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Hardoi News: फुल हुआ पीडियाट्रिक वार्ड, हीलाहवाली में अटका नए वार्ड का काम
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में बच्चों के बेहतर इलाज के लिए पीडियाट्रिक वार्ड बनाया गया।
बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने से शासन ने एक अतिरिक्त अधिक बेड वाला वार्ड बनाने की मंजूरी दे दी। इसका काम पूरा हो गया है और वार्ड बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की हीलाहवाली के चलते अभी तक वार्ड शुरू नहीं हुआ हैै। ऐसे में पुराने पीडियाट्रिक वार्ड में बेड फुल होने से बीमार बच्चों को बिना इलाज दिए लौटा दिया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में बीमार बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभी तक जिला अस्पताल में सिर्फ 10 बेड का ही पीडियाट्रिक वार्ड संचालित है। इसमें सभी बेड फुल रहते हैं और अतिरिक्त बच्चे भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। इसको लेकर शासन ने 42 बेडों का अतिरिक्त पीडियाट्रिक वार्ड संचालित करने के निर्देश दिए।
राजकीय निर्माण निगम हरदोई को एक करोड़ 13 लाख की कीमत से 42 बेड का पीडियाट्रिक बनाने का काम सौंपा। नए पीडियाट्रिक वार्ड में चार बड़े वेंटिलेटर व 12 छोटे वेंटिलेटर रहेंगे। इसके अलावा 26 सामान्य बेड होंगे। पीडियाट्रिक वार्ड का निर्माण पूरा हो चुका है और बेड भी पड़ चुके हैं, लेकिन अभी वार्ड में कुछ काम अधूरे होने से वार्ड संचालित नहीं हुए हैं। बेड फुल होने से बच्चों का अस्पताल में इलाज नहीं हो रहा है। यही नहीं गंभीर बीमार बच्चों को भी बेड के अभाव में बैरंग वापस कराया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की जान पर आफत बनी हुई है।
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हरदोई। बीमार बच्चों को मेडिकल कॉलेज से 100 शैया अस्पताल के बीच में भाग दौड़ करनी पड़ रही है और जिम्मेदार छोटे कार्याें को लेकर हीलाहवाली डाले हुए हैं। 42 बेड पीडियाट्रिक वार्ड में सिर्फ मेडिकल गैस लाइन और एयर कंडीशन लगाने का काम ही रह गया है। निर्माण पूरा होने के साथ बेड भी आने लगे हैं और एक कक्ष में बेड पड़ भी गए हैं, लेकिन जिम्मेदारों की हीलाहवाली से पीडियाट्रिक वार्ड अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
हरदोई। बीमार बच्चों को लखनऊ व अन्य स्थानों पर न जाना पड़े इसके लिए अलग यूनिट स्थापित हुई और चिकित्सक व स्टाफ रखा गया, लेकिन रोजाना चार से पांच बच्चों को बेड न होने का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया जाता है। बेड उपलब्ध नहीं हैं तो बच्चे भर्ती तो नहीं होते हैं, चिकित्सक व स्टाफ बच्चों को उपचार भी नहीं करते हैं। इससे बीमार बच्चों के परिजन उसे लखनऊ या फिर अन्य अस्पताल में ले जाने को मजबूर होते हैं। ऐसे में बच्चे को समय से इलाज भी नहीं मिल पाता है।
मेडिकल गैस पाइप लाइन लगाने को कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन है, जिसका वेंडर अगले सप्ताह तक आएगा। यह काम जल्द ही पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। एक बार कार्य पूरा हो जाए तो वार्ड संचालित कर दिए जाएं। -डॉ. आर्य देशदीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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बीमार बच्चों की संख्या बढ़ने से शासन ने एक अतिरिक्त अधिक बेड वाला वार्ड बनाने की मंजूरी दे दी। इसका काम पूरा हो गया है और वार्ड बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की हीलाहवाली के चलते अभी तक वार्ड शुरू नहीं हुआ हैै। ऐसे में पुराने पीडियाट्रिक वार्ड में बेड फुल होने से बीमार बच्चों को बिना इलाज दिए लौटा दिया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में बीमार बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभी तक जिला अस्पताल में सिर्फ 10 बेड का ही पीडियाट्रिक वार्ड संचालित है। इसमें सभी बेड फुल रहते हैं और अतिरिक्त बच्चे भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। इसको लेकर शासन ने 42 बेडों का अतिरिक्त पीडियाट्रिक वार्ड संचालित करने के निर्देश दिए।
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राजकीय निर्माण निगम हरदोई को एक करोड़ 13 लाख की कीमत से 42 बेड का पीडियाट्रिक बनाने का काम सौंपा। नए पीडियाट्रिक वार्ड में चार बड़े वेंटिलेटर व 12 छोटे वेंटिलेटर रहेंगे। इसके अलावा 26 सामान्य बेड होंगे। पीडियाट्रिक वार्ड का निर्माण पूरा हो चुका है और बेड भी पड़ चुके हैं, लेकिन अभी वार्ड में कुछ काम अधूरे होने से वार्ड संचालित नहीं हुए हैं। बेड फुल होने से बच्चों का अस्पताल में इलाज नहीं हो रहा है। यही नहीं गंभीर बीमार बच्चों को भी बेड के अभाव में बैरंग वापस कराया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की जान पर आफत बनी हुई है।
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हरदोई। बीमार बच्चों को मेडिकल कॉलेज से 100 शैया अस्पताल के बीच में भाग दौड़ करनी पड़ रही है और जिम्मेदार छोटे कार्याें को लेकर हीलाहवाली डाले हुए हैं। 42 बेड पीडियाट्रिक वार्ड में सिर्फ मेडिकल गैस लाइन और एयर कंडीशन लगाने का काम ही रह गया है। निर्माण पूरा होने के साथ बेड भी आने लगे हैं और एक कक्ष में बेड पड़ भी गए हैं, लेकिन जिम्मेदारों की हीलाहवाली से पीडियाट्रिक वार्ड अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
हरदोई। बीमार बच्चों को लखनऊ व अन्य स्थानों पर न जाना पड़े इसके लिए अलग यूनिट स्थापित हुई और चिकित्सक व स्टाफ रखा गया, लेकिन रोजाना चार से पांच बच्चों को बेड न होने का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया जाता है। बेड उपलब्ध नहीं हैं तो बच्चे भर्ती तो नहीं होते हैं, चिकित्सक व स्टाफ बच्चों को उपचार भी नहीं करते हैं। इससे बीमार बच्चों के परिजन उसे लखनऊ या फिर अन्य अस्पताल में ले जाने को मजबूर होते हैं। ऐसे में बच्चे को समय से इलाज भी नहीं मिल पाता है।
मेडिकल गैस पाइप लाइन लगाने को कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन है, जिसका वेंडर अगले सप्ताह तक आएगा। यह काम जल्द ही पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। एक बार कार्य पूरा हो जाए तो वार्ड संचालित कर दिए जाएं। -डॉ. आर्य देशदीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज