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Hardoi News: पंजीकरण सरकारी अस्पताल में, प्रसव नर्सिंगहोम में कराने के लिए मजबूर
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जननी सुरक्षा योजना का हाल...संस्थागत प्रसवों पर नहीं दिख रहा जोर, ऑपरेशन भी नहीं बढ़े
62,051 प्रसव कराने का था लक्ष्य. अभी तक सरकारी अस्पतालों में संस्थागत 34,090 प्रसव हुए
संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते परिजन निजी अस्पताल के लिए होते हैं मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण भले ही सरकारी अस्पतालों में होता है, लेकिन प्रसव के समय सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते परिजन निजी अस्पताल चले जाते हैं। एक तरफ अधिकारी सरकारी अस्पताल में प्रसव बढ़ाने पर जोर तो दे रहे हैं, लेकिन जिला महिला अस्पताल को छोड़ कर जिले भर की सीएचसी पर लक्ष्य के सापेक्ष भी प्रसव नहीं हो रहे हैं।
जिले के सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन और सुविधाएं होने के बाद भी गर्भवतियों को लाभ नहीं मिल पा रहा। जिले के एफआरयू पर जहां सिजेरियन प्रसव लक्ष्य के मुताबिक नहीं हो रहे हैं, वहीं संस्थागत प्रसवों पर भी जोर नहीं दिख रहा है। ऐसे में गर्भवती सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के बजाए निजी अस्पतालों पर अधिक भरोसा जता रही हैं।
अप्रैल से अक्तूबर तक सरकारी अस्पताल में पंजीकरण के मुताबिक 62,051 प्रसव कराने का लक्ष्य मिला। इनमें अभी तक सरकारी अस्पतालों में संस्थागत 34,090 प्रसव हुए हैं जबकि 1163 सिजेरियन प्रसव कराए गए हैं। जिला महिला चिकित्सालय और चार एफआरयू अस्पताल में सिजेरियन की सुविधा है। इसके बावजूद सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है और गर्भवतियों को परेशान होना पड़ता है।
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जांच के लिए भटकती हैं गर्भवती
जिले के सरकारी चिकित्सालयों पर गर्भवती को जांच की सुविधा का लाभ भी नहीं मिल पाता है। बीते कई माह से भुगतान न होने की वजह से महिलाओं को निजी क्लीनिकों पर ही अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा था। जिला महिला अस्पताल में भी गर्भवतियों को लाभ मिलने की वजह से निजी सेंटरों पर ही जाना पड़ रहा है।
वर्जन
जननी सुरक्षा योजना महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को लेकर है। सरकारी चिकित्सालयों में सामान्य व सिजेरियन प्रसव के आंकड़े बढ़ाने को लेकर लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। एएनएम को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। इससे प्रसव लगातार बढ़ रहे हैं। नवंबर माह में एएनएम ने 65 प्रसव कराए हैं।-डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरदोई
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62,051 प्रसव कराने का था लक्ष्य. अभी तक सरकारी अस्पतालों में संस्थागत 34,090 प्रसव हुए
संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते परिजन निजी अस्पताल के लिए होते हैं मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण भले ही सरकारी अस्पतालों में होता है, लेकिन प्रसव के समय सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन और स्टाफ की कमी के चलते परिजन निजी अस्पताल चले जाते हैं। एक तरफ अधिकारी सरकारी अस्पताल में प्रसव बढ़ाने पर जोर तो दे रहे हैं, लेकिन जिला महिला अस्पताल को छोड़ कर जिले भर की सीएचसी पर लक्ष्य के सापेक्ष भी प्रसव नहीं हो रहे हैं।
जिले के सरकारी चिकित्सालयों में संसाधन और सुविधाएं होने के बाद भी गर्भवतियों को लाभ नहीं मिल पा रहा। जिले के एफआरयू पर जहां सिजेरियन प्रसव लक्ष्य के मुताबिक नहीं हो रहे हैं, वहीं संस्थागत प्रसवों पर भी जोर नहीं दिख रहा है। ऐसे में गर्भवती सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के बजाए निजी अस्पतालों पर अधिक भरोसा जता रही हैं।
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अप्रैल से अक्तूबर तक सरकारी अस्पताल में पंजीकरण के मुताबिक 62,051 प्रसव कराने का लक्ष्य मिला। इनमें अभी तक सरकारी अस्पतालों में संस्थागत 34,090 प्रसव हुए हैं जबकि 1163 सिजेरियन प्रसव कराए गए हैं। जिला महिला चिकित्सालय और चार एफआरयू अस्पताल में सिजेरियन की सुविधा है। इसके बावजूद सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है और गर्भवतियों को परेशान होना पड़ता है।
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जांच के लिए भटकती हैं गर्भवती
जिले के सरकारी चिकित्सालयों पर गर्भवती को जांच की सुविधा का लाभ भी नहीं मिल पाता है। बीते कई माह से भुगतान न होने की वजह से महिलाओं को निजी क्लीनिकों पर ही अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा था। जिला महिला अस्पताल में भी गर्भवतियों को लाभ मिलने की वजह से निजी सेंटरों पर ही जाना पड़ रहा है।
वर्जन
जननी सुरक्षा योजना महिलाओं के सुरक्षित प्रसव को लेकर है। सरकारी चिकित्सालयों में सामान्य व सिजेरियन प्रसव के आंकड़े बढ़ाने को लेकर लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। एएनएम को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। इससे प्रसव लगातार बढ़ रहे हैं। नवंबर माह में एएनएम ने 65 प्रसव कराए हैं।-डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरदोई