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Hardoi News: संकटग्रस्त प्रजाति की श्रेणी में आया सारस, शुरू हुई गणना
Tue, 27 Jun 2023 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:10 AM IST
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फोटो - 20 तालाब के किनारे विचरण करते सारस।
-आईयूसीएन ने संख्या पर जाहिर की चिंता
- 27 जून को भी होगी एक साथ फोटोग्राफ सहित होगी गणना
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। राजकीय पक्षी सारस की घटती संख्या पर इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने चिंता जाहिर की है। दलदली भूमि वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले उड़ने वाले विशालकाय पक्षी सारस की गणना का निर्णय लिया गया है। अभियान चलाकर दो दिन वाले होने वाली गणना सोमवार से शुरू हो गई है। 27 को भी एक साथ फोटोग्राफ के साथ गणना होगी। गणना में सारस की फोटोग्राफ के साथ स्थल को भी इंगित किया जाएगा।
राजकीय पक्षी सारस को संरक्षित किए जाने के लिए सामाजिक वानिकी वन एवं वन्य जीव प्रभाग के माध्यम से काम कराया जा रहा है। वन्य जीव प्रभाग यहां पर न होने के चलते वन विभाग के माध्यम से ही यहां के सांडी पक्षी विहार सहित बड़े भू-भाग और सारस के रहने वाले दलदली भूमि के क्षेत्रों को चिह्नित कर उनके संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर सारस की घटती संख्या पर आयूसीएन ने चिंता जताते हुए सारस को वर्तमान में संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया है। जारी रिपोर्ट में कहा है की भारत में अधिसंख्य में पाए जाने वाले राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सामाजिक वानिकी एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभारी निदेशक शशिकांत अमरेश ने बताया गत वर्ष की गणना में यहां पर 703 सारस पाए गए थे। इस बार के अभियान में नमामि गंगे परियोजना, स्वयंसेवी संगठनों और आमजन को सारस का महत्व बताने के उद्देश्य जोड़ा गया है। इसके लिए की फोटो स्थल के नाम सहित ब्योरा जुटाया जाएगा।
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अटूट प्यार के प्रतीक होते हैं सारस: दलदली भूमि पाए जाने वाले सारस जोड़ों में ही रहना पसंद करते हैं। यह किसान के मित्र के रूप में काम करते हैं और फसलों में लगने वाले कीट पतंगों को अपने भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। सारस के जोड़ों में इतना आपसी प्रेम होता है कि यह जोड़ा में से एक सारस की अचानक हादसा या अन्य किसी वजह से मौत हो जाती है तो, उसका साथी सारस उसी स्थल पर अपना सिर पटक- पटककर प्राण त्याग देता है।
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वन विभाग की रेंजवार पिछली गणना में सारस की संख्या पर एक नजर
रेंज का नाम - सारस
हरदोई - 478
शाहाबाद - 28 संडीला - 18 बिलाग्राम - 74 कछौना - 36
हरपालपुर - 26 पिहानी - 43
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-आईयूसीएन ने संख्या पर जाहिर की चिंता
- 27 जून को भी होगी एक साथ फोटोग्राफ सहित होगी गणना
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। राजकीय पक्षी सारस की घटती संख्या पर इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने चिंता जाहिर की है। दलदली भूमि वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले उड़ने वाले विशालकाय पक्षी सारस की गणना का निर्णय लिया गया है। अभियान चलाकर दो दिन वाले होने वाली गणना सोमवार से शुरू हो गई है। 27 को भी एक साथ फोटोग्राफ के साथ गणना होगी। गणना में सारस की फोटोग्राफ के साथ स्थल को भी इंगित किया जाएगा।
राजकीय पक्षी सारस को संरक्षित किए जाने के लिए सामाजिक वानिकी वन एवं वन्य जीव प्रभाग के माध्यम से काम कराया जा रहा है। वन्य जीव प्रभाग यहां पर न होने के चलते वन विभाग के माध्यम से ही यहां के सांडी पक्षी विहार सहित बड़े भू-भाग और सारस के रहने वाले दलदली भूमि के क्षेत्रों को चिह्नित कर उनके संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर सारस की घटती संख्या पर आयूसीएन ने चिंता जताते हुए सारस को वर्तमान में संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया है। जारी रिपोर्ट में कहा है की भारत में अधिसंख्य में पाए जाने वाले राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सामाजिक वानिकी एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभारी निदेशक शशिकांत अमरेश ने बताया गत वर्ष की गणना में यहां पर 703 सारस पाए गए थे। इस बार के अभियान में नमामि गंगे परियोजना, स्वयंसेवी संगठनों और आमजन को सारस का महत्व बताने के उद्देश्य जोड़ा गया है। इसके लिए की फोटो स्थल के नाम सहित ब्योरा जुटाया जाएगा।
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अटूट प्यार के प्रतीक होते हैं सारस: दलदली भूमि पाए जाने वाले सारस जोड़ों में ही रहना पसंद करते हैं। यह किसान के मित्र के रूप में काम करते हैं और फसलों में लगने वाले कीट पतंगों को अपने भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। सारस के जोड़ों में इतना आपसी प्रेम होता है कि यह जोड़ा में से एक सारस की अचानक हादसा या अन्य किसी वजह से मौत हो जाती है तो, उसका साथी सारस उसी स्थल पर अपना सिर पटक- पटककर प्राण त्याग देता है।
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वन विभाग की रेंजवार पिछली गणना में सारस की संख्या पर एक नजर
रेंज का नाम - सारस
हरदोई - 478
शाहाबाद - 28 संडीला - 18 बिलाग्राम - 74 कछौना - 36
हरपालपुर - 26 पिहानी - 43