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Hardoi News: फर्जी अभिलेखों से लैपटॉप आपूर्ति का दे दिया टेंडर
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जिस कंपनी को मिला टेंडर, उसने प्रक्रिया में प्रतिभाग ही नहीं किया
डीएम के आदेश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने दर्ज कराई प्राथमिकी
आनंद मिश्रा
हरदोई। प्रोबेशन विभाग में लैपटॉप की खरीद के लिए हुई निविदा प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। डीएम के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रोबेशन विभाग के तत्कालीन पटल सहायक के खिलाफ शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जांच रिपोर्ट में पता चला है कि जिस फर्म को टेंडर दिया गया, उस फर्म ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग ही नहीं किया था। तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी पर भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया है कि प्रोबेशन कार्यालय में लैपटॉप खरीद में अनियमितता की जांच जिलाधिकारी ने कराई थी। जांच टीम में जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और उपायुक्त उद्योग शामिल थे।
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जांच रिपोर्ट में पता चला कि तत्कालीन पटल सहायक संजीव श्रीवास्तव ने जेम बिड के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया। इसके बदले में फोन-पे के साथ ही नगद धनराशि भी संजीव श्रीवास्तव को देने की बात सामने आई है। आरोप है कि ब्रजेश श्रीवास्तव की सांठगांठ मेसर्स एके इंटरप्राइजेज से थी। साथ ही एके इंटरप्राइजेज की सांठगांठ मेसर्स जेपीसी हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड से थी। इसी के जरिये पूरी गड़बड़ी की गई। शहर कोतवाल संजय त्यागी ने बताया कि जिला प्रोबेशन अधिकारी की शिकायत पर संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ फर्जीवाड़ा किए जाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
टेंडर देने की प्रक्रिया में इस तरह हुआ खेल
हरदोई। प्रोबेशन विभाग ने लाभार्थियों को वितरित करने के लिए 31 लैपटॉप 2022-23 में खरीदे थे। खरीद जेम पोर्टल के से की गई। 30 जनवरी 2023 को बिड खोली गई। इसके मुताबिक 13 फर्मों ने बिड में प्रतिभाग किया। 13 फर्मों की सूची में पांचवें नंबर पर दर्ज अंकित मेसर्स एके इंटरप्राइजेज को तकनीकी बिड में क्वालिफाई दिखाया गया। खरीद समिति के अध्यक्ष और सदस्यों से हस्ताक्षर भी करा लिए गए। 12.40 लाख रुपये सबसे कम मूल्य प्रदर्शित हुआ और इसे आधार पर टेंडर एके इंटरप्राइजेज को दे दिया गया। इसी बीच लखनऊ निवासी धर्मेंद्र मिश्रा ने फर्जीवाड़े की शिकायत डीएम से 28 अगस्त 2025 को की। डीएम ने जांच कमेटी बनाई। जांच के दौरान अभिलेख खंगाले गए तो पता चला कि अंकित मेसर्स एके इंटरप्राइजेज ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग ही नहीं किया। जो अभिलेख जेम पोर्टल पर उपलब्ध हैं उसी तरह के फर्जी प्रपत्र कार्यालय की फाइल में भी लगा दिए गए। (संवाद)
इनसेट
नाम किसी और का काम किसी और का
जांच में पता चला कि हकीकत में जेम पोर्टल पर टेंडर प्रक्रिया में मेसर्स जेपीसी, हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड ने प्रतिभाग किया था। इसी कंपनी ने क्रमांक पांच पर टेंडर डाला था। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जेपीसी हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में एके इंटरप्राइजेज के साथ गठजोड़ कर लिया। इसकी पुष्टि तब हुई, जब जांच टीम ने जेपीसी का काम संभालने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने लैपटॉप आपूर्ति से संबंधित पत्र और भुगतान के बिल जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में पेश किए। यह भी दावा किया कि कर्मचारियों ने बताया कि अभी बजट नहीं मिला है। बजट मिलने पर भुगतान कर देंगे। जांच टीम ने साफ लिखा है कि पत्रावली देखने पर पता चला कि जेपीसी के किसी कर्मचारी या अधिकारी ने न तो कोई मेल किया और न ही भुगतान के लिए बिल दिए। इसी आधार पर पता चला कि दोनों कंपनियों में आपसी सांठगांठ है।
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डीएम के आदेश पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने दर्ज कराई प्राथमिकी
आनंद मिश्रा
हरदोई। प्रोबेशन विभाग में लैपटॉप की खरीद के लिए हुई निविदा प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। डीएम के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रोबेशन विभाग के तत्कालीन पटल सहायक के खिलाफ शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जांच रिपोर्ट में पता चला है कि जिस फर्म को टेंडर दिया गया, उस फर्म ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग ही नहीं किया था। तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी पर भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया है कि प्रोबेशन कार्यालय में लैपटॉप खरीद में अनियमितता की जांच जिलाधिकारी ने कराई थी। जांच टीम में जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी और उपायुक्त उद्योग शामिल थे।
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जांच रिपोर्ट में पता चला कि तत्कालीन पटल सहायक संजीव श्रीवास्तव ने जेम बिड के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया। इसके बदले में फोन-पे के साथ ही नगद धनराशि भी संजीव श्रीवास्तव को देने की बात सामने आई है। आरोप है कि ब्रजेश श्रीवास्तव की सांठगांठ मेसर्स एके इंटरप्राइजेज से थी। साथ ही एके इंटरप्राइजेज की सांठगांठ मेसर्स जेपीसी हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड से थी। इसी के जरिये पूरी गड़बड़ी की गई। शहर कोतवाल संजय त्यागी ने बताया कि जिला प्रोबेशन अधिकारी की शिकायत पर संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ फर्जीवाड़ा किए जाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है।
टेंडर देने की प्रक्रिया में इस तरह हुआ खेल
हरदोई। प्रोबेशन विभाग ने लाभार्थियों को वितरित करने के लिए 31 लैपटॉप 2022-23 में खरीदे थे। खरीद जेम पोर्टल के से की गई। 30 जनवरी 2023 को बिड खोली गई। इसके मुताबिक 13 फर्मों ने बिड में प्रतिभाग किया। 13 फर्मों की सूची में पांचवें नंबर पर दर्ज अंकित मेसर्स एके इंटरप्राइजेज को तकनीकी बिड में क्वालिफाई दिखाया गया। खरीद समिति के अध्यक्ष और सदस्यों से हस्ताक्षर भी करा लिए गए। 12.40 लाख रुपये सबसे कम मूल्य प्रदर्शित हुआ और इसे आधार पर टेंडर एके इंटरप्राइजेज को दे दिया गया। इसी बीच लखनऊ निवासी धर्मेंद्र मिश्रा ने फर्जीवाड़े की शिकायत डीएम से 28 अगस्त 2025 को की। डीएम ने जांच कमेटी बनाई। जांच के दौरान अभिलेख खंगाले गए तो पता चला कि अंकित मेसर्स एके इंटरप्राइजेज ने टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग ही नहीं किया। जो अभिलेख जेम पोर्टल पर उपलब्ध हैं उसी तरह के फर्जी प्रपत्र कार्यालय की फाइल में भी लगा दिए गए। (संवाद)
इनसेट
नाम किसी और का काम किसी और का
जांच में पता चला कि हकीकत में जेम पोर्टल पर टेंडर प्रक्रिया में मेसर्स जेपीसी, हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड ने प्रतिभाग किया था। इसी कंपनी ने क्रमांक पांच पर टेंडर डाला था। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जेपीसी हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में एके इंटरप्राइजेज के साथ गठजोड़ कर लिया। इसकी पुष्टि तब हुई, जब जांच टीम ने जेपीसी का काम संभालने वाले लोगों ने बताया कि उन्होंने लैपटॉप आपूर्ति से संबंधित पत्र और भुगतान के बिल जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में पेश किए। यह भी दावा किया कि कर्मचारियों ने बताया कि अभी बजट नहीं मिला है। बजट मिलने पर भुगतान कर देंगे। जांच टीम ने साफ लिखा है कि पत्रावली देखने पर पता चला कि जेपीसी के किसी कर्मचारी या अधिकारी ने न तो कोई मेल किया और न ही भुगतान के लिए बिल दिए। इसी आधार पर पता चला कि दोनों कंपनियों में आपसी सांठगांठ है।