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धारा में बहता था जीवन, अब खुद ठहर गई सई...!
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फोटो-30-हरियावां क्षेत्र में गांव वालों के अतिक्रमण से सकरी हुई सई नदी
- फोटो : HARDOI
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हरियावां। क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली सई नदी की धारा ठहर गई है। अतिक्रमण की बढ़ती सीमा ने सई को समेट दिया है। शुरुआती गर्मी में ही नदी का पानी लगभग सूख चुका है। नदी के किनारों पर बसे गांवों के लोग इससे परेशान हैं। मवेशी भी प्यासे हैं। नदी घाट पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान की परंपरा भी सूखते पानी के साथ खत्म होती जा रही है। धर्म, परंपरा और जीवन से जुड़ी सई नदी का अस्तित्व संकट में दिख रहा है।
देवरिया, कसियापुर, शाहपुर, कोरिगवां, चिरेयाझाला, उतरा, कायमपुर, नन्हे सहित अन्य गांवों के लोगों ने खेतों की सीमाएं बढ़ाने के लिए सई नदी के घाटों तक अतिक्रमण कर लिया है। इसके अलावा पूरे गांव का कचरा भी इसी नदी के दामन में डाला जा रहा है। नदी का अस्तित्व बचाने के लिए समय-समय पर कई समाजसेवी सामने आते रहे, लेकिन ग्रामीणों की नासमझी उनके प्रयासों पर भारी पड़ी। खास बात यह है कि गांवों के लिए सई नदी में बहने वाला जल बेशकीमती था। यहां के खेतों की फसलें सई के पानी से लहलहाती थीं। लेकिन अब सिंचाई के लिए पानी मिलना ही मुश्किल है।
चीनी मिल ने किया था बचाने का प्रयास
हरियावां चीनी मिल के यूनिट हेड प्रदीप त्यागी ने वृक्ष लगाओ सई बचाओ अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत 2017-18 में सई नदी के किनारे पौधरोपण किया गया। लगभग 10 हजार पौधे नदी के किनारों पर रोपित किए गए। चीनी मिल ने लगभग तीन वर्षों तक इसकी देखभाल भी की। लेकिन गांव वालों का सहयोग न मिलने से पौधे नष्ट हो गए।
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मछली पकड़ने के लिए सुखा दी नदी
पिहानी। मछली पकड़ने के लिए शिकारियों ने पिहानी-हरदोई रोड पर बने पुल के पास सई नदी में पंपिंग सेट लगाकर उसका पानी निकाल दिया। इससे आगे के गांवों में पानी जाना बंद हो गया। नदी लगभग सूख गई है। क्षेत्रीय पशु पालकों के सामने भी समस्या बढ़ गई है। लोगों ने नहर से सई नदी में पानी छुड़वाने की मांग की है। पानी सूखने से मवेशी भी प्यासे हैं।
सई नदी पर अतिक्रमण की जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने नदी की सीमा पर अतिक्रमण किया है तो कार्रवाई की जाएगी। -दीक्षा जैन, एसडीएम सदर
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देवरिया, कसियापुर, शाहपुर, कोरिगवां, चिरेयाझाला, उतरा, कायमपुर, नन्हे सहित अन्य गांवों के लोगों ने खेतों की सीमाएं बढ़ाने के लिए सई नदी के घाटों तक अतिक्रमण कर लिया है। इसके अलावा पूरे गांव का कचरा भी इसी नदी के दामन में डाला जा रहा है। नदी का अस्तित्व बचाने के लिए समय-समय पर कई समाजसेवी सामने आते रहे, लेकिन ग्रामीणों की नासमझी उनके प्रयासों पर भारी पड़ी। खास बात यह है कि गांवों के लिए सई नदी में बहने वाला जल बेशकीमती था। यहां के खेतों की फसलें सई के पानी से लहलहाती थीं। लेकिन अब सिंचाई के लिए पानी मिलना ही मुश्किल है।
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चीनी मिल ने किया था बचाने का प्रयास
हरियावां चीनी मिल के यूनिट हेड प्रदीप त्यागी ने वृक्ष लगाओ सई बचाओ अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत 2017-18 में सई नदी के किनारे पौधरोपण किया गया। लगभग 10 हजार पौधे नदी के किनारों पर रोपित किए गए। चीनी मिल ने लगभग तीन वर्षों तक इसकी देखभाल भी की। लेकिन गांव वालों का सहयोग न मिलने से पौधे नष्ट हो गए।
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मछली पकड़ने के लिए सुखा दी नदी
पिहानी। मछली पकड़ने के लिए शिकारियों ने पिहानी-हरदोई रोड पर बने पुल के पास सई नदी में पंपिंग सेट लगाकर उसका पानी निकाल दिया। इससे आगे के गांवों में पानी जाना बंद हो गया। नदी लगभग सूख गई है। क्षेत्रीय पशु पालकों के सामने भी समस्या बढ़ गई है। लोगों ने नहर से सई नदी में पानी छुड़वाने की मांग की है। पानी सूखने से मवेशी भी प्यासे हैं।
सई नदी पर अतिक्रमण की जांच कराई जाएगी। यदि किसी ने नदी की सीमा पर अतिक्रमण किया है तो कार्रवाई की जाएगी। -दीक्षा जैन, एसडीएम सदर

फोटो-31-हरियावां क्षेत्र में नाले की तरह दिखने लगी सई नदी की चौड़ाई- फोटो : HARDOI

फोटो-32-पिहानी में मछली पकड़ने के लिए सुखाई गई सई नदी- फोटो : HARDOI