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Hardoi News: फर्स्ट एड बॉक्स खाली, मेडिकल किट में दवाएं भी खत्म होने वाली
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हरदोई। राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में मेडिकल किट को लेकर किए जा रहे दावों की पोल खुल रही है। यूं तो बसों में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए लेकिन क्षेत्रीय प्रबंधक ने दावा किया कि अब फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था खत्म हो गई है। परिचालक को ही मेडिकल किट देने का नियम है। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले किटों का वितरण किए जाने का दावा किया गया था। फर्स्ट एड बॉक्स और मेडिकल किट की हकीकत जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी ने मंगलवार को कुछ बसों की पड़ताल की।
केस-1-
मेडिकल किट मिली थी, इस्तेमाल हो गई, अब कोई दवा नहीं
लखनऊ जाने वाली बस संख्या यूपी 78 केटी 4526 में फर्स्ट एड बॉक्स मंगलवार को नहीं मिला। परिचालक से मेडिकल किट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दवाएं तो मिली थीं लेकिन अब उनका प्रयोग हो चुका है। कुछ दिन पहले परिचालक को भी चोट लगी थी तो उन्होंने बैंडेज का इस्तेमाल कर लिया। बताया कि अभी कोई दवा नहीं है, मांग लेंगे।
केस-2-
मेडिकल किट में कुछ दवाएं, कोई देखता तक नहीं
हरदोई से अजमेर और जयपुर तक जाने वाली रोडवेज की बस संख्या यूपी 78 जेएन 1026 में भी फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला। परिचालक का दावा है कि उन्हें मेडिकल किट के तौर पर एक डिब्बा मिला है। उसमें कुछ दवाएं हैं लेकिन यह भी खत्म होने वाली हैं। बताया कि मेडिकल किट का बॉक्स बस में ही रखा रहता है। कोई जांचता भी नहीं है।
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केस-3-
फर्स्ट एड बॉक्स नहीं खोल पाया परिचालक, खुला तो मिला खाली
हरदोई वाया पिहानी मोहम्मदी तक जाने वाली बस संख्या यूपी 78 एलटी 4166 में फर्स्ट एड बॉक्स लगा मिला। हद तो यह कि परिचालक इस बॉक्स को खोल ही नहीं पाया। जब यह बॉक्स खोला गया तो यह खाली था। परिचालक का कहना है कि काफी दिनों से दवाएं मिली ही नहीं हैं।
केस-4-
गनीमत है मेडिकल किट भी है और दवाएं भी
हरदोई से दिल्ली दादरी तक जाने वाली बस संख्या यूपी 78 जेएन 1349 में मेडिकल किट का बॉक्स मिला। परिचालक ने बताया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान मेडिकल बॉक्स दिया गया था। उनके पास अभी तक दवाओं का प्रयोग हुआ नहीं है इसलिए दवाएं मौजूद हैं।
मेडिकल किट के लिए दिए गए 10 हजार रुपये
रोडवेज बसों में मेडिकल किट बनाए रखने के लिए बजट भी है। क्षेत्रीय प्रबंधक रमेश कुमार बताते हैं कि 10 हजार रुपये सभी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को सिर्फ मेडिकल किट अपडेट रखने के लिए ही दिए गए हैं। बसों की नियमित जांच कर दवाएं कम मिलने पर इन्हें पूरा करने की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर और भी बजट दिया जा सकता है। इसको लेकर कोई कमी नहीं है।
दवाओं के लिए सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के पास फंड है। परिचालक मांग करें तो उन्हें तत्काल ही दवाएं उपलब्ध करा दी जाएं। कई बार परिचालक भी दवाएं खत्म होने की जानकारी नहीं देते। -रमेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक
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केस-1-
मेडिकल किट मिली थी, इस्तेमाल हो गई, अब कोई दवा नहीं
लखनऊ जाने वाली बस संख्या यूपी 78 केटी 4526 में फर्स्ट एड बॉक्स मंगलवार को नहीं मिला। परिचालक से मेडिकल किट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दवाएं तो मिली थीं लेकिन अब उनका प्रयोग हो चुका है। कुछ दिन पहले परिचालक को भी चोट लगी थी तो उन्होंने बैंडेज का इस्तेमाल कर लिया। बताया कि अभी कोई दवा नहीं है, मांग लेंगे।
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केस-2-
मेडिकल किट में कुछ दवाएं, कोई देखता तक नहीं
हरदोई से अजमेर और जयपुर तक जाने वाली रोडवेज की बस संख्या यूपी 78 जेएन 1026 में भी फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला। परिचालक का दावा है कि उन्हें मेडिकल किट के तौर पर एक डिब्बा मिला है। उसमें कुछ दवाएं हैं लेकिन यह भी खत्म होने वाली हैं। बताया कि मेडिकल किट का बॉक्स बस में ही रखा रहता है। कोई जांचता भी नहीं है।
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केस-3-
फर्स्ट एड बॉक्स नहीं खोल पाया परिचालक, खुला तो मिला खाली
हरदोई वाया पिहानी मोहम्मदी तक जाने वाली बस संख्या यूपी 78 एलटी 4166 में फर्स्ट एड बॉक्स लगा मिला। हद तो यह कि परिचालक इस बॉक्स को खोल ही नहीं पाया। जब यह बॉक्स खोला गया तो यह खाली था। परिचालक का कहना है कि काफी दिनों से दवाएं मिली ही नहीं हैं।
केस-4-
गनीमत है मेडिकल किट भी है और दवाएं भी
हरदोई से दिल्ली दादरी तक जाने वाली बस संख्या यूपी 78 जेएन 1349 में मेडिकल किट का बॉक्स मिला। परिचालक ने बताया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान मेडिकल बॉक्स दिया गया था। उनके पास अभी तक दवाओं का प्रयोग हुआ नहीं है इसलिए दवाएं मौजूद हैं।
मेडिकल किट के लिए दिए गए 10 हजार रुपये
रोडवेज बसों में मेडिकल किट बनाए रखने के लिए बजट भी है। क्षेत्रीय प्रबंधक रमेश कुमार बताते हैं कि 10 हजार रुपये सभी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को सिर्फ मेडिकल किट अपडेट रखने के लिए ही दिए गए हैं। बसों की नियमित जांच कर दवाएं कम मिलने पर इन्हें पूरा करने की व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर और भी बजट दिया जा सकता है। इसको लेकर कोई कमी नहीं है।
दवाओं के लिए सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक के पास फंड है। परिचालक मांग करें तो उन्हें तत्काल ही दवाएं उपलब्ध करा दी जाएं। कई बार परिचालक भी दवाएं खत्म होने की जानकारी नहीं देते। -रमेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक