद ही होगा।
मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार प्रयास चल रहा है। अलग से बर्न यूनिट का संचालन सीसाीयू में ही हो सकेगा। उसके निर्माण का काम चल रहा है। बर्न यूनिट संचालन होने में अभी दाे से ढाई साल का समय लग सकता है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज का संचालन पिछले कई वर्ष से हो रहा है। इसके बावजूद अब तक यहां झुलसे मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज बनने से पहले ब्लड बैंक के पास बन वार्ड था। निर्माण कार्य हुए तो बर्न वार्ड का अस्तित्व ही खत्म हो गया। हालांकि, उम्मीद यह थी कि मेडिकल कॉलेज बनेगा तो उपचार अच्छा होगा लेकिन यह झुलसे मरीजों के लिए सिर्फ रेफर सेंटर ही साबित हुआ।
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संक्रमण का हवाला देकर रेफर कर दिए जाते मरीज
हरदोई। हरपालपुर निवासी मोहन की उम्र साढ़े पांच साल है। दिवाली के अगले दिन उस पर कढ़ाई से खौलता हुआ तेल गिर गया था। चेहरा और पीठ लगभग 20 प्रतिशत तक झुलस गई थी। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में उसे प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजनों के मुताबिक, कहा गया कि यहां भर्ती रहने से संक्रमण बढ़ सकता है।
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सीसीयू बनने तक करना होगा इंतजार
हरदोई। झुलसे मरीजों को बेहतर उपचार के लिए व्यवस्था बनाई जा रही है। यह बात और है कि इस व्यवस्था को बनने में अभी काफी वक्त लगेगा। एक क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनने तक झुलसे मरीजों का बेहतर उपचार नहीं हो पाएगा। 160 बेड का आईपीडी भवन बनने से बर्न वार्ड भले ही चल जाए लेकिन व्यवस्थागत परिवर्तन सीसीयू बनने के बाद ही होगा।
मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार प्रयास चल रहा है। अलग से बर्न यूनिट का संचालन सीसाीयू में ही हो सकेगा। उसके निर्माण का काम चल रहा है। बर्न यूनिट संचालन होने में अभी दाे से ढाई साल का समय लग सकता है। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज