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पराली न जलाने को गांव-गांव जागरुक करेंगी कठपुतलियां
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डायट में पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन पर पपेट दिखाते प्रशिक्षणार्थी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : HARDOI
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फोटो 10- डायट में पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन पर कठपुतली दिखाते प्रशिक्षणार्थी। संवाद न्यूज एजेंसी
कठपुतली नाटक से पराली न जलाने को करेंगे जागरूक
- डायट में हुई पांच दिवसीय कार्यशाला
- 30 गांवों में जाएंगे प्रशिक्षणार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। डायट में प्रशिक्षण के बाद अब प्रशिक्षणार्थी 30 गांवों में जाकर किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करेंगे। इसके लिए कठपुतली नाटकों का मंचन किया जाएगा।
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद भारत सरकार व इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में डायट में चल रही पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हो गया। जिसमें प्रशिक्षणार्थियों ने कठपुतली के माध्यम से पराली जलाने के दुष्परिणाम, मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग हानिकारक, जल है तो कल है, जैविक खेती के फायदे, योग भगाए रोग आदि कई विषयों पर नाटकों का मंचन किया। डायट के सहायक प्राचार्य राम प्रकाश भारती ने बताया कि कार्यशाला में ऐसे कई कठपुतली विज्ञान नाटक तैयार किए हैं, जिनके माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण के कारण, निवारण और सुरक्षा को विभिन्न आयामों से लोगों को बताया जाएगा। डायट में प्रशिक्षित किए गए प्रतिभागी जिले के 30 गांवों में जाकर इन नाटकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे। कार्यशाला में प्रतिभागियों को कठपुतली निर्माण व उनके संचालन, स्क्रिप्ट लेखन से लेकर उसे नाटक के रूप में परिवर्तित करने के गुण सिखाए गए। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक उमेश चंद्र, कल्पना तिवारी, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. एके सिंह, सीएसआईआर दिल्ली के प्रो. तारिक बदर, डॉ. अनामिता मिश्रा, भारतीय विज्ञान लेखक संघ के डॉ. बीपी सिंह, डॉ. अनूप चतुर्वेदी, कठपुतली विशेषज्ञ मिठाई लाल प्रजापति और इश्तियाक अली आदि ने मार्गदर्शन किया।
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कठपुतली नाटक से पराली न जलाने को करेंगे जागरूक
- डायट में हुई पांच दिवसीय कार्यशाला
- 30 गांवों में जाएंगे प्रशिक्षणार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। डायट में प्रशिक्षण के बाद अब प्रशिक्षणार्थी 30 गांवों में जाकर किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करेंगे। इसके लिए कठपुतली नाटकों का मंचन किया जाएगा।
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद भारत सरकार व इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में डायट में चल रही पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हो गया। जिसमें प्रशिक्षणार्थियों ने कठपुतली के माध्यम से पराली जलाने के दुष्परिणाम, मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग हानिकारक, जल है तो कल है, जैविक खेती के फायदे, योग भगाए रोग आदि कई विषयों पर नाटकों का मंचन किया। डायट के सहायक प्राचार्य राम प्रकाश भारती ने बताया कि कार्यशाला में ऐसे कई कठपुतली विज्ञान नाटक तैयार किए हैं, जिनके माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण के कारण, निवारण और सुरक्षा को विभिन्न आयामों से लोगों को बताया जाएगा। डायट में प्रशिक्षित किए गए प्रतिभागी जिले के 30 गांवों में जाकर इन नाटकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे। कार्यशाला में प्रतिभागियों को कठपुतली निर्माण व उनके संचालन, स्क्रिप्ट लेखन से लेकर उसे नाटक के रूप में परिवर्तित करने के गुण सिखाए गए। इस मौके पर कार्यक्रम संयोजक उमेश चंद्र, कल्पना तिवारी, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. एके सिंह, सीएसआईआर दिल्ली के प्रो. तारिक बदर, डॉ. अनामिता मिश्रा, भारतीय विज्ञान लेखक संघ के डॉ. बीपी सिंह, डॉ. अनूप चतुर्वेदी, कठपुतली विशेषज्ञ मिठाई लाल प्रजापति और इश्तियाक अली आदि ने मार्गदर्शन किया।
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