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किसानों के लिए आसमान से बरसी मुसीबत
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हरपालपुर के बढ़ैयनपुरवा में खेत में कटी पड़ी धान की फसल में भरा पानी। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। बेमौसम बरसात से किसानों पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। तेज हवाओं के साथ हुई बरिश से गन्ने और धान की फसल पलट गई। वहीं खेत में पानी भरने से सरसों, मसूर, मटर और आलू की फसल भी बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है।
रविवार दोपहर तीन बजे के बाद मौसम का रुख अचानक बदलने से तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई थी। यह सिलसिला रुक-रुककर जारी रहा। सोमवार और मंगलवार को भी कभी तेज बारिश हुई तो कभी फुहारें पड़ती रहीं। जिले में सरसों की बुवाई के अलावा मसूर और मटर की बुवाई भी हो चुकी है। बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। पानी के जमाव से तीनों ही फसलों की बुवाई बर्बाद हो गई है और अब नए सिरे से बुवाई करनी होगी। पानी का जमाव होने से मसूर, मटर और सरसों का अंकुर खराब हो गया है। इसके अलावा हवा के साथ हुई बारिश से धान की फसल भी चौपट हो गई है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ा धान अधिकांश जगहों पर पलट गया है। गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है।
गन्ना बांधने वाले किसानों की फसल बची
जनपद में लगभग 78 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल होती है। एक लाख से अधिक किसान गन्ने की खेती करते हैं। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से गन्ने की फसल बड़े पैमाने पर पलटी है। हालांकि जिले में बड़ी संख्या में गन्ने के प्रगतिशील किसान हैं और इन किसानों ने गन्ने की फसल बढ़ने के साथ ही इसे बंधवा दिया था। जिन किसानों ने गन्ने की फसल बंधवा दी थी, उस पर ज्यादा असर नहीं हुआ।
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मक्का, तिल की कटी फसल भी बर्बाद
खेतों में पानी भरने के कारण मक्का, तिल और धान की कटी फसल भी बर्बाद हो गई है। हरपालपुर व उसके आसपास के इलाकों में खेतों में तैयार हो चुकी मक्का, तिल और धान की फसल की कटाई चल रही थी। फसलें काटकर किसानों ने खेतों में ही लगा दी थीं। उल्लेखनीय है कि जनपद में 1,54,351 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल हुई है, जबकि 23 हजार हेक्टेयर से अधिक में तिल और 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से अधिक में मक्का की फसल हुई है।
जल्द तैयार होने वाले बीजों का प्रयोग करें
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दीपक मिश्रा कहते हैं कि जो फसल पलट गई है, उसमें नुकसान ज्यादा है। धान की फसल पलटने से दाना काला पड़ना तय है और इसका कोई इलाज नहीं है। पलटा हुआ गन्ना भी सूखने पर सीधा किया जा सकता है, लेकिन इसका पहले सा वजन नहीं रह जाएगा। बुवाई के बाद ही जो फसलें डूब गई हैं उनका उपचार सिर्फ यही हो सकता है कि जल्द ही तैयार होने वाले बीजों का इस्तेमाल नए सिरे से किया जाए।
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रविवार दोपहर तीन बजे के बाद मौसम का रुख अचानक बदलने से तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई थी। यह सिलसिला रुक-रुककर जारी रहा। सोमवार और मंगलवार को भी कभी तेज बारिश हुई तो कभी फुहारें पड़ती रहीं। जिले में सरसों की बुवाई के अलावा मसूर और मटर की बुवाई भी हो चुकी है। बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। पानी के जमाव से तीनों ही फसलों की बुवाई बर्बाद हो गई है और अब नए सिरे से बुवाई करनी होगी। पानी का जमाव होने से मसूर, मटर और सरसों का अंकुर खराब हो गया है। इसके अलावा हवा के साथ हुई बारिश से धान की फसल भी चौपट हो गई है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ा धान अधिकांश जगहों पर पलट गया है। गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है।
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गन्ना बांधने वाले किसानों की फसल बची
जनपद में लगभग 78 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की फसल होती है। एक लाख से अधिक किसान गन्ने की खेती करते हैं। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से गन्ने की फसल बड़े पैमाने पर पलटी है। हालांकि जिले में बड़ी संख्या में गन्ने के प्रगतिशील किसान हैं और इन किसानों ने गन्ने की फसल बढ़ने के साथ ही इसे बंधवा दिया था। जिन किसानों ने गन्ने की फसल बंधवा दी थी, उस पर ज्यादा असर नहीं हुआ।
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मक्का, तिल की कटी फसल भी बर्बाद
खेतों में पानी भरने के कारण मक्का, तिल और धान की कटी फसल भी बर्बाद हो गई है। हरपालपुर व उसके आसपास के इलाकों में खेतों में तैयार हो चुकी मक्का, तिल और धान की फसल की कटाई चल रही थी। फसलें काटकर किसानों ने खेतों में ही लगा दी थीं। उल्लेखनीय है कि जनपद में 1,54,351 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल हुई है, जबकि 23 हजार हेक्टेयर से अधिक में तिल और 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से अधिक में मक्का की फसल हुई है।
जल्द तैयार होने वाले बीजों का प्रयोग करें
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दीपक मिश्रा कहते हैं कि जो फसल पलट गई है, उसमें नुकसान ज्यादा है। धान की फसल पलटने से दाना काला पड़ना तय है और इसका कोई इलाज नहीं है। पलटा हुआ गन्ना भी सूखने पर सीधा किया जा सकता है, लेकिन इसका पहले सा वजन नहीं रह जाएगा। बुवाई के बाद ही जो फसलें डूब गई हैं उनका उपचार सिर्फ यही हो सकता है कि जल्द ही तैयार होने वाले बीजों का इस्तेमाल नए सिरे से किया जाए।