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म आंखों से जिले के सपूत को अंतिम विदाई, उमड़ा जनसैलाब
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फोटो-26-बिलग्राम के बेहटी खुर्द में शहीद सत्यम कुमार पाठक की अंतिम यात्रा के आगे तिरंगा लेकर चलते य
- फोटो : HARDOI
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बिलग्राम। देश की रक्षा की खातिर लद्दाख में 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बर्फीली चोटी पर ड्यूटी के दौरान आक्सीजन की कमी से शहीद हुए जिले के सपूत सत्यम कुमार पाठक को सोमवार को नम आंखों व सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान सेना के अफसर, जवान, जन प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों ने कहा कि सत्यम ने देश का मान रखा है। उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा।
बिलग्राम के बेहटीखुर्द निवासी बाबूराम पाठक के पुत्र सत्यम कुमार पाठक 539 एएससी बटालियन में हवलदार थे। सैन्य टुकड़ी उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बेहटीखुर्द लाई। पार्थिव शरीर लेकर आ रहे सेना के वाहन को देखते ही गांव के बाहर से ही तिरंगा लेकर लोग चल पड़े। दोपहर 12 बजे शहीद का शव गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया।
ग्रामीणों के श्रद्धांजलि देने के करीब एक घंटे बाद शहीद के शव को सेना के वाहन से ही मेहंदीघाट ले जाया गया। जहां सैन्य टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के कर्नल सर्वेश, जिलाधिकारी अविनाश कुमार, जिला सैनिक कल्याण कल्याण कर्नल ओपी मिश्रा, एसडीएम दीपक वर्मा, अजय सिंह सहित कई अधिकारी, गोरखा रेजीमेंट के सैन्य कर्मी व ग्रामीण मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री की ओर से शहीद के पैतृक गांव पहुंचे बिलग्राम-मल्लावां विधायक आशीष सिंह आशू ने उनकी पत्नी व माता-पिता को 50 लाख की चेक प्रदान की। एक सड़क का नाम शहीद के नाम पर व घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की बात कही। इस दौरान शहीद की मां सरला देवी विधायक के कंधे पर सिर रखकर बिलख पड़ीं।
गांव में शहीद के घर के आसपास छतों पर लोग मौजूद रहे। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए भीड़ रही। अधिकारियों ने कहा कि घरों में जर्जर छज्जों पर इतनी संख्या में लोग खड़े हैं कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। किसी तरह लोगों को हटाया गया।
लखनऊ से सुबह साढ़े पांच बजे ही सैन्य टुकड़ी शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गांव के लिए निकली लेकिन लखनऊ-हरदोई रोड पर वाहन खराब हो गया। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि दूसरे वाहन से वह यहां आ सके।
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बिलग्राम के बेहटीखुर्द निवासी बाबूराम पाठक के पुत्र सत्यम कुमार पाठक 539 एएससी बटालियन में हवलदार थे। सैन्य टुकड़ी उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बेहटीखुर्द लाई। पार्थिव शरीर लेकर आ रहे सेना के वाहन को देखते ही गांव के बाहर से ही तिरंगा लेकर लोग चल पड़े। दोपहर 12 बजे शहीद का शव गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया।
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ग्रामीणों के श्रद्धांजलि देने के करीब एक घंटे बाद शहीद के शव को सेना के वाहन से ही मेहंदीघाट ले जाया गया। जहां सैन्य टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के कर्नल सर्वेश, जिलाधिकारी अविनाश कुमार, जिला सैनिक कल्याण कल्याण कर्नल ओपी मिश्रा, एसडीएम दीपक वर्मा, अजय सिंह सहित कई अधिकारी, गोरखा रेजीमेंट के सैन्य कर्मी व ग्रामीण मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री की ओर से शहीद के पैतृक गांव पहुंचे बिलग्राम-मल्लावां विधायक आशीष सिंह आशू ने उनकी पत्नी व माता-पिता को 50 लाख की चेक प्रदान की। एक सड़क का नाम शहीद के नाम पर व घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने की बात कही। इस दौरान शहीद की मां सरला देवी विधायक के कंधे पर सिर रखकर बिलख पड़ीं।
गांव में शहीद के घर के आसपास छतों पर लोग मौजूद रहे। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए भीड़ रही। अधिकारियों ने कहा कि घरों में जर्जर छज्जों पर इतनी संख्या में लोग खड़े हैं कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। किसी तरह लोगों को हटाया गया।
लखनऊ से सुबह साढ़े पांच बजे ही सैन्य टुकड़ी शहीद के पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गांव के लिए निकली लेकिन लखनऊ-हरदोई रोड पर वाहन खराब हो गया। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि दूसरे वाहन से वह यहां आ सके।

फोटो-28-शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद सलामी देते जिलाधिकारी अविनाश कुमार। संवाद- फोटो : HARDOI