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Hardoi News: दक्ष होंगे राजस्व और चकबंदी अधिकारी, सुधरेगी कार्यप्रणाली

Mon, 10 Aug 2026 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 11:39 PM IST
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Revenue and consolidation officers to become proficient; operational efficiency to improve
फोटो 07: एनएच-731 पर ​स्थिति राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख
== खास खबर ==
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फोटो 07: एनएच-731 पर स्थिति राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान। संवाद
फोटो 08: राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान का भवन। संवाद
- प्रदेश के एकमात्र राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान के लिए 10 करोड़ स्वीकृत
- संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की भी पहल, डीएम के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने लगाई मुहर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान प्रदेश की आधुनिक राजस्व व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार करने वाला प्रमुख केंद्र है। संस्थान में जल्द ही राजस्व के साथ चकबंदी विभाग के अधिकारियों को भी दक्ष बनाया जा सकेगा। सरकार ने संस्थान के विकास के लिए मानसून सत्र में 10 करोड़ रुपये की स्वीकृत दी है।
राजस्व और चकबंदी विभाग से जुड़े प्रशिक्षण को एक ही संस्थान में बेहतर तरीके से संचालित करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है। इसके लिए संस्थान में प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाओं और ढांचागत व्यवस्था को और विकसित किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण व्यवस्था के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी। यहां कानूनगो और नायब तहसीलदारों को सेवा में आने के बाद प्रशिक्षित किया जाता है। भूमि सर्वेक्षण, मानचित्रण, भू-अभिलेख प्रबंधन और राजस्व प्रशासन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर कुशल राजस्व अधिकारियों को तैयार किया जाता है।
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संस्थान की स्थापना साल 1935 में हुई थी। तब इसका नाम सम्राट अकबर के शासन में वित्त मंत्री रहे महान राजस्व सुधारक राजा टोडरमल के नाम पर रखा गया। उस समय संस्थान में पहले प्रधानाचार्य की कुर्सी आगा मिर्जा ने संभाली थी। साल 1978 में संस्थान के प्रधानाचार्य के पद को उच्चीकृत कर निदेशक नाम दिया गया। निदेशक पद पर आईएएस अधिकारी की तैनाती का प्रावधान दिया। संस्थान पहले निदेशक एमएल अग्रवाल बने। दो पीसीएस अधिकारी उप निदेशक और चार तहसीलदार सहायक निदेशक के पद संभालते हैं। राजस्व अभिलेखों में ऐसे साक्ष्य मिलते हैं कि राजा टोडरमल ने भूमि माप, पैमाइश और भू-राजस्व निर्धारण की वैज्ञानिक व्यवस्था को विकसित किया। उनकी दहसाला और जब्दी प्रणाली से कृषि भूमि के सही मूल्यांकन और राजस्व व्यवस्था को नई दिशा मिली थी।
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सेटेलाइट और को-आर्डिनेट आधारित तकनीकी का होता उपयोग
साल 1935 में स्थापित संस्थान का संचालन नुमाइश चौराहा पर होता था। चलन में आज भी इसका नाम केटीएस (कानूनगो ट्रेनिंग सेंटर) ही है। पहले यहां पर मैन्युअल खेतों के सीमांकन और भूमि के पैमाइश का प्रशिक्षण दिलाया जाता था। साल 2017 में संस्थान ने आधुनिक तकनीकी के महत्व को समझा। अब यहां पर सेटेलाइट और को-ऑर्डिनेट आधारित तकनीक के उपयोग से प्रशिक्षण के दौरान भूमि की पैमाइश और सीमांकन की जानकारी दी जाती है।
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मिल सकता है विश्वविद्यालय का दर्जा
राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान वैसे तो अभी तक राजस्व विभाग में चयनित अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए आना होता है। इसमें चयनित नायब तहसीलदार, कानूनगो को कक्षा और फील्ड में प्रशिक्षण दिलाया जाता है। वहीं पीसीएस अधिकारी भी प्रशिक्षण के लिए यहां पर आते हैं। मानसून सत्र में 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद संस्थान को विश्वविद्यालय का भी दर्जा दिए जाने पर मंथन चल रहा है।

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राजस्व अधिकारियों को सेवा में आने के बाद प्रदेश के एकमात्र राजस्व विभाग संबंधी बारीकियों को सीखने के लिए यहां प्रशिक्षित किया जाता है। संस्थान को विस्तार देने के लिए यहां पर काम कराए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। इसमें राजस्व के साथ ही चकबंदी विभाग के अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए भवन और ढांचागत इंतजाम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को प्राथमिकता पर लिया और मानसून सत्र में संस्थान के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जल्द ही यहां पर काम भी शुरू होने की उम्मीद है। - अनुनय झा, डीएम निदेशक राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान

फोटो 07: एनएच-731 पर स्थिति राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख

फोटो 07: एनएच-731 पर स्थिति राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख

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