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सजना है मुझे सजना के लिए...
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Tue, 18 Oct 2016 11:18 PM IST
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करवा चौथ की तैयारी में ब्यूटी पार्लर में सजती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
हरदोई। आज मनाए जा रहे करवा चौथ का त्योहार इस बार चार शुभ मुहूर्त एक साथ लेकर आ रहा है। यह महासंयोग 100 साल बाद आया है। पति व पत्नी दोनों के लिए ही यह दिन काफी शुभ रहेगा।
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शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि इससे पहले इस तरह का संयोग करवा चौथ के दिन 1916 में बना था। तब करवा कर चार महासंयोग एक साथ बने थे। उन्होंने बताया कि करवा चौथ का व्रत इस बार बुधवार को पड़ रहा है।
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बुधवार को शुभ कार्तिक मास का रोहिणी नक्षत्र है। इस दिन चंद्रमा अपने रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। इस दिन बुध अपनी कन्या राशि में रहेंगे। इसी दिन गणेश चतुर्थी और कृष्ण जी की रोहिणी नक्षत्र भी है। बुधवार गणेश जी और कृष्ण जी दोनों का दिन है।
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ये अद्भुत संयोग करवा चौथ के व्रत को और भी शुभ फलदायी बना रहा है। इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख भी मिल सकता है। चार संयोग इस बार करवा चौथ को खास बनारहे हैं। ये अद्भुत संयोग करवा चौथ के व्रत को शुभ फलदायी बनाएगा।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि करवा चौथ पूजा के लिए पूरी अवधि एक घंटे और 13 मिनट है। करवा चौथ पूजा का समय शाम 6 बजे शुरू होगा। शाम 7:14 बजे करवा चौथ पूजा करने का समय खत्म होगा। चंद्र उदय का मुहूर्त रात 8:29 से 8:50 बजे के बीच है।
पूजा घर में दीवार आदि को साफ कर उस पर गेरू से फलक बनाकर चावल, हल्दी के घोल से करवा आदि बनाएं। करवा के चित्र में गेरू की स्याही से गणेश जी, पार्वती जी, शंकर एंव कार्तिकेय जी का चित्र बनाकर एक वटवृक्ष तथा मानव आकृति बनाकर उसकेहाथ में चलनी भी बनाएं।
बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि पास में ही उदित होते हुए चांद का एक चित्र बनाए जाने की भी परंपरा है। इसके बाद पीली मिट्टी से गौरी प्रतिमा बनाकर उनकी गोद में गणेश जी बनाकर बिठाए जाते हैं।
शाम को चंद्र उदय होने के बाद दोनों करवे चावल से भरे पात्र से ढककर उस पर सुपारी, नेवैद्य के रूप में चावल शक्कर से बने लड्डू , पूड़ी की आठ अठावरी तथा कोई फल अर्पित कर दाएं करवे को बाएं और बाएं करवे को दाई और स्थापित कर मंत्रों का प्रयोग करने केबाद पूजन करें।