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नहीं खुले ताले, दूसरे दिन भी भटकते रहे जरूरत वाले
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रेलवेगंज स्थित बैंक आफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन करते बैंक कर्मी। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक 2021 के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण शुक्रवार को दूसरे दिन भी जिले की 163 बैंक शाखाओं में ताले लटकते रहे। इसके कारण लोगों को लेनदेन में परेशानी हुई। एटीएम पर भी रुपये न मिलने के कारण लोग दौड़ लगते रहे। दो दिनों की हड़ताल में जिले में करीब 400 करोड़ से अधिक का लेनदेन प्रभावित रहा। आज बैंक खुलेंगे।
रेलवेगंज स्थित बैंक आफ इंडिया की मुख्य शाखा के बाहर प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस की स्थानीय इकाई के चेयरमैन मनोज सिंह ने कहा कि बैंकों का निजीकरण नौकरी की सुरक्षा और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित करेगा। निजीकरण देश, अर्थव्यवस्था व लोगों के हित में नहीं है। संयोजक आरके पांडे ने कहा कि हड़ताल पूर्णतया सफल रही। बैंक कर्मी नेता क्षितिज पाठक व वीर बहादुर सिंह ने कहा कि बैंकों के निजीकरण के प्रयास का पूरी ताकत से विरोध चलता रहेगा।
बैंक अधिकारी नेता कमलेश कुमार व हर्षित गुप्ता ने कहा कि सामाजिक बैंकिंग राष्ट्रीयकरण के कारण ही संभव हो सकी है। सेवानिवृत्त बैंककर्मी डॉ. आलोक टंडन ने हड़ताली बैंक कर्मियों से कहा कि बैंक कर्मियों की यह लड़ाई सरकार के खिलाफ है।
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इस मौके पर बैंक कर्मी आकांक्षा गौतम, काजल, वेद प्रकाश पांडे, अजय मेहरोत्रा, रवि शुक्ला, वर्षा मेहरोत्रा, अनुज सिंह, आशीष मिश्रा, मुबारक अली, अनामिका सिंह, निधि, स्वाति, दीप्ति, अंकिता, सुरभि, अभिषेक मिश्रा, यतींद्र मिश्रा, ऋषिपाल, संदीप, वरुण सिंह आदि मौजूद रहे।
उधर बैंकों में हड़ताल के कारण दूसरे दिन शहर के एक आध एटीएम में ही रुपये मिल सके। शेष एटीएम खाली रहे। लोग एक एटीएम से दूसरे तक दौड़ लगाते रहे।
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रेलवेगंज स्थित बैंक आफ इंडिया की मुख्य शाखा के बाहर प्रदर्शन के दौरान यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस की स्थानीय इकाई के चेयरमैन मनोज सिंह ने कहा कि बैंकों का निजीकरण नौकरी की सुरक्षा और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित करेगा। निजीकरण देश, अर्थव्यवस्था व लोगों के हित में नहीं है। संयोजक आरके पांडे ने कहा कि हड़ताल पूर्णतया सफल रही। बैंक कर्मी नेता क्षितिज पाठक व वीर बहादुर सिंह ने कहा कि बैंकों के निजीकरण के प्रयास का पूरी ताकत से विरोध चलता रहेगा।
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बैंक अधिकारी नेता कमलेश कुमार व हर्षित गुप्ता ने कहा कि सामाजिक बैंकिंग राष्ट्रीयकरण के कारण ही संभव हो सकी है। सेवानिवृत्त बैंककर्मी डॉ. आलोक टंडन ने हड़ताली बैंक कर्मियों से कहा कि बैंक कर्मियों की यह लड़ाई सरकार के खिलाफ है।
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इस मौके पर बैंक कर्मी आकांक्षा गौतम, काजल, वेद प्रकाश पांडे, अजय मेहरोत्रा, रवि शुक्ला, वर्षा मेहरोत्रा, अनुज सिंह, आशीष मिश्रा, मुबारक अली, अनामिका सिंह, निधि, स्वाति, दीप्ति, अंकिता, सुरभि, अभिषेक मिश्रा, यतींद्र मिश्रा, ऋषिपाल, संदीप, वरुण सिंह आदि मौजूद रहे।
उधर बैंकों में हड़ताल के कारण दूसरे दिन शहर के एक आध एटीएम में ही रुपये मिल सके। शेष एटीएम खाली रहे। लोग एक एटीएम से दूसरे तक दौड़ लगाते रहे।