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भारतीय संस्कृति का आधार है संस्कृत भाषा: डॉ. पांडेय
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हरदोई। संस्कृत दिवस के मौके पर सोमवार को अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से संस्थाध्यक्ष के आवास पर गोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए संस्थाध्यक्ष डाॅ. बीएस पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत भाषा को उचित स्थान व प्रतिनिधित्व न दिया जाना चिंता का विषय है क्योंकि भारतीय संस्कृति का आधार संस्कृत भाषा है। डाॅ. ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा के समाज को प्रचार प्रसार व पठन पाठन की महती आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति के सभी तत्व धर्म दर्शन, आध्यात्म, रीति रिवाज, कर्मकांड, ज्योतिष आदि समस्त संस्कृत भाषा में ही निहित है।
डाॅ. नरेश चंद्र शुक्ल ने कहा कि वृहद शब्दकोष वाली प्राचीनतम संस्कृत भाषा है जिसे देव भाषा भी कहते हैं। डाॅ. शीला पांडेय ने संस्कृत निष्ठ सारगर्भित शब्दावली के प्रयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम में सुशील वर्मा, वेद प्रकाश अवस्थी, गिरीश चंद्र वाजपेई, कौशलेंद्र, गिरीश श्रीवास्तव, राजीव वर्मा आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए संस्थाध्यक्ष डाॅ. बीएस पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत भाषा को उचित स्थान व प्रतिनिधित्व न दिया जाना चिंता का विषय है क्योंकि भारतीय संस्कृति का आधार संस्कृत भाषा है। डाॅ. ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा के समाज को प्रचार प्रसार व पठन पाठन की महती आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति के सभी तत्व धर्म दर्शन, आध्यात्म, रीति रिवाज, कर्मकांड, ज्योतिष आदि समस्त संस्कृत भाषा में ही निहित है।
डाॅ. नरेश चंद्र शुक्ल ने कहा कि वृहद शब्दकोष वाली प्राचीनतम संस्कृत भाषा है जिसे देव भाषा भी कहते हैं। डाॅ. शीला पांडेय ने संस्कृत निष्ठ सारगर्भित शब्दावली के प्रयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम में सुशील वर्मा, वेद प्रकाश अवस्थी, गिरीश चंद्र वाजपेई, कौशलेंद्र, गिरीश श्रीवास्तव, राजीव वर्मा आदि मौजूद रहे।
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