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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना फेल

Sun, 28 Aug 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई Updated Sun, 28 Aug 2016 12:00 AM IST
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Prime crop insurance Fell
फसलें तबाह - फोटो : अमर उजाला

हरदोई। बैंकों और कृषि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही, प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना फेल साबित हुई है। अधिकारियों ने बैठे-बैठे 90 हजार केसीसी धारक किसानों के खातों से बीमा किस्त काट कर अपनी पीठ थपथपा ली। लगभग चार लाख 94 हजार गैर केसीसी धारक एक भी किसान ने फसल का बीमा नहीं कराया। इसके बावजूद अधिकारी फूले नहीं समा रहे हैं।

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केंद्र सरकार ने इसी साल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है। कृषि विभाग के रिकार्ड में जिले मेें पांच लाख 84 हजार 864 किसान पंजीकृत हैं। इस खरीफ सीजन की फसलों के बीमा प्रीमियम जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी, बाद में इसे बढ़ाकर 20 अगस्त कर दिया गया। किंतु कृषि विभाग और बैंकों ने योजना का ठीक से प्रचार प्रसार नहीं किया। इससे जिले के ज्यादातर किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बारीकियां ही नहीं समझ पाए।
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इसका परिणाम ये रहा कि व्यक्तिगत रूप से कोई भी किसान फसलों का बीमा कराने नहीं आया। बैंकों ने केसीसी धारक 90 हजार 402 किसानों के क्रेडिट कार्ड खाते से प्रीमियम काट लिया। इसमें से ज्यादातर किसानों को ये पता ही नहीं है कि उनकी फसल का बीमा हो गया है और उनके केसीसी से प्रीमियम का पैसा काट लिया गया है। किसानों के केसीसी खाते से बीमित फसल का आधा प्रीमियम दो फीसदी प्रीमियम काटा गया है। बाकी का प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार देगी। फसल का नुकसान होने पर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी आफ इंडिया लिमिटेड किसानों को मुआवजा देगी।
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सबसे ज्यादा बीमित राशि गन्ने की
सरकार ने हरदोई में गन्ने का प्रति हेक्टेयर उपज मूल्य 1,10,500 रुपये माना है। इसमें पूरा प्रीमियम डेढ़ फीसदी यानी 1657.50 रुपये किसान से ही लिया जाएगा। इसी तरह प्रति हेक्टेयर धान की उपज का मूल्य 47,007 रुपये माना है। इसमें दो फीसदी यानी करीब 940 रुपये किसान के खाते से प्रीमियम काटा गया है जबकि दो फीसदी केंद्र व राज्य सरकार देंगे। दैवीय आपदा में फसल पूरी तरह नष्ट होने में किसान को बीमा कंपनी प्रति हेक्टेयर 47,007 रुपये क्लेम देगी। इसी तरह प्रति हेक्टेयर मक्का की उपज का मूल्य 21,403 रुपये माना गया है। इसमें भी किसान को दो फीसदी यानी करीब 829 रुपये प्रीमियम देना है। जिले में धान, मक्का के अलावा बाजारा, ज्वार, उड़द, तिल, मूंगफली, गन्ना, अरहर की फसलें शामिल हैं। फसल क्षतिपूर्ति की रिपोर्ट लेखपाल बनाएंगे।


वर्जन
यह सही है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केसीसी खाता एक्टिव किसान 90402 को ही जोड़ा जा सका है। निजी स्तर पर किसानों का आवेदन न आना और किसानों की संख्यानुसार योजना से न जुड़ पाना चिंता का विषय है। रबी की फसलों में इस ओर विशेष प्रयास किए जाएंगे। - डा. विनोद यादव, जिला कृषि अधिकारी

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