{"_id":"9c8bfeec0da9012d0cea2fd04c9f1033","slug":"ten-minutes-inspection-and-a-half-hour-talks-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस मिनट निरीक्षण और डेढ़ घंटा वार्ता!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस मिनट निरीक्षण और डेढ़ घंटा वार्ता!
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 11 Apr 2015 12:37 AM IST
विज्ञापन
जिले में चल रहे अंधता निवारण कार्यक्रम की समीक्षा
विज्ञापन
करने पहुंचे मुख्य सलाहकार ने दस मिनट में निरीक्षण की खानापूरी कर ली।
इसके बाद अफसरों से डेढ़ घंटा कक्ष में वार्ता कर चलते गए। इससे योजना की
हकीकत का अनुमान स्वयं ही लगाया जा सकता है।
ज्ञात हो कि जिले में अंधता निवारण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिसके तहत मरीजों का आपरेशन से लेकर उनको चश्मा, दवा आदि नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, पर यह कार्यक्रम कागजों में ही तेजी से दौड़ रहा है। हकीकत में मरीजों को व्यापक सुविधा नहीं मिली और उनको लेंस का शुल्क अदा करना पड़ता है।
जिले में संचालित कार्यक्रम की समीक्षा करने शुक्रवार को अंधता निवारण समिति के प्रमुख सलाहकार विकास सेठी जिला मुख्यालय पर पहुंचे। उन्होंने जिला अस्पताल में संचालित नेत्र विभाग को निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओटी की व्यवस्था देखी। यहां पर स्टाफ नर्स की तैनाती न होने और सफाई न होने पर नाराजगी जताई।
इसके बाद दवा का स्टाक देखा। उनका निरीक्षण मात्र दस मिनट में निपट गया। इसके बाद सीएमओ के कक्ष में डेढ़ घंटे तक अफसरों से वार्ता करते रहे और सभी कुछ सही कहकर चले गए। निरीक्षण के दौरान सीएमएस डा. आरके मिश्र समेत विभागीय अफसर मौजूद थे।
ज्ञात हो कि जिले में अंधता निवारण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिसके तहत मरीजों का आपरेशन से लेकर उनको चश्मा, दवा आदि नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं, पर यह कार्यक्रम कागजों में ही तेजी से दौड़ रहा है। हकीकत में मरीजों को व्यापक सुविधा नहीं मिली और उनको लेंस का शुल्क अदा करना पड़ता है।
जिले में संचालित कार्यक्रम की समीक्षा करने शुक्रवार को अंधता निवारण समिति के प्रमुख सलाहकार विकास सेठी जिला मुख्यालय पर पहुंचे। उन्होंने जिला अस्पताल में संचालित नेत्र विभाग को निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ओटी की व्यवस्था देखी। यहां पर स्टाफ नर्स की तैनाती न होने और सफाई न होने पर नाराजगी जताई।
इसके बाद दवा का स्टाक देखा। उनका निरीक्षण मात्र दस मिनट में निपट गया। इसके बाद सीएमओ के कक्ष में डेढ़ घंटे तक अफसरों से वार्ता करते रहे और सभी कुछ सही कहकर चले गए। निरीक्षण के दौरान सीएमएस डा. आरके मिश्र समेत विभागीय अफसर मौजूद थे।